-क्षेत्रीय मेडिकल हब और नए आयुर्वेद संस्थान स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी साझेदारी को बढ़ावा देंगे
-स्वास्थ्य कर्मियों का विकास, बायोफार्मा, डिजिटल स्वास्थ्य और उन्नत अनुसंधान पर बजट का विशेष जोर
-पूंजी निवेश, रोबोटिक सर्जरी, एआई और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से रोजगार और नवाचार को बढ़ावा
-राजकोषीय घाटे को 4 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य वित्तीय अनुशासन और आर्थिक स्थिरता का संकेत
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. पी. एन. अरोड़ा ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त करने और देश को मेडिकल वैल्यू टूरिज्म का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक विकास-केंद्रित रोडमैप बताया है। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि बजट में प्रस्तावित क्षेत्रीय मेडिकल हब और नए आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना स्वास्थ्य क्षेत्र तथा इससे जुड़े सहयोगी क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी साझेदारी की व्यापक संभावनाओं को दर्शाती है। ये पहल न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगी, बल्कि भारत की पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने में भी सहायक होंगी। उन्होंने कहा कि पिछले बजट में ‘हील इन इंडिया’ पहल को विशेष प्रोत्साहन दिया गया था, जबकि इस वर्ष बजट भाषण में इसका उल्लेख अपेक्षाकृत सीमित रहा है।
हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि क्रियान्वयन के स्तर पर इस महत्वपूर्ण पहल को और अधिक मजबूती दी जाएगी, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर भारत की स्थिति और सुदृढ़ हो सके। डॉ. अरोड़ा ने स्वास्थ्य कर्मियों के विकास, बायोफार्मा क्षेत्र को सशक्त बनाने, उन्नत अनुसंधान संस्थानों और डिजिटल स्वास्थ्य पर दिए गए जोर को उत्साहजनक बताया। उन्होंने कहा कि पूंजी निवेश, संरचनात्मक सुधार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक सर्जरी, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास कोष तथा सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 जैसे कदम स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ नवाचार और शोध को भी नई गति देंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि ये सभी पहल सहायक उद्योगों को प्रोत्साहित करेंगी, रोजगार के नए अवसर सृजित करेंगी और विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप एक मजबूत और आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगी। इसके साथ ही राजकोषीय घाटे को चार प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता का सकारात्मक संकेत है, जो भारत की विकास यात्रा पर भरोसे को और मजबूत करता है।
















