विजयनगर में जल्द शुरू होगी गंगाजल आपूर्ति, 15 जुलाई से कार्य प्रारंभ

• गंगाजल योजना के लिए तीन माह में कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य, अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
• इंदिरापुरम की सीवर समस्या पर संयुक्त सर्वे के निर्देश, जल निगम और जलकल विभाग करेंगे समाधान की पहल
• स्काडा योजना के तहत इंदिरापुरम और कविनगर में लगेगा पायलट प्रोजेक्ट, पानी और मैनपावर दोनों की होगी बचत
• लीकेज रोकने के लिए पूरे शहर में निगरानी के निर्देश, जल व्यर्थ बहा तो जिम्मेदारी तय होगी
• नगर निगम मुख्यालय में हुई समीक्षा बैठक, नगर आयुक्त ने सभी कार्यों की दी साप्ताहिक रिपोर्टिंग की हिदायत

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम विजयनगर क्षेत्र के लाखों निवासियों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। क्षेत्र में गंगाजल की आपूर्ति के लिए 15 जुलाई से कार्य प्रारंभ होगा और इसे तीन माह में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बुधवार को निगम मुख्यालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक के दौरान यह निर्देश दिए। बैठक में जलकल विभाग व जल निगम के अधिकारियों से गंगाजल योजना की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली गई। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कार्य की गुणवत्ता के साथ-साथ समयबद्धता भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

इसी बैठक में इंदिरापुरम क्षेत्र की पुरानी सीवर समस्या पर भी गहन मंथन हुआ। नगर आयुक्त ने जल निगम और जलकल विभाग को संयुक्त टीम गठित कर सर्वे करने और समाधान की दिशा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। जल्द ही यहां भी सुधार कार्य प्रारंभ किए जाएंगे। नगर आयुक्त ने अमृत योजना के अंतर्गत लागू हो रही स्काडा प्रणाली पर भी फोकस किया। इस स्मार्ट सिस्टम के तहत कविनगर और इंदिरापुरम में नलकूपों को ऑटोमेटिक ऑन-ऑफ मोड पर लाया जाएगा, जिससे जल की भारी बचत होगी और मैनपावर की भी आवश्यकता घटेगी।

शहर में जल रिसाव की समस्याओं को गंभीर मानते हुए नगर आयुक्त ने पूरे नगर में जल लीकेज की मॉनिटरिंग के निर्देश भी जारी किए। जलकल विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि वह किसी भी कोने में जल का दुरुपयोग या व्यर्थ बहाव न होने दे। जलकल महाप्रबंधक कामाख्या प्रसाद आनंद ने बताया कि सभी निर्देशों का पालन सख्ती से किया जाएगा और विजयनगर के निवासियों को जल्द ही शुद्ध गंगाजल की सुविधा मिलने लगेगी। इंदिरापुरम में सीवर के स्थायी समाधान के लिए देयता आधारित आंकलन भी शुरू कर दिया गया है।
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