खुशबू की रानी महुआ अवैध शराब का धंधा हुआ बेनकाब, आबकारी विभाग की कार्यवाही से तस्करों की उड़ी रातों की नींद

-अवैध कच्ची शराब और लहन की बड़ी बरामदगी, तस्करों पर नकेल, तस्कर गिरफ्तार
-गांव, घर और बगीचों में छापेमारी, तस्करों का नेटवर्क टूटने के कगार पर
-10 लीटर कच्ची शराब और 70 किलो लहन नष्ट, तस्करों पर शिकंजा कसने के निर्देश

उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। सर्दी के मौसम के शुरू होते ही प्रदेश की राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों में महुआ अवैध शराब का धंधा फिर से सक्रिय होने लगा है। कई गांवों और सीमावर्ती इलाकों में यह धंधा बड़े पैमाने पर संचालित होता है, जिसमें अलग-अलग एजेंट तैनात हैं जो शराब की बिक्री और सप्लाई का नेटवर्क बनाए हुए हैं। अवैध शराब के इस संगठित गिरोह को तोड़ने के लिए जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने कड़े कदम उठाने की रणनीति तैयार कर ली है। उन्होंने बताया कि लखनऊ देहात क्षेत्र में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री को पूरी तरह जड़ से खत्म करने के लिए आबकारी विभाग की टीम दिन-रात छापेमारी और निगरानी कर रही है। आबकारी अधिकारी ने कहा कि अवैध शराब का यह कारोबार सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। लोग बिना जानकारी के सस्ती और जहरीली शराब का सेवन करते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और समाज पर गंभीर असर पड़ता है। हमारा उद्देश्य इसे जड़ से समाप्त करना है।

लखनऊ में अवैध शराब माफिया खेतों, घरों, जंगल और बगीचों में शराब का निर्माण करते हैं और इसे पाउच में पैक कर सस्ते दाम पर बेचते हैं। इसके कारण सामाजिक और आर्थिक अपराधों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। करुणेन्द्र सिंह ने बताया कि इस बार दीपावली के अवसर पर भी विभाग ने अवैध शराब की बिक्री और तस्करी को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के तहत अखिलेश चौधरी और अभिषेक सिंह की संयुक्त टीम ने थाना-रहीमाबाद क्षेत्रान्तर्गत ग्राम औलिया खेड़ा और आसपास के संदिग्ध गांवों, स्थलों और बगीचों में छापेमारी की।
इस कार्रवाई के दौरान टीम ने लगभग 10 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की और लगभग 70 किलोग्राम लहन मौके पर नष्ट किया। करुणेन्द्र सिंह ने बताया कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा और तस्करों के खिलाफ कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। जागरूकता अभियान इस सख्ती का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि लोगों को अवैध शराब के खतरों के प्रति जागरूक करना हमारे अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हथियार है। यही जनता हमें इस अवैध कारोबार को खत्म करने में सहयोग प्रदान करती है।

अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ अभियान:
आबकारी विभाग ने सिर्फ छापेमारी ही नहीं की, बल्कि निगरानी तंत्र और मुखबिरों के नेटवर्क को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। करुणेन्द्र सिंह ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि अवैध शराब के गिरोह को किसी भी हाल में अपने ऑपरेशन में सफलता न मिले। इसके लिए हम लगातार दबिश, जांच और निगरानी कर रहे हैं। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि महुआ अवैध शराब वैध दुकानों पर मिलने वाली ब्रांडेड शराब के मुकाबले काफी सस्ती होती है। यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में इसका अधिकतम सेवन होता है, जिससे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। आबकारी विभाग ने इस अभियान के दौरान स्थानीय पुलिस और अन्य विभागों के साथ समन्वय बनाए रखा है, ताकि अवैध शराब की तस्करी और बिक्री को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। विभाग लगातार यह सुनिश्चित कर रहा है कि किसी भी तस्कर को छूट न मिले और यदि कोई मामले में लापरवाही करे तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

जनता और प्रशासन का सहयोग:
करुणेन्द्र सिंह ने जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत आबकारी विभाग को दें। उन्होंने कहा कि अवैध शराब के खिलाफ हमारी मुहिम तभी सफल होगी जब जनता प्रशासन का सहयोग करे। जागरूकता और सूचना देने वाले लोग ही इस अवैध धंधे को जड़ से खत्म करने में हमारी मदद कर सकते हैं। अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ हम लगातार छापेमारी कर रहे हैं। तस्करों के ठिकानों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए हर रोज दबिश और निगरानी जारी है।

इस बार दीपावली के अवसर पर किसी भी तस्कर को अपनी हरकतों में सफलता नहीं मिली। आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया कि यह अभियान लगातार चलाया जाएगा और अवैध शराब निर्माण, बिक्री और तस्करी पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग अवैध शराब के खिलाफ कड़े कानून प्रवर्तन और जागरूकता अभियान दोनों को साथ लेकर चल रहा है। इस प्रकार, लखनऊ में आबकारी विभाग की यह सख्त कार्रवाई और सुनियोजित रणनीति महुआ अवैध शराब के धंधे को कड़ी चोट देने और समाज में जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।