अफॉर्डेबल हाउसिंग संकट: बजट में ठोस कदम उठाने की मांग, 2030 तक 3 करोड़ घरों की कमी का खतरा

-व्यापारी एकता समिति संस्थान का चेतावनी- मिडिल और लोअर मिडिल क्लास के परिवारों का घर का सपना खतरे में, सरकार को बजट में ठोस घोषणाएं करनी होंगी

उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। देश के हाउसिंग सेक्टर की वर्तमान स्थिति पर व्यापारी एकता समिति संस्थान ने गंभीर चिंता जताई है। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा कि देश का हाउसिंग सेक्टर आज दोराहे पर खड़ा है। जहां एक ओर लग्जरी हाउसिंग सेक्टर लगातार नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है और निवेशकों की भारी डिमांड बनी हुई है, वहीं मिडिल और लोअर मिडिल क्लास के परिवारों के लिए घर का सपना धीरे-धीरे टूटता जा रहा है। व्यापारी एकता समिति संस्थान ने सरकार से अपील की है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में अफॉर्डेबल हाउसिंग को लेकर ठोस और निर्णायक घोषणाएं की जाएँ। प्रदीप गुप्ता ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में देश में अफॉर्डेबल हाउसिंग का संकट और गहरा जाएगा। उन्होंने अनुमान लगाया कि 2030 तक अफॉर्डेबल हाउसिंग की कमी लगभग 3 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है।

गौरतलब है कि वर्तमान में देश के शहरी क्षेत्रों में लगभग 94 लाख अफॉर्डेबल घरों की कमी है। प्रदीप गुप्ता ने कहा कि यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह लाखों मिडिल और लोअर मिडिल क्लास परिवारों के भविष्य का सवाल है, जो अपने घर का सपना देख रहे हैं। यदि सरकार ने समय रहते इस दिशा में कदम नहीं उठाया, तो हर साल करीब 15 लाख अतिरिक्त परिवार अपने घर खरीदने से वंचित रह जाएंगे।
रियल एस्टेट सेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 में देश के रियल एस्टेट मार्केट में अफॉर्डेबल हाउसिंग की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत थी, जो 2025 में गिरकर मात्र 18 प्रतिशत रह गई है। यह स्पष्ट संकेत है कि अफॉर्डेबल हाउसिंग पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और इस कारण सेक्टर की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। प्रदीप गुप्ता ने कहा कि अफॉर्डेबल हाउसिंग केवल घरों का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज के आर्थिक और सामाजिक संतुलन का मुद्दा भी है।

मिडिल और लोअर मिडिल क्लास के परिवारों के लिए घर का सपना उनके भविष्य, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। यदि सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में देश में सामाजिक असमानता और आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। व्यापारी एकता समिति संस्थान ने बजट में कुछ विशेष कदम उठाने की मांग की है। इसमें घर खरीदने वालों के लिए कर में छूट, हाउसिंग डेवलपर्स के लिए प्रोत्साहन पैकेज, आसान लोन और ब्याज में रियायत, भूमि पर टैक्स में छूट तथा अफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में सरकारी सहायता शामिल है। प्रदीप गुप्ता ने कहा कि इन कदमों से न केवल अफॉर्डेबल हाउसिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी, बल्कि लाखों परिवारों को अपने घर का सपना साकार करने का अवसर भी मिलेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि अफॉर्डेबल हाउसिंग को सिर्फ एक आंकड़ा मानने की बजाय इसे सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से प्राथमिकता दी जाए।

यदि सही समय पर नीतिगत हस्तक्षेप किया गया, तो न केवल हाउसिंग सेक्टर का विकास होगा, बल्कि मिडिल और लोअर मिडिल क्लास परिवारों के लिए घर का सपना भी साकार हो सकेगा। प्रदीप गुप्ता ने चेतावनी दी कि अफॉर्डेबल हाउसिंग में देरी का मतलब है, हर साल लाखों परिवारों का घर का सपना टूटना और सामाजिक असंतुलन बढऩा। उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल ठोस और निर्णायक कदम उठाने होंगे, अन्यथा 2030 तक देश में 3 करोड़ अफॉर्डेबल यूनिट्स की कमी एक गंभीर संकट के रूप में सामने आएगी।

व्यापारी एकता समिति संस्थान ने यह भी स्पष्ट किया कि अफॉर्डेबल हाउसिंग की समस्या केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और मझौले शहरों में भी यह एक बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे में बजट में ठोस घोषणाएं करने से देश में हाउसिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी और आम नागरिकों के लिए अपने घर का सपना साकार करना आसान होगा। उन्होंने कहा कि अफॉर्डेबल हाउसिंग को प्राथमिकता देने का समय अब है, अन्यथा आने वाले वर्षों में देश में सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर हाउसिंग संकट गहरा जाएगा।