गर्मी में त्वचा की सुरक्षा: विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

  • तेज धूप और बढ़ती गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी
  • सूती कपड़े, सनस्क्रीन और सही दिनचर्या से बच सकती हैं कई बीमारियां
  • मौसम परिवर्तन के साथ बढ़ रहे स्किन और डिहाइड्रेशन के मामले

उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में लोग अक्सर अपने स्वास्थ्य की अनदेखी कर देते हैं, जिसका असर सबसे पहले शरीर और त्वचा पर दिखाई देता है। मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव, बढ़ती गर्मी और तेज धूप के बीच स्वास्थ्य और त्वचा की विशेष देखभाल बेहद आवश्यक हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर कई मौसमी बीमारियों और त्वचा संबंधी समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है। प्रसिद्ध त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ सुयश सिंह तोमर (एमबीबीएस, एमडी, डर्मेटोलॉजिस्ट), जो वर्तमान में डरमेक्स स्किन क्लिनिक (गोमती नगर विस्तार) और फातिमा हॉस्पिटल (महानगर), लखनऊ में सेवाएं दे रहे हैं। ने बताया कि आने वाले महीनों में पसीना और त्वचा का तैलीय स्राव बढऩे से संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, शरीर में पानी की कमी, सनबर्न, एलर्जी, रैशेज और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याएं तेजी से बढऩे लगती हैं। ऐसे में लोगों को अपने दैनिक जीवन में स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी आदतों को शामिल करना बेहद जरूरी है। डॉ. तोमर के अनुसार गर्मी के मौसम में सबसे महत्वपूर्ण है शरीर को हाइड्रेट रखना। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना न सिर्फ शरीर के तापमान को संतुलित रखता है बल्कि त्वचा को भी स्वस्थ बनाए रखता है।

कई लोग प्यास लगने पर ही पानी पीते हैं, जबकि गर्मी के मौसम में नियमित अंतराल पर पानी पीना आवश्यक है। विशेष रूप से बाहर काम करने वाले लोगों, छात्रों और बुजुर्गों को डिहाइड्रेशन से बचाव पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि तेज धूप त्वचा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकती है। लगातार धूप के संपर्क में रहने से सनटैन, पिगमेंटेशन, झाइयां और समय से पहले त्वचा की उम्र बढऩे जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए घर से बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का उपयोग करना बेहद जरूरी है। सनस्क्रीन त्वचा को अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने में मदद करती है और स्किन डैमेज की संभावना को कम करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कपड़ों का चयन भी स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव डालता है। गर्मी के मौसम में सूती वस्त्र पहनना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि सूती कपड़े शरीर को ठंडक देते हैं और पसीने को आसानी से सोख लेते हैं।

सिंथेटिक या तंग कपड़े पहनने से त्वचा पर रैशेज, खुजली और संक्रमण की समस्या बढ़ सकती है। गर्मियों में त्वचा की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित सावधानियां सुझाई गई हैं। बाहर निकलने से 15-20 मिनट पहले एसपीएफ 30 या उससे अधिक का सनस्क्रीन लगाना और हर 2-3 घंटे में दोहराना आवश्यक है। ढीले, हल्के और सूती कपड़े पहनने से त्वचा को सांस लेने में मदद मिलती है और पसीना कम रुकता है। दिन में कम से कम दो बार स्नान करें, पसीने वाले हिस्सों को सूखा रखें और गीले कपड़े तुरंत बदलें। शरीर को हाइड्रेट रखना त्वचा की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। ताजे फल और संतुलित आहार लाभकारी होते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के स्टेरॉयड युक्त क्रीम का उपयोग करने से त्वचा को स्थायी नुकसान हो सकता है।

डॉ. सुयश सिंह तोमर ने यह भी बताया कि मौसम परिवर्तन के दौरान त्वचा संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलती है। पसीना, धूल और प्रदूषण त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं, जिससे फंगल इंफेक्शन और एलर्जी की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसलिए दिन में कम से कम दो बार चेहरा साफ करना, हल्के साबुन या स्किन-फ्रेंडली क्लेंजर का उपयोग करना और त्वचा को साफ एवं सूखा रखना जरूरी है। उन्होंने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचने की सलाह दी। विशेषकर सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक सूर्य की किरणें सबसे अधिक प्रभावी होती हैं, जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो छाता, टोपी या सनग्लास का इस्तेमाल करना लाभदायक रहेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी में खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

ताजे फल, हरी सब्जियां, नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पानी की कमी को भी पूरा करते हैं। वहीं तली-भुनी और अत्यधिक मसालेदार चीजों से दूरी बनाए रखना बेहतर रहता है, क्योंकि इससे शरीर का तापमान बढ़ सकता है। डॉ. तोमर ने अभिभावकों से बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बच्चों में हीट एक्सॉशन और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है। यदि किसी को चक्कर आना, कमजोरी, अत्यधिक पसीना या त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

उन्होंने अंत में कहा कि स्वास्थ्य की सुरक्षा केवल बीमारी होने पर इलाज कराने से नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में सावधानी और सतर्कता अपनाने से संभव है। मौसम के अनुसार जीवनशैली में बदलाव, पर्याप्त पानी का सेवन, सही कपड़ों का चयन और त्वचा की नियमित देखभाल हमें कई गंभीर समस्याओं से बचा सकती है। यदि लोग समय रहते जागरूक हो जाएं और अपने साथ-साथ परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखें, तो बदलते मौसम का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है। गर्मी के इस मौसम में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

-डॉ. सुयश सिंह तोमर
एमबीबीएस, एमडी (डर्मेटोलॉजिस्ट)

ढ़ती गर्मी और बदलते मौसम के दौरान लोगों को अपने स्वास्थ्य और त्वचा की विशेष देखभाल करने की आवश्यकता है। तेज धूप, अधिक तापमान और पसीने के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। ऐसे में घर से बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का प्रयोग अवश्य करें, सूती कपड़े पहनें और दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। मौसम परिवर्तन के समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना भी जरूरी है। त्वचा को साफ और सूखा रखें, अनावश्यक धूप से बचें तथा पौष्टिक आहार को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर हीट स्ट्रोक, एलर्जी और त्वचा संक्रमण जैसी समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है।
-डॉ. सुयश सिंह तोमर
एमबीबीएस, एमडी (डर्मेटोलॉजिस्ट)