– वैश्विक तनाव और विदेशी बिकवाली से बाजार में आई बड़ी गिरावट
– घरेलू निवेश और नियमित योजनाओं ने संभाली बाजार की रफ्तार
– अनुशासित निवेश रणनीति से निवेशकों को मिला मजबूत लाभ :रविंद्र तिवारी
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कुछ महीनों में उतार-चढ़ाव का ऐसा दौर देखा, जिसने निवेशकों की मानसिक मजबूती और निवेश अनुशासन दोनों की परीक्षा ले ली। हालांकि अस्थायी गिरावट के बाद बाजार ने जिस तेजी से वापसी की है, उसने यह साबित कर दिया कि मजबूत आर्थिक आधार और दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण ही वास्तविक सफलता की कुंजी है।
वित्तीय सलाहकार रविंद्र तिवारी के अनुसार भारतीय शेयर बाजार की यह पूरी यात्रा निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख बनकर सामने आई है। वर्ष 2025 के अंतिम महीनों में जहां सेंसेक्स लगभग 85 हजार अंकों के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था, वहीं वर्ष 2026 की शुरुआत में वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार में अचानक दबाव देखने को मिला। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक स्तर पर ऊंची ब्याज दरें और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की गई लगातार बिकवाली के कारण बाजार में तेज गिरावट आई। इसके परिणामस्वरूप सेंसेक्स गिरकर लगभग 68 हजार से 69 हजार अंकों के स्तर तक पहुंच गया।
इस दौरान बाजार में लगभग 16 से 17 हजार अंकों यानी करीब 18 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे अल्पकालिक निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बन गया। हालांकि यह गिरावट अधिक समय तक कायम नहीं रह सकी। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय बाजार की आंतरिक मजबूती और घरेलू निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने बाजार को स्थिरता प्रदान की। घरेलू संस्थागत निवेशकों का लगातार निवेश, म्यूचुअल फंड योजनाओं में नियमित मासिक निवेश और भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिर विकास दर ने बाजार को मजबूत सहारा दिया। अप्रैल 2026 तक बाजार ने उल्लेखनीय वापसी करते हुए लगभग 78 हजार अंकों के स्तर को छू लिया। यह निचले स्तर से लगभग 9 से 10 हजार अंकों की रिकवरी दर्शाता है, जो करीब 13 से 15 प्रतिशत की वृद्धि के बराबर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी भारतीय बाजार में निवेशकों के विश्वास की वापसी का संकेत है। रविंद्र तिवारी ने कहा कि गिरावट के दौरान जिन्होंने 68 से 70 हजार के स्तर पर निवेश किया, उन्हें वर्तमान समय में लगभग 12 से 15 प्रतिशत तक का लाभ प्राप्त हो चुका है।
वहीं नियमित निवेश योजना के माध्यम से निवेश करने वाले निवेशकों को गिरावट के दौरान कम मूल्य पर अधिक इकाइयां प्राप्त हुईं, जिससे उनका औसत निवेश मूल्य बेहतर हुआ और अब वे लाभ की स्थिति में पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि 85 हजार के उच्च स्तर के आसपास निवेश करने वाले कई निवेशकों को प्रारंभिक नुकसान का सामना करना पड़ा था, लेकिन बाजार की वापसी के साथ उनके पोर्टफोलियो का नुकसान काफी हद तक कम हो गया है और अधिकांश निवेश अब संतुलन की स्थिति के करीब पहुंच गए हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में भी गिरावट के दौरान 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी देखी गई थी। हालांकि वर्तमान में अधिकांश योजनाओं ने अपने नुकसान की भरपाई कर ली है और सकारात्मक प्रतिफल की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि बाजार में अस्थायी गिरावट दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अवसर बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजार स्वभाव से चक्रीय होता है, जहां तेजी और मंदी दोनों चरण आते हैं।
जो निवेशक भावनाओं के आधार पर निर्णय लेते हैं, वे अक्सर नुकसान उठाते हैं, जबकि धैर्य और अनुशासन के साथ निवेश करने वाले निवेशक बाजार की अस्थिरता को अवसर में बदलने में सफल होते हैं। रविंद्र तिवारी ने निवेशकों को सलाह देते हुए कहा कि बाजार में गिरावट को संकट के रूप में नहीं बल्कि निवेश के अवसर के रूप में देखना चाहिए। दीर्घकालिक लक्ष्य, विविध निवेश पोर्टफोलियो और नियमित निवेश योजना अपनाने से जोखिम कम किया जा सकता है और बेहतर प्रतिफल प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है।
बढ़ती घरेलू खपत, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार, अवसंरचना विकास और युवा कार्यबल जैसे कारक भविष्य में बाजार को मजबूती प्रदान करेंगे। निष्कर्षत: 85 हजार से 68 हजार की गिरावट और फिर 78 हजार तक की मजबूत वापसी यह स्पष्ट संकेत देती है कि बाजार में उतार-चढ़ाव स्थायी नहीं होते। जो निवेशक घबराहट में निर्णय लेने के बजाय रणनीतिक सोच और धैर्य बनाए रखते हैं, वही लंबी अवधि में वास्तविक संपत्ति निर्माण कर पाते हैं। भारतीय शेयर बाजार की यह यात्रा निवेश जगत के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है – अनुशासित निवेश, समय और विश्वास ही सफलता के सबसे बड़े सूत्र हैं।















