कल का दिन इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज होगा जेवर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भव्य लोकार्पण 

• टर्मिनल में दिखेगी गंगा घाटों की झलक, आंगन का भी होगा अहसास
• प्रवेश द्वार व इंटीरियर को पारंपरिक घाटों-हवेली की शैली में डिजाइन किया

उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को सुबह 11:30 बजे नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट जेवर पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री सुबह करीब 11:30 बजे टर्मिनल भवन का निरीक्षण कर नोएडा एयरपोर्ट का लोकार्पण करेंगे। दोपहर करीब 12 बजे प्रधानमंत्री जनसभा को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। अफसर नोएडा एयरपोर्ट में डेरा डाले हुए हैं। तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर यातायात प्रबंधन, मंच निर्माण, जनसभा स्थल की सजावट और आम जनता की सुविधाओं तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह एयरपोर्ट साइट पर डेरा डाले हुए हैं। अपने एरिया में आमजन के साथ बैठक करने के बाद जनसभा स्थल पर तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। डीएम मेधा रूपम, यीडा के सीईओ आरके सिंह, एयरपोर्ट के नोडल अफसर शैलेंद्र भाटिया ने तैयारियों की समीक्षा भी की। नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट की डिजाइन में भारतीय संस्कृति को प्राथमिकता पर रखा गया है। टर्मिनल बिल्डिंग में बनारस व हरिद्वार के गंगा घाटों की झलक देखने को मिलेगी। लहरदार छत जो नदियों को दर्शाती है। टर्मिनल के प्रवेश द्वार, सीढ़ियों व इंटीरियर को पारंपरिक घाटों और हवेली की शैली में डिजाइन किया गया है। बिल्डिंग के अंदरूनी हिस्से में आंगन जैसा ‘कोर्टयार्ड’ तैयार किया गया है।

नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट लोकार्पण के लिए तैयार है। अब समारोह की तैयारियों को तेज कर दिया गया है। यह एयरपोर्ट भारतीय विरासत को आधुनिकता के साथ जोड़ता है, जिससे यह यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। यह एयरपोर्ट भारतीय संस्कृति को भी रिप्रजेंट करेगा। एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग का डिजाइन बनारस गंगा घाटों की तर्ज पर किया गया है। यहां गंगा घाटों की तर्ज पर सीढ़ियां बनाई गई हैं। टर्मिनल में प्रवेश करते ही यात्रियों को इसका अनुभव होगा। छत को नदी की लहरों की तर्ज पर डिज़ाइन किया गया है। इससे प्राकृतिक रोशनी अंदर आती रहेगी। टर्मिनल बिल्डिंग के बाहरी हिस्से में विशेष तरीके के कपड़े का इस्तमाल कर छत बनाई जा रही हैं। इस कपड़े की खासियत है कि आग पानी और धूप से इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। स्विस कंपनी ने इस कपड़े की सिलाई मुंबई में कराई है। नोएडा एयरपोर्ट के अंदरूनी हिस्से को हवेली की तर्ज पर डिजाइन किया गया है, जिसमें पुराने घर के आंगन जैसा ‘कॉर्टयार्ड’ तैयार किया गया है। यहां यात्रियों को आंगन का अनुभव होगा। टर्मिनल बिल्डिंग यात्रियों के आकर्षण का केंद्र रहेगी। अब एयरपोर्ट का शुभारंभ होने जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सांस्कृतिक विरासत सहेजने के साथ ही यह एयरपोर्ट इस एरिया के लिए ग्रोथ इंजन साबित होगा।

तमाम बाधाएं पार करके धरातल पर आया एयरपोर्ट
तमाम नियमों की बाधाओं को दूर करते हुए नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट लोकार्पण तक पहुंचा है। आईजीआई एयरपोर्ट नई दिल्ली से 150 किमी से कम दूरी होने के बावजूद सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की अनुमति दी। दोनों के बीच की दूरी 61 किमी है। हालांकि आईजीआई का संचालन करने वाली कंपनी को इस एयरपोर्ट के डेवलपर को चुनने में वरीयता दी गई थी। लेकिन, इसमें स्विस कंपनी ने बाजी मारी थी। मौजूदा एयरपोर्ट के 150 किलोमीटर के दायरे में दूसरा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने की अनुमति आमतौर पर नहीं दी जाती है। यदि पुराने एयरपोर्ट पर क्षमता के बराबर यात्री आ रहे हैं तो सरकार इस दूरी से कम पर भी दूसरे एयरपोर्ट को मंजूरी दे सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह नियम मुख्य रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए होता है कि दो एयरपोर्ट का एयर स्पेस आपस में न टकराए। साथ ही पहले से चल रहे एयरपोर्ट पर किसी तरह का विपरीत प्रभाव न पड़े।

ये नियम नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट जेवर पर भी लागू हो रहा है। दोनों के बीच की दूरी करीब 61 किमी है। आईजीआई पूरी क्षमता तक लगभग पहुंच चुका है। इसलिए सरकार नोएडा एयरपोर्ट को मंजूरी दे दी। इसमें आईजीआई का संचालन करने वाली कंपनी को वरीयता दी गई। नोएडा एयरपोर्ट के लिए डेवलपर को चुनने की टेंडर प्रक्रिया में इस कंपनी को वरीयता दी गई। उसे 10 नंबर अतिरिक्त दिए गए थे। बावजूद इसके कंपनी स्विट्जरलैंड की ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी ने 400.97 रुपये प्रति यात्री की सबसे ऊंची बोली लगाकर कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया था। इसमें अडानी इंटरप्राइजेज 360 रुपये प्रति यात्री और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने 351 रुपये प्रति यात्री के करीब बोली लगाई थी। डायल ही आईजीआई का संचालन करती है। 2001 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने जेवर के आसपास एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन वह बात सिरे नहीं चढ़ पाई थी।

150 किमी का दायरा होने के चलते पहले यहां पर कार्गो एयरपोर्ट की बात हुई थी। लेकिन, फिर यात्री एयरपोर्ट के लिए भी कवायद शुरू हुई। यही कारण रहा कि इस एयरपोर्ट के कभी आगरा तो कभी राजस्थान जाने की चर्चा होती रही। जेवर जिस एरिया में यह एयरपोर्ट बना है, वहां के किसान पहले जमीन देने में ना नुकुर कर रहे थे। एयरपोर्ट के राजस्थान जाने की बात शुरू हुई तो किसानों ने इसको अपने एरिया में रोकने के लिए तैयार हुए। किसानों को मनाने में सरकार से लेकर प्रशासनिक अफसरों तक के प्रयास फलीभूत हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद किसानों से वार्ता की। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह बताते हैं कि नोएडा एयरपोर्ट बहुत बड़ा प्रॉजेक्ट है। इसको लाने के लिए सरकार और किसानों दोनों से वार्ता की। मुआवजा बढ़वाने का प्रयास किया। ये प्रयास आज सबके सामने हैं।

नोएडा एयरपोर्ट के लिए 3065 परिवारों ने घर-द्वार छोड़ा
नोएडा एयरपोर्ट को धरातल पर उतारने के लिए 3,065 परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। इन परिवारों के गांव एयरपोर्ट साइट में आ गए। इन परिवारों को अपनी विरासत को छोड़ना पड़ा। शासन-प्रशासन ने अधिग्रहण नियमों से हटकर किसानों के लिए फैसले लिए तो बात बनी। इन किसान परिवारों को प्रशासन ने जेवर बांगर में बसाया है। हालांकि प्रशासन ने शहर जैसी सुविधाएं देने का दावा किया है, लेकिन ग्रामीणों को अपने गांव की याद आज भी सताती है। नोएडा एयरपोर्ट का पहला चरण 1334 हेक्टेयर में विकसित किया गया है। इसमें रोही, पारोही, बनबारीवास, दयानतपुर, किशोरपुर व रन्हेरा गांव की जमीन गई है। इन गांवों के कुछ मजरों की जमीन भी इस प्रॉजेक्ट में आई है। इसमें दयानतपुर न्याय पंचायत के मजरे दयानतपुर खेड़ा नगला छीतर, नगला शरीफ, रोही गांव व इसके मजरे नगला गणेशी, नगला फूलखां और किशोरपुर आंशिक काे शिफ़्ट किया गया।

इसमें 3,065 परिवारों को दूसरी जगह बसाया गया है। प्रशासन ने इन परिवारों को जेवर बांगर में करीब 50 हेक्टेयर में बसाया है। किसी प्रॉजेक्ट के लिए अपना गांव छोड़ना बड़ी बात होती है। प्रशासन का दावा है कि इन किसान परिवारों को शहर जैसी सुविधाएं दी गई हैं। इस प्रॉजेक्ट के लिए नये जमीन अधिग्रहण कानून के तहत जमीन ली गई। नये कानून में विस्थापित होने वाले परिवारों को 50 वर्ग मीटर का फ्लैट देने का प्रावधान है, लेकिन किसान इस पर राजी नहीं हुए। इस पर तत्कालीन अधिकारियों ने किसानों के लिए अधिकतम 500 वर्ग मीटर का प्लाट देने का वायदा किया। शासन से अनुमति के बाद इसे लागू किया गया। जिस ग्रामीण का जितना बड़ा घर था, उसी हिसाब से उसे नई जगह प्लॉट दिया गया। एयरपोर्ट के पहले चरण में 1334 हेक्टेयर जमीन ली गई है।

पहले 1400 हेक्टेयर जमीन की जरूरत थी। इस डिमांड पर एलाइनमेंट बदला गया तो 1334 हेक्टेयर जमीन की जरूरत बताई गई। इस एलाइनमेंट बदलने से कुरैब गांव विस्थापित होने से बच गया। पहले कुरैब गांव भी विस्थापन में आ रहा था। नोएडा एयरपोर्ट के नोडल अफसर शैलेंद्र भाटिया कहते हैं कि इतने बड़े प्रॉजेक्ट को जमीन पर उतार दिया गया। छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखा गया ताकि किसानों को अधिक से अधिक फायदा मिले। एयरपोर्ट प्रॉजेक्ट में मंदिर-मजार भी आईं, लेकिन अधिकारियों ने सूझ-बूझ से काम लिया। बिना किसी शोर शराबे के ये काम भी हो गए। इन कामों को कराने में स्थानीय विधायक धीरेंद्र सिंह की भी भूमिका अहम रही। वह किसानों और सरकार के बीच पुल का काम करते रहे। वह इतने बड़े प्रॉजेक्ट को जल्द से जल्द जमीन पर उतारना चाहते थे।

तारीखों में एयरपोर्ट

• → 2001 में यूपी के तात्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने इंटरनेशनल एयरपोर्ट एंड एविएशन हब का प्रस्ताव पारित किया था।

• → 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट पर ध्यान दिया और रक्षा मंत्रालय से इसका क्लीरियंस लिया।

• → 2012 में यूपीए के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने आईजीआई एयरपोर्ट से 150 किलोमीटर से कम दूरी का हवाला देकर प्रस्ताव लटका दिया।

• → 2013 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को आगरा ले गए, जो कि आईजीआई से 200 किलोमीटर की दूरी पर था।

• → 2014 में भाजपा सत्ता में आई तो एयरपोर्ट प्रोजेक्ट पर दोबारा तेजी से काम शुरू किया गया। प्रोजेक्ट वापस जेवर आया।

• → 2015 में अखिलेश यादव ने जेवर एयरपोर्ट शुरू करने की इच्छा जताई

• → 2017 जुलाई में एयरपोर्ट के लिए निर्माण साइट की अनुमति मिली, नवंबर में गृह मंत्रालय ने इमीग्रेशन की एनओसी दी।

• → 2018 में एसआईए (सोशल इंपैक्ट एसेसमेंट) शुरू किया। जिला प्रशासन ने धारा-17 की कार्रवाई की। नागर विमानन मंत्रालय ने सैद्धांतिक मंजूरी दी।

• → 2019 में प्रशासन ने धारा-19 की कार्रवाई कर जमीन अधिग्रहण के लिए अवार्ड घोषित। मुआवजा वितरण कर एयरपोर्ट की प्रस्तावित साइट पर जमीन पर कब्जा लेना शुरू किया। ज्यूरिख कंपनी ने सबसे बड़ी बोली लगाई

• → 2020 कंपनी के साथ नायल ने करार किया।

• → 2021 में 25 नवंबर को प्रधानमंत्री ने नोएडा एयरपोर्ट का शिलान्यास किया

• → 2024 में 9 दिसंबर को इंडिगो एयरलाइंस के यात्री विमान ने पहली पर रनवे पर लैंडिंग की

• → अक्टूबर व नंवबर 2025 में रनवे पर दो बार एएआई का विमान उतारकर उपकरण परखें गए

• → नवंबर 2025 में ही टर्मिनल सेवा के लिए स्थानीय लोगों को यात्री बनाकर ट्रायल किया गया

• → 5 मार्च 2026 को नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो ने एयरपोर्ट की संपूर्ण सुरक्षा को मंजूरी दी

• → 6 मार्च 2026 को नागरिक उड्डयन महा निदेशालय ने उड़ान के लिए एयरोड्रम लाइसेंस जारी किया

• → 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोएडा एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे