-दरोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में ‘अवसरवादी’ के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द आने पर उठा विवाद
-जनसेवक तरुण मिश्र ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई
-भर्ती परीक्षाओं में जाति और धर्म से जुड़े आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग बर्दाश्त नहीं: ब्रजेश पाठक
उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हाल ही में आयोजित दरोगा भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा के प्रश्नपत्र में ‘अवसर के अनुसार बदलने वाला कौन?’ सवाल के जवाबों के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द दिए जाने पर कई संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। इसे लेकर समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। इस मुद्दे पर जनसेवक तरुण मिश्र ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे समाज की भावनाओं को आहत करने वाला बताया और सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। रविवार को जनसेवक तरुण मिश्र ने इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने परीक्षा में पूछे गए इस सवाल को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह समाज के एक वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला भी है।
तरुण मिश्र ने कहा कि यह समझ से परे है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों ने इस तरह के विकल्प को शामिल करने की जरूरत क्यों महसूस की। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं और इनमें पूरी गंभीरता, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ प्रश्न तैयार किए जाने चाहिए। यदि किसी समुदाय, जाति या वर्ग विशेष को लक्ष्य बनाकर प्रश्न या विकल्प दिए जाते हैं तो इससे समाज में अनावश्यक विवाद और असंतोष पैदा होता है।
उन्होंने कहा कि यह भी जांच का विषय है कि ऐसे प्रश्नपत्रों को तैयार करने के बाद उनकी समीक्षा और जांच करने वाली समिति ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया। केवल प्रश्नपत्र तैयार करने वाले व्यक्ति पर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले प्राध्यापकों और उसे जांचने वाली समिति के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
तरुण मिश्र ने यह भी कहा कि पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। कभी प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आती हैं तो कभी प्रश्नों को लेकर आपत्तियां उठती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से युवाओं का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर कमजोर होता है। इसलिए सरकार को इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा पैदा न हो। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि किसी भी परीक्षा में ऐसा कोई प्रश्न या विकल्प नहीं होना चाहिए जिससे किसी समुदाय या वर्ग की भावनाएं आहत हों। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और संबंधित अधिकारियों से पूरी जानकारी मांगी गई है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या गलती सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सभी भर्ती बोर्डों और आयोगों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि परीक्षाओं में प्रश्न तैयार करते समय विशेष सावधानी बरती जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की जाति या धर्म से जुड़ी अमर्यादित टिप्पणी को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में इस तरह की गलती दोहराई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें प्रतिबंधित भी किया जा सकता है। सरकार के इस रुख के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे।
















