-पंच परिवर्तन, हिन्दुत्व की विशेषताएँ और संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर हुआ चिंतन
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हिन्दू समाज की एकता, बंधुत्व और स्वाभिमान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रविवार को वैशाली सेक्टर-1 स्थित सनवैली इंटरनेशनल स्कूल के खुले मैदान में भव्य ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, समाजसेवियों और गणमान्य नागरिकों की सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम की अध्यक्षता सनवैली इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल प्रीति गोयल ने की। विराट हिन्दू सम्मेलन की आयोजन समिति में अध्यक्ष घनश्याम गुप्ता, महासचिव अशोक कुमार वर्मा तथा संयोजक सुभाष शर्मा सहित वैशाली सेक्टर-1 के सकल हिन्दू समाज से जुड़े अनेक समाजसेवी व्यक्ति सक्रिय रूप से शामिल रहे।
सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वैशाली महानगर के सह महानगर संघ चालक संजय भसीन ने ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर अपने विचार रखते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को पीतांबरा पीठाधीश आचार्य डॉ. विक्रमादित्य जी का सानिध्य भी प्राप्त हुआ। उन्होंने ‘हिन्दुत्व की विशेषता, वर्तमान चुनौतियाँ और समाधान’ विषय पर संबोधन देते हुए भारतीय संस्कृति और मूल्यों की रक्षा को समय की आवश्यकता बताया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय अधिकारी एवं अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख श्री राजकुमार मटाले ने ‘संघ की 100 वर्षों की यात्रा’ विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने संघ के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रनिर्माण से जुड़े कार्यों का उल्लेख करते हुए हिन्दू समाज से पांच संकल्पों-सामाजिक समरसता, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्व-आधारित जीवनशैली और नागरिक कर्तव्यबोध-को अपनाने का आह्वान किया। वक्ताओं ने जातीय भेदभाव को समाप्त कर समाज में एकता स्थापित करने पर विशेष बल दिया। सम्मेलन का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। मुख्य आयोजन के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में एक लघु नाटिका भी प्रस्तुत की गई, जिसे दर्शकों ने गंभीरता से देखा। इस अवसर पर स्थानीय पार्षद कुसुम गोयल, पूर्व पार्षद डॉ. मनोज गोयल सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। विराट हिन्दू सम्मेलन का समापन समरसता भोज के साथ हुआ। आयोजन ने समाज में एकता, संवाद और सांस्कृतिक चेतना को और अधिक मजबूत करने का संदेश दिया।

















