-फर्जी हस्ताक्षर कर बुकिंग करने वाले नगर निगम के दो कर्मचारी निलंबित
– महापौर ने विशेष अधिकार से मिलने वाली बुकिंग छूट पर अग्रिम आदेश तक लगाई रोक
– अब सामुदायिक भवन और अविकसित पार्कों की बुकिंग पूरी राशि जमा होने पर ही होगी
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम में सामुदायिक भवन और अविकसित पार्कों की बुकिंग में महापौर के फर्जी हस्ताक्षर कर भ्रष्टाचार करने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन सख्त हो गया है। मामले के उजागर होने पर नगर निगम के दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही महापौर सुनीता दयाल ने नई व्यवस्था लागू करते हुए आदेश दिया है कि अब सामुदायिक भवन और अविकसित पार्कों की बुकिंग केवल पूरी धनराशि जमा होने के बाद ही की जाएगी। बताया गया है कि महापौर को नगर निगम के सामुदायिक भवनों और अविकसित पार्कों की बुकिंग में जरूरतमंद लोगों को रियायत देने का विशेष अधिकार प्राप्त है। इस अधिकार के तहत समय-समय पर शादी समारोह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए जरूरतमंद लोगों को बुकिंग शुल्क में छूट दी जाती रही है।
इसी व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए महापौर कार्यालय में तैनात नगर निगम के दो कर्मचारियों ने सांठगांठ कर महापौर के फर्जी हस्ताक्षर कर सामुदायिक भवनों की बुकिंग करना शुरू कर दिया। आरोप है कि बुकिंग कराने वाले लोगों से पूरा पैसा लिया जाता था, जबकि निगम में कम राशि जमा कराई जाती थी। मामले की जानकारी सामने आने के बाद नगर आयुक्त ने महापौर कार्यालय में तैनात प्रेमपाल और संपत्ति विभाग में कार्यरत कर्मचारी रमेश चंद्र को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई के बाद नगर निगम के कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि विशेष अधिकार के तहत दी जाने वाली छूट को अग्रिम आदेश तक रोक दिया गया है। अब शहर में सामुदायिक भवनों और अविकसित पार्कों समेत सभी प्रकार की बुकिंग केवल पूरी धनराशि जमा होने के बाद ही की जाएगी। इससे बुकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगेगी।
















