गाजियाबाद। जीडीए ने दिल्ली से सटी तुलसी निकेतन कॉलोनी के भवनों को असुरक्षित घोषित कर रखा है। उधर, नगर निगम के अपर नगरायुक्त प्रमोद कुमार द्वारा जीडीए को भेजे गए पत्र से प्रतीत होता है कि जिस अपर जलाशय के जरिए पेयजल आपूर्ति हो रही है, वह भी सुरक्षित नहीं है। सीवर पंप आदि भी खतरनाक स्थिति में हैं। इस कारण निकट भविष्य में हादसे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। तुलसी निकेतन कॉलोनी 1990 के दौरान विकसित की गई थी। भवनों को 90 साल की लीज पर दिया गया है। लगभग 25 साल के भीतर कॉलोनी के भवन असुरक्षित हो गए। प्राधिकरण अपने उपभोक्ताओं/आवंटियों के हितों का संरक्षण कर तत्काल अध्यासियों को सुरक्षित पुर्नवास व भवनों के पुनोर्दार की व्यवस्था करें। पत्र में यह भी उल्लेख है कि योजना में निर्मित अपर जलाशय, पंप हाउस व अन्य संरचनाएं जो कि प्राधिकरण द्वारा निर्मित व संचालित है तथा जर्जर है। उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा-331 का हवाला देकर कहा गया कि अपर जलाशय आदि के चलते पैदा होने वाले संकट के समस्त कारणों को जीडीए खर्चे पर दूर किया जाए। ये भी उल्लेख किया कि इस बीच यदि किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो उसके लिए जीडीए जिम्मेदार होगा। पत्र की प्रति डीएम, जीडीए उपाध्यक्ष एवं म्युनिसिपल कमिश्नर को भी भेजी गई है। बता दें कि जीडीए के आला अधिकारी समय से पहले ही तुलसी निकेतन के खंडहर में तब्दील भवनों को नगर निगम से असुरक्षित घोषित कराकर पल्ला झाड़ने में लगे है। प्रयास ये है कि कोई भवनों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खडे नहीं करने पाए। हालांकि जीडीए बोर्ड सदस्य हिमांशु मित्तल का कहना है कि शासन को चाहिए कि वह जीडीए पर भविष्य में कभी भवनों आदि का निर्माण न करने पाए, इसके लिए शासनादेश जारी करें। उन्होंने आरोप लगाया कि कमीशन के खेल में जीडीए के अफसर इस कदर मशगूल हैं कि गुणवत्ता की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है।















