-सुरक्षा के प्रति जागरूकता और समयबद्ध तैयारी ही कांवड़ यात्रा को अग्नि दुर्घटनाओं से पूरी तरह बना सकती है सुरक्षित: पद्मजा चौहान
-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 12 जिलों के मुख्य अग्निशमन अधिकारियों संग उच्चस्तरीय समीक्षा, शिविरों से हाईराइज भवनों तक सुरक्षा इंतजामों की हुई पड़ताल
-कांवड़ मार्गों पर फायर ऑडिट, मॉक ड्रिल और त्वरित रिस्पांस टीमों पर जोर, होटल, गेस्ट हाउस और कोचिंग सेंटरों की भी होगी सघन जांच
-वैशाली फायर स्टेशन में आधुनिक जिम का लोकार्पण, अग्निशमन विभाग को मिला नया वाटर बाउजर, आपदा प्रबंधन क्षमता होगी और मजबूत
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। आगामी कांवड़ यात्रा-2026 को पूर्णत: सुरक्षित, व्यवस्थित और अग्नि दुर्घटनाओं से मुक्त बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में बुधवार को अपर पुलिस महानिदेशक (अग्निशमन एवं आपात सेवा), उत्तर प्रदेश, श्रीमती पद्मजा चौहान ने वैशाली फायर स्टेशन, गाजियाबाद पहुंचकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के मुख्य अग्निशमन अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में कांवड़ यात्रा के दौरान अग्नि सुरक्षा प्रबंधन, आपातकालीन तैयारियों, संवेदनशील स्थलों की निगरानी तथा जनजागरूकता अभियान को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। बैठक में मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर, गाजियाबाद, बिजनौर, अमरोहा, बदायूं, बरेली और मुरादाबाद सहित कांवड़ यात्रा से जुड़े प्रमुख जनपदों के मुख्य अग्निशमन अधिकारी मौजूद रहे। एडीजी पद्मजा चौहान ने सभी अधिकारियों से जनपदवार तैयारियों की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अग्नि दुर्घटना की संभावना को पूरी तरह समाप्त करने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं।
उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि कांवड़ मार्गों पर स्थापित होने वाले सभी शिविरों में अग्नि सुरक्षा के मानकों का शत-प्रतिशत पालन कराया जाए। शिविर संचालकों एवं आयोजकों को अग्निशमन उपकरणों के उपयोग, गैस सिलेंडरों के सुरक्षित संचालन, विद्युत उपकरणों के सावधानीपूर्वक उपयोग तथा आपातकालीन स्थिति में तत्काल बचाव उपायों की जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के प्रति जागरूकता ही किसी भी बड़ी दुर्घटना को रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है। एडीजी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कांवड़ यात्रा के दौरान फायर स्टेशन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहें तथा संवेदनशील स्थानों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली टीमों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर नियमित निरीक्षण, मॉक ड्रिल और फायर सेफ्टी जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक के दौरान गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में स्थित बहुमंजिला भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की भी विस्तृत समीक्षा की गई। एडीजी पद्मजा चौहान ने निर्देश दिए कि सभी बहुमंजिला इमारतों में नियमित फायर ऑडिट कराया जाए तथा जिन भवनों में अग्निशमन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया है, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है, इसलिए फायर ऑडिट अभियान को लगातार जारी रखा जाए। उन्होंने होटल, गेस्ट हाउस, कोचिंग सेंटर, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य सार्वजनिक भवनों में भी अग्नि सुरक्षा मानकों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिन भवनों में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास, फायर अलार्म अथवा अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक सुधार कराए जाएं। साथ ही संबंधित भवन स्वामियों को सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक करने के भी निर्देश दिए गए।
कार्यक्रम के दौरान वैशाली फायर स्टेशन में फायर कर्मियों के शारीरिक प्रशिक्षण और फिटनेस को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की गई आधुनिक व्यायामशाला (जिम) का भी लोकार्पण किया गया। एडीजी पद्मजा चौहान ने कहा कि किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए फायर कर्मियों का शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्षम और फिट होना अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर कविनगर स्वदेशी कंपाउंड इंडस्ट्री द्वारा अग्निशमन विभाग को अग्निकांडों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उपलब्ध कराया गया वाटर बाउजर भी विभाग को औपचारिक रूप से सौंपा गया। एडीजी ने हरी झंडी दिखाकर इस वाहन को रवाना किया और कहा कि यह आधुनिक संसाधन अग्निशमन विभाग की आपातकालीन क्षमता को और अधिक मजबूत करेगा तथा बड़े अग्निकांडों पर तेजी से नियंत्रण पाने में सहायक सिद्ध होगा।
बैठक के अंत में एडीजी पद्मजा चौहान ने सभी मुख्य अग्निशमन अधिकारियों को निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए। सभी जनपदों में विभागीय समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया, नियमित निरीक्षण और जनजागरूकता के माध्यम से अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित की जाए, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा दोनों अक्षुण्ण रह सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समुचित तैयारी, आधुनिक संसाधनों और प्रभावी समन्वय के बल पर कांवड़ यात्रा-2026 को पूर्णत: सुरक्षित एवं सफल बनाया जाएगा।
















