- उप आबकारी आयुक्त राकेश कुमार सिंह की दोटूक चेतावनी—देयता लंबित तो नवीनीकरण नहीं
- नई लाइसेंस फीस संरचना, एमजीक्यू-एमजीआर और ऑनलाइन प्रक्रिया पर विस्तार से मंथन
- राजस्व वृद्धि के साथ अवैध बिक्री पर कड़ी निगरानी: करुणेंद्र सिंह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा निर्धारित आबकारी नीति वर्ष 2026-27 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय में एक महत्वपूर्ण और विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उप आबकारी आयुक्त, लखनऊ प्रभार राकेश कुमार सिंह ने की, जबकि जिला आबकारी अधिकारी करुणेंद्र सिंह की उपस्थिति में जनपद के समस्त फुटकर एवं थोक मदिरा अनुज्ञापियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य नई नीति के प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी देना, राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करना तथा नवीनीकरण प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाना रहा।
बैठक की शुरुआत में उप आबकारी आयुक्त राकेश कुमार सिंह ने सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया कि वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति को पूरी दृढ़ता के साथ लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता राजस्व वृद्धि के साथ-साथ व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता स्थापित करना है। “किसी भी स्तर पर लापरवाही, देरी या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिनकी देयताएं लंबित होंगी, उनका नवीनीकरण नहीं होगा,” उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा।
बैठक में देशी शराब, कम्पोजिट शॉप, मॉडल शॉप और भांग की दुकानों के लिए निर्धारित वार्षिक एमजीक्यू (न्यूनतम गारंटीकृत कोटा), एमजीआर (न्यूनतम गारंटीकृत राजस्व), बेसिक लाइसेंस फीस, प्रोसेसिंग फीस तथा नवीनीकरण शुल्क के आकलन की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि नई नीति के तहत गणना की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुव्यवस्थित की गई है, ताकि किसी प्रकार की अस्पष्टता या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
राकेश कुमार सिंह ने कहा कि सभी अनुज्ञापी अपनी-अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों का समय से निर्वहन करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभागीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन और भुगतान की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल ट्रैकिंग के दायरे में रहे। “ऑनलाइन प्रक्रिया का उद्देश्य केवल सुविधा देना नहीं, बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। जो नियमों का पालन करेंगे, उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी; लेकिन उल्लंघन की स्थिति में कठोर कार्रवाई तय है,” उन्होंने कहा।
बैठक में थोक अनुज्ञापनों की वर्ष 2026-27 हेतु लाइसेंस फीस में किए गए बदलावों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि नई फीस संरचना बाजार की वर्तमान परिस्थितियों और राजस्व आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। राकेश कुमार सिंह ने कहा कि थोक विक्रेता पूरी आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ हैं, इसलिए उनसे अपेक्षा है कि वे स्टॉक, परिवहन और कर अदायगी में पूर्ण पारदर्शिता रखें। उन्होंने चेताया कि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई से भी विभाग पीछे नहीं हटेगा।
फुटकर अनुज्ञापियों से अधिकाधिक दुकानों का समय से नवीनीकरण कराने की अपील की गई। इस दौरान यह स्पष्ट किया गया कि वर्ष 2025-26 की दुकानों से संबंधित सभी बकाया देयताओं का तत्काल निपटान अनिवार्य है। “पुरानी देनदारियां समाप्त किए बिना नई शुरुआत संभव नहीं है। शासन की मंशा स्पष्ट है—पहले बकाया जमा करें, फिर नवीनीकरण कराएं,” राकेश कुमार सिंह ने कहा। उनकी कार्यशैली की सख्ती और स्पष्टवादिता बैठक के दौरान साफ झलकती रही।
नवीनीकरण प्रक्रिया के लिए समय-सारणी की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने आवश्यक प्रपत्रों की पूर्ति और ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करने की विधि विस्तार से समझाई। बताया गया कि अपूर्ण दस्तावेज या समयसीमा के बाद प्राप्त आवेदन पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी कारणों का हवाला देकर देरी स्वीकार नहीं की जाएगी, इसलिए सभी अनुज्ञापी समय से आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
जिला आबकारी अधिकारी करुणेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि नई आबकारी नीति केवल राजस्व वृद्धि का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक जवाबदेह व्यवस्था की नींव है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि जनपद में आबकारी व्यवस्था पारदर्शी, अनुशासित और कानूनसम्मत हो। अवैध बिक्री, ओवररेटिंग या लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।” उन्होंने अनुज्ञापियों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि विभाग किसी भी समस्या के समाधान के लिए तत्पर है, लेकिन नियमों से समझौता संभव नहीं है।
बैठक के दौरान अनुज्ञापियों ने लाइसेंस फीस, एमजीक्यू निर्धारण, ऑनलाइन पोर्टल और नवीनीकरण प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न प्रश्न उठाए। उप आबकारी आयुक्त एवं जिला आबकारी अधिकारी ने मौके पर ही सभी प्रश्नों के उत्तर देकर भ्रम की स्थिति दूर की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नई नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए विभाग और लाइसेंसधारकों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
बैठक के अंत में यह संदेश दोहराया गया कि वर्ष 2026-27 में राजस्व लक्ष्य प्राप्ति के साथ-साथ अवैध शराब के कारोबार पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। विभागीय निरीक्षण और प्रवर्तन कार्यवाही को और तेज करने की रणनीति भी साझा की गई। बैठक में आबकारी निरीक्षक रिचा सिंह, राहुल सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, विवेक सिंह, अभिषेक सिंह, रजनीश प्रताप सिंह, अरविंद बघेल, कौशलेन्द्र रावत, प्रदीप शुक्ला, अखिलेश चौधरी, अखिल गुप्ता, मोनिका यादव, रामश्याम त्रिपाठी, शिखर मल्ल और विजय राठी सहित अन्य अधिकारी एवं अनुज्ञापी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर यह बैठक नई आबकारी नीति 2026-27 के कड़े और सुव्यवस्थित क्रियान्वयन की औपचारिक शुरुआत साबित हुई। राकेश कुमार सिंह की सख्त कार्यशैली और स्पष्ट संदेश ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले वर्ष में आबकारी विभाग राजस्व, अनुशासन और पारदर्शिता—तीनों मोर्चों पर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगा।

















