-राष्ट्रपति निशान से सम्मानित हुई एनडीआरएफ, गाजियाबाद में ऐतिहासिक अलंकरण समारोह में गूंजा राष्ट्र गौरव
-गृह मंत्री अमित शाह ने 8वीं वाहिनी एनडीआरएफ को दिया सर्वोच्च सम्मान, वीर रेस्क्यूअर्स को नमन
-‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के संकल्प के साथ एनडीआरएफ बनी देश-दुनिया की भरोसेमंद आपदा शक्ति
-वर्चुअल उद्घाटन-शिलान्यास, सम्मान समारोह और रोमांचक रेस्क्यू प्रदर्शन ने बढ़ाया कार्यक्रम का गौरव
-गृह मंत्री अमित शाह ने 8वीं वाहिनी एनडीआरएफ को दिया सर्वोच्च सम्मान, वीर रेस्क्यूअर्स को नमन
-‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के संकल्प के साथ एनडीआरएफ बनी देश-दुनिया की भरोसेमंद आपदा शक्ति
-वर्चुअल उद्घाटन-शिलान्यास, सम्मान समारोह और रोमांचक रेस्क्यू प्रदर्शन ने बढ़ाया कार्यक्रम का गौरव
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। कमला नेहरू नगर स्थित 8वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) परिसर गुरुवार को राष्ट्र गौरव और वीरता के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मुख्य आतिथ्यता में भव्य अलंकरण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर एनडीआरएफ को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति निशान’ प्रदान किया गया, जिसे किसी भी बल को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। समारोह का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री ने परेड की सलामी लेकर किया। इसके बाद उन्होंने परिसर में पौधरोपण कर कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हुए रेस्क्यूअर्स को श्रद्धांजलि अर्पित की। एनडीआरएफ की 8वीं वाहिनी के कमांडेंट सुदेश कुमार ने पुष्पगुच्छ भेंट कर गृह मंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान एनडीआरएफ जवानों ने आधुनिक रेस्क्यू तकनीकों और साहसिक करतबों का प्रदर्शन कर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपने संबोधन में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रपति निशान केवल एनडीआरएफ की उपलब्धियों का सम्मान नहीं है, बल्कि आपदा प्रबंधन से जुड़े पूरे तंत्र—एसडीआरएफ, पंचायत स्तर की व्यवस्थाएं, एनसीसी, एनएसएस और हजारों ‘आपदा मित्र’ स्वयंसेवकों के सामूहिक समर्पण की राष्ट्रीय मान्यता है।
गाजियाबाद। कमला नेहरू नगर स्थित 8वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) परिसर गुरुवार को राष्ट्र गौरव और वीरता के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मुख्य आतिथ्यता में भव्य अलंकरण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर एनडीआरएफ को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति निशान’ प्रदान किया गया, जिसे किसी भी बल को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। समारोह का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री ने परेड की सलामी लेकर किया। इसके बाद उन्होंने परिसर में पौधरोपण कर कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हुए रेस्क्यूअर्स को श्रद्धांजलि अर्पित की। एनडीआरएफ की 8वीं वाहिनी के कमांडेंट सुदेश कुमार ने पुष्पगुच्छ भेंट कर गृह मंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान एनडीआरएफ जवानों ने आधुनिक रेस्क्यू तकनीकों और साहसिक करतबों का प्रदर्शन कर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपने संबोधन में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रपति निशान केवल एनडीआरएफ की उपलब्धियों का सम्मान नहीं है, बल्कि आपदा प्रबंधन से जुड़े पूरे तंत्र—एसडीआरएफ, पंचायत स्तर की व्यवस्थाएं, एनसीसी, एनएसएस और हजारों ‘आपदा मित्र’ स्वयंसेवकों के सामूहिक समर्पण की राष्ट्रीय मान्यता है।
उन्होंने कहा कि जब भी देश में किसी आपदा की आशंका होती है और एनडीआरएफ के जवान वर्दी में मौके पर पहुंचते हैं, तब पीडि़त लोगों के मन में विश्वास जागता है कि अब उनकी जान सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि मात्र बीस वर्षों में एनडीआरएफ ने अपने आदर्श वाक्य ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ को चरितार्थ करते हुए देश के 140 करोड़ नागरिकों का विश्वास जीता है। बाढ़, भूकंप, चक्रवात, भूस्खलन, शहरी दुर्घटनाओं और रासायनिक-जैविक आपात स्थितियों में एनडीआरएफ ने असाधारण दक्षता और संवेदनशीलता का परिचय दिया है। गृह मंत्री ने बताया कि वर्ष 2006 में स्थापना के बाद से एनडीआरएफ ने लगभग 12 हजार चुनौतीपूर्ण अभियानों का सफल संचालन किया है, जिसमें 1.5 लाख से अधिक लोगों को जीवित बचाया गया और नौ लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जापान, नेपाल, तुर्किये, म्यांमार और श्रीलंका जैसे देशों में राहत अभियानों के माध्यम से एनडीआरएफ ने भारत की मानवीय सहायता क्षमता को वैश्विक पहचान दिलाई है। समारोह के दौरान गृह मंत्री ने देहरादून स्थित एनडीआरएफ रीजनल रिस्पॉन्स सेंटर का वर्चुअल उद्घाटन किया, जबकि अगरतला, एर्नाकुलम, नूरपुर, लखनऊ, गंगटोक और गांधीनगर में स्थापित होने वाले छह नए रीजनल रिस्पॉन्स सेंटर का शिलान्यास भी किया।
उन्होंने कहा कि देश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए प्रधानमंत्री के दस सूत्रीय एजेंडा के अनुरूप एनडीआरएफ की भूमिका लगातार विस्तारित हो रही है और भविष्य में यह बल वैश्विक स्तर पर और सशक्त भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, आईबी निदेशक तपन कुमार डेका, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के महानिदेशक, एनडीआरएफ के पूर्व महानिदेशक, सशस्त्र बलों एवं राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों के अधिकारी तथा विभिन्न राज्यों से आए गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त एनसीसी, सिविल डिफेंस, नेहरू युवा केंद्र संगठन और आपदा मित्र स्वयंसेवकों की भागीदारी ने समारोह को व्यापक राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। एनडीआरएफ के महानिदेशक पियूष आनंद ने अपने स्वागत भाषण में इस अवसर को बल की यात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव बताते हुए कहा कि एनडीआरएफ लगातार आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सामुदायिक जागरूकता को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025 में अकेले एनडीआरएफ ने 1,400 से अधिक अभियानों का संचालन किया, जो किसी एक वर्ष में अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है।
अलंकरण समारोह में उत्कृष्ट सेवा देने वाले दस अधिकारियों को विशिष्ट एवं सराहनीय सेवा पुलिस पदक तथा तीन रेस्क्यूअर्स को उत्तम जीवन रक्षा पदक प्रदान किए गए। इसके साथ ही प्रोफेशनल प्रतियोगिता, खेलकूद, सर्वश्रेष्ठ नवाचार और सर्वाधिक फिट रेस्क्यूअर के लिए ट्रॉफियां भी वितरित की गईं। समारोह का एक प्रमुख आकर्षण आईटीबीपी ब्रास एवं पाइप बैंड की शानदार प्रस्तुति और एनडीआरएफ रेस्क्यूअर्स द्वारा किया गया रोप रेस्क्यू प्रदर्शन रहा, जिसने उपस्थित लोगों में रोमांच और गर्व का भाव भर दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने कर्तव्य पालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले एनडीआरएफ के 17 वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राष्ट्र हमेशा उनके त्याग का ऋणी रहेगा। उन्होंने बल के सभी अधिकारियों और जवानों को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति निशान अनुशासन, साहस, त्याग और राष्ट्र सेवा की सर्वोच्च पहचान है। भव्य परेड, सम्मान समारोह और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वातावरण के बीच आयोजित यह अलंकरण समारोह न केवल एनडीआरएफ की उपलब्धियों का उत्सव बना, बल्कि आपदा के समय मानवता की सेवा में समर्पित भारत की मजबूत इच्छाशक्ति का भी प्रतीक साबित हुआ। गाजियाबाद की धरती पर आयोजित यह आयोजन आने वाले वर्षों तक एनडीआरएफ के गौरवशाली इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।


















