-छात्रों के मुद्दों का समाधान संवाद से निकले, सड़कों पर टकराव से नहीं
-लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन आम जनता को परेशान करना और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित करना उचित नहीं
उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। देश में शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच जनसेवक तरुण मिश्र ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और सरकार से सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे आम जनता को असुविधा न हो और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा और युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता होना चाहिए। यदि किसी परीक्षा में अनियमितता या पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन इस संवेदनशील विषय को लेकर ऐसे आंदोलन करना, जिनसे जनजीवन बाधित हो या टकराव की स्थिति पैदा हो, समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
तरुण मिश्र ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद और संवैधानिक व्यवस्था है। यदि छात्र, अभिभावक और सामाजिक संगठन अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से सरकार के सामने रखें तो उनकी बात अधिक प्रभावी ढंग से सुनी जा सकती है। उन्होंने कहा कि हिंसक या टकरावपूर्ण माहौल किसी भी आंदोलन की मूल भावना को कमजोर कर देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन छात्रों की भावनाओं को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा जैसे गंभीर विषय पर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
तरुण मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री, संसद और अन्य संवेदनशील सरकारी संस्थानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा नियमों और कानून का पूर्ण पालन किया जाना आवश्यक है। लोकतांत्रिक विरोध और सुरक्षा व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना सभी नागरिकों और संगठनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की सबसे बड़ी चिंता रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया है। सरकार और सभी संबंधित एजेंसियों को परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत एवं तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य करना चाहिए, ताकि युवाओं का विश्वास कायम रहे।
तरुण मिश्र ने यह भी कहा कि यदि किसी भी परीक्षा में अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को कड़ी सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त तंत्र विकसित किया जाए। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक टकराव का माध्यम बनाने के बजाय समाधान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया जाए। अंत में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए, लेकिन विरोध का स्वरूप ऐसा हो जो समाज, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के हितों की रक्षा करे। उनके अनुसार देश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और सरकार की साझा जिम्मेदारी है।















