शमन शुल्क देकर अधिकृत होंगे अवैध निर्माण

शमन योजना से जीडीए को मिलेंगे 40-50 करोड़

गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) सीमा क्षेत्र में स्वीकृत मानचित्र से अधिक अवैध निर्माण अब कंपाउंडिंंग यानी शमन शुल्क लेने के बाद अधिकृत हो सकेंगे। इससे जीडीए को मोटी आमदनी होने का अनुमान है। इसके अलावा अवैध निर्माण को शमन कराने के लिए बिल्डरों के अलावा नागरिकों को भी लाभ मिल सकेगा। जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करूणेश ने बताया कि शासन ने शमन योजना को बहाल कर दिया है। इससे जीडीए सीमा क्षेत्र में स्वीकृत नक्शे से अधिक अवैध निर्माण को कंपाउंडिंग शुल्क लेकर शमनित किया जा सकेगा। शमन योजना-2020 को लेकर हाईकोर्ट ने स्थगनादेश कर दिया था। शासन स्तर पर इस संबंध में विधिक राय ली गई। प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार ने आदेश जारी कर शमन योजना-2020 की जगह शमन योजना-2010 को जारी रखने के निर्देश दिए हैं। जीडीए क्षेत्र में अब अवैध निर्माण शमन शुल्क लेकर अधिकृत किए जा सकेंगे। जीडीए को इससे कई करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है। शमन शुल्क से संबंधित करीब 1500 लंबित आवेदन पत्रों का निस्तारण भी किया जा सकेगा। जीडीए को उम्मीद है कि शमन योजना से करीब 40 से 50 करोड़ रुपए की आय हो सकेगी। संपत्तियों के म्यूटेशन के 500 से ज्यादा लंबित आवेदन कई आवासीय योजना की संपत्तियों के म्यूटेशन के पड़े हैं। जीडीए उपाध्यक्ष ने इन संपत्तियों के म्यूटेशन को निस्तारण करने हेतु निर्देश दिए हैं। वहीं, तहसील में सब रजिस्ट्रार कार्यालय से भी इनका सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। पावर ऑफ अटार्नी के जरिए भवन एवं भूखंड की फर्जी रजिस्ट्री कराने पर सत्यापन करने को अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसी करीब 250 रजिस्ट्रियों का सत्यापन कराया जा रहा है। जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करूणेश ने बताया कि शासन ने शमन उपविधि-2010 के प्रविधानों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। शमन योजना-2020 पर 15 जुलाई 2020 से स्थगनादेश के चलते रोक लगी हुई थी। लेकिन अब शमन योजना को लागू किए जाने से 20 जनवरी 2021 को समाप्त हो चुकी है। हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के संबंध में शासन स्तर पर अपर महाधिवक्ता से परामर्श लिया गया। परामर्श के बाद शमन उपविधि-2010 को लागू कर दिया गया है।