-एडीएम सिटी के खिलाफ हत्या का मुकद्मा दर्ज करने की मांग
-एमएलए नंदकिशोर गुर्जर ने एसएसपी से मुलाकात कर की शिकायत
गाजियाबाद। कोरोना काल में लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने प्रशानिक मशीनरी के खिलाफ आक्रामक तेवर दिखाए हैं। विधायक ने एडीएम सिटी शैलेंद्र कुमार के खिलाफ एसएसपी से शिकायत की है। आरोप है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति कराने में एडीएम भेदभाव बरत रहे हैं। उनके विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज करने की अपील की गई है। वहीं, एडीएम सिटी शैलेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी है, हरिद्वार से 100 टन ऑक्सीजन मंगाने के बाद 300 सिलेंडर भराए गए। ऑक्सीजन मिलने पर ही आपूर्ति की जा सकेगी। विधायक द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद है। यह बात दीगर है कि सिफारिश ओर चहेतों को जिले में बेड और ऑक्सीजन जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों द्वारा इंतजाम किए जा रहे हैं। जिले में जहां बेड और ऑक्सीजन नहीं मिल पाने की वजह से लोग दम तोड़ रहे है,वहीं, मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले में अब तक 226 महिला और पुरूषों की कोरोना संक्रमण की वजह से मौत हो चुकी है। वहीं,मगर सरकारी आंकड़ों में मृतकों की संख्या कम दर्शाई जा रही है। बेड और ऑक्सीजन की भारी किल्लत के साथ रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी होने के चलते जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग यह समस्या दूर नहीं कर पा रहा हैं। इंटीगे्रटेड कोविड कमांड कंट्रोल रूम में जहां नंबर खराब होने के साथ मरीजों की कोई सहायता यहां से नहीं हो रही है। वहीं, जिले के अधिकांश अधिकारी फोन नहीं उठा रहे है। जिले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में होने और बेड की व्यवस्था किए जाने के दावे किए जा रहे है।मगर कोरोना संक्रमित होने के बाद मरीजों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे है। जिले में 42 कोविड अस्पताल बनाए गए है। वहीं ,जिले के नोडल अधिकारी डॉ.सेंंथिल पांडियन सी कई दिनों से जिले में डेरा डाले हुए है। मगर व्यवस्था नहीं सुधर पा रही हैं। वहीं ,कार्यवाहक जिलाधिकारी कृष्णा करूणेश का कहना है कि बेड और ऑक्सीजन की उपलब्धता कराने के लिए प्रयास किए जा रहे है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पतालोंं में बेड उपलब्ध कराए जाए। जिला प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में कोरोना संक्रमण बेकाबू हो रहा है।कोरोना संक्रमण को लेकर सभी समस्याओं का निस्तारण करने के लिए इंटीग्रेटेड कोविड कमांड एंड कंट्रोल रूम सेंटर में फोन करने पर नंबर खराब मिल रहे है। मरीजों के लिए बेड उपलब्ध कराने एवं ऑक्सीजन की मांग करने वाले लोगों की कोई हेल्प नहीं की जा रही है।
निजी अस्पतालों पर शिकंजा कसने में नाकामी
कोरोना संक्रमण के बढ़ते केस के चलते जिले में निजी अस्पतालों की मनमानी और नियमों की नाफरमानी के कारण अब मरीजों की जान आफत में पड़ रही है। तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार शिकायतें मिलने के बाद अब इन अस्पतालों पर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने शिकंजा कसना शुरू किया है। ऐसे में लोगों की मांग है कि आपदा के वक्त में आर्थिक लाभ के लिए मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों के सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लोहियानगर स्थित नागर हॉस्पिटल में गुरूवार की रात को पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा। इस दौरान पता चला कि अस्पताल में 6 अप्रैल से रेमडेसिविर इंजेक्शन अलग- अलग सप्लायर से मंगाए गए।जबकि अस्पताल को संक्रमित मरीजों के उपचार की अनुमति 26 अप्रैल को मिली। इस बीच 250 रेमडेसिविर इंजेक्शन अस्पताल में पहुंचे लेकिन ये किन मरीजों को किस दाम में मिले, इसका रिकार्ड अस्पताल नहीं दे सका। इस मामले में विस्तृत जांच की जा रही है। अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है। इसके अलावा कई अन्य अस्पतालों में ऐसे ही हाल है। देखना होगा कि जिला प्रशासन अब इन अस्पताल संचालकों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।















