-शहर की सड़कों, सीवर, पेयजल और सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव के लिए बनेगा स्थायी फंड
-4 हजार आवंटियों और 59 औद्योगिक भूखंड धारकों को अंतिम चेतावनी
-एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर, इंडस्ट्रियल नोड और फिल्म सिटी को मिली नई उड़ान, राजस्व में 43 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
-यमुना सिटी के दीर्घकालिक विकास का रोडमैप तैयार, अनुरक्षण व्यवस्था को मिलेगा आर्थिक संबल
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने तेजी से विकसित हो रहे यमुना सिटी क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव को भविष्य में भी निर्बाध बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। प्राधिकरण की 90वीं बोर्ड बैठक में शहर के अनुरक्षण और मरम्मत कार्यों के लिए अलग से कार्पस फंड बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस फंड में लीज रेंट समेत विभिन्न मदों से प्राप्त होने वाली आय जमा की जाएगी और इसका उपयोग केवल रखरखाव संबंधी कार्यों पर किया जाएगा। सोमवार को चेयरमैन आलोक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। बैठक में यीडा सीईओ राकेश कुमार सिंह, नोएडा अथॉरिटी के सीईओ कृष्णा करुणेश, एसीईओ मनीष मीणा, एसीईओ शैलेंद्र भाटिया, एसीईओ राजेश कुमार, एसीईओ सुनील सिंह आदि मौजूद रहे। प्राधिकरण का मानना है कि यमुना सिटी में विकास कार्यों के विस्तार के साथ-साथ रखरखाव पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ेगा। ऐसे में भविष्य में धन की कमी के कारण नागरिक सुविधाएं प्रभावित न हों, इसके लिए अभी से वित्तीय व्यवस्था तैयार करना आवश्यक है।
यीडा अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति, सड़कें, नालियां, सीवर नेटवर्क, बिजली व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, उद्यान और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के संचालन एवं अनुरक्षण पर हर वर्ष बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी। आने वाले वर्षों में आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ यह खर्च और अधिक बढऩे की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्पस फंड बनाने का निर्णय लिया गया है। प्राधिकरण इसके लिए अलग बैंक खाता खोलेगा, जिसमें निर्धारित स्रोतों से प्राप्त राशि जमा की जाएगी। जरूरत पडऩे पर इसी फंड से शहर के रखरखाव और मरम्मत कार्यों का खर्च वहन किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे विकास कार्यों और अनुरक्षण गतिविधियों में किसी प्रकार का वित्तीय व्यवधान नहीं आएगा तथा नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
बैठक में शहर के दीर्घकालिक विकास से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को डिफेंस कॉरिडोर से जोडऩे के लिए प्रस्तावित 130 मीटर चौड़ी सड़क को एनएचएआई के अलीगढ़ स्थित जट्टारी और खैर के उत्तरी हिस्से में प्रस्तावित बाईपास तक ले जाने को मंजूरी दी गई। इससे एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर और अलीगढ़ क्षेत्र के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा। यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आर.के. सिंह ने बोर्ड को बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पलवल-अलीगढ़ मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में विकसित कर रहा है। इसी परियोजना के तहत प्रस्तावित बाईपास से यमुना प्राधिकरण की 130 मीटर रोड को जोडऩे का फैसला लिया गया है। इस परियोजना के पूरा होने से डिफेंस कॉरिडोर को सीधे एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी मिलेगी और क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा यमुना एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित 130 मीटर रोड के बीच करीब 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में एक नया इंडस्ट्रियल नोड विकसित करने की योजना को भी आगे बढ़ाया गया है। इसके लिए मास्टर प्लान तैयार करने हेतु कंसल्टेंट का चयन किया जाएगा। कंसल्टेंट चयन की जिम्मेदारी ईएंडवाई को सौंपी गई है।
रजिस्ट्री नहीं कराई तो जाएगा प्लॉट
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने उन आवंटियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है जिन्होंने प्लॉट आवंटन के बाद भी अब तक रजिस्ट्री नहीं कराई है। प्राधिकरण की 90वीं बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया कि करीब 4 हजार आवासीय प्लॉट और 59 औद्योगिक प्लॉट के ऐसे आवंटियों को अंतिम मौका दिया जाएगा। निर्धारित समय सीमा के भीतर लीज डीड नहीं कराने पर उनके आवंटन निरस्त कर दिए जाएंगे। यीडा अधिकारियों के अनुसार प्राधिकरण ने अब तक कुल 30,011 आवासीय प्लॉट आवंटित किए हैं। इनमें वर्ष 2009 की योजना के तहत 20,406 तथा बाद की विभिन्न योजनाओं में 9,605 प्लॉट शामिल हैं। इनमें से 16,562 आवंटियों को चेकलिस्ट जारी कर रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में आवंटी अभी तक रजिस्ट्री कराने आगे नहीं आए हैं। प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक करीब 12 हजार आवंटी अपनी रजिस्ट्री करा चुके हैं, जबकि लगभग 4 हजार ऐसे आवंटी हैं जिन्हें 30 जून 2024 से पहले ही चेकलिस्ट जारी कर दी गई थी, लेकिन उन्होंने अब तक लीज डीड निष्पादित नहीं कराई।
बोर्ड बैठक में ऐसे सभी आवंटियों को 31 दिसंबर तक का अंतिम अवसर देने का फैसला किया गया है। यदि इसके बाद भी रजिस्ट्री नहीं कराई गई तो संबंधित प्लॉटों का आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा। यीडा ने यह भी स्पष्ट किया है कि 30 जून 2024 के बाद जिन आवंटियों को चेकलिस्ट जारी की गई है और जिन्हें 180 दिन से अधिक का समय हो चुका है, उनसे विलंब शुल्क वसूला जाएगा। नई व्यवस्था के तहत पहले वर्ष में आवंटन राशि का एक प्रतिशत, दूसरे वर्ष में दो प्रतिशत और तीसरे वर्ष में तीन प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। यह दर बढ़ते हुए छह वर्ष में छह प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। प्राधिकरण का मानना है कि इससे आवंटी समय पर रजिस्ट्री कराने के लिए प्रेरित होंगे और भूमि का वास्तविक उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। इसी तरह 59 औद्योगिक प्लॉटों के आवंटियों को भी चेतावनी दी गई है। यदि वे निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं करते हैं तो उनके आवंटन भी रद्द किए जा सकते हैं। प्राधिकरण का कहना है कि लंबे समय तक रजिस्ट्री लंबित रहने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं और भूमि का उपयोग भी नहीं हो पाता।
परियोजनाओं को मिली नई गति, राजस्व में 43 फीसदी बढ़ोतरी
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की 90वीं बोर्ड बैठक सोमवार को प्राधिकरण सभागार में अध्यक्ष एवं अपर मुख्य सचिव (औद्योगिक विकास) आलोक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में औद्योगिक निवेश, आधारभूत ढांचे के विकास, किसानों के हितों और विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बोर्ड ने प्राधिकरण के विकास कार्यों की प्रगति पर संतोष जताते हुए भविष्य की योजनाओं को भी हरी झंडी दी।बैठक में बताया गया कि 31 मई 2026 तक प्राधिकरण की पूंजीगत प्राप्तियां बढ़कर 745.85 करोड़ रुपये पहुंच गई हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 522.39 करोड़ रुपये थीं। इस प्रकार राजस्व में लगभग 43 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बैठक में इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड (एचसीएल-फॉक्सकॉन संयुक्त उपक्रम) तथा एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के लीज डीड प्रारूपों को अंतिम मंजूरी प्रदान की गई। उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत आयोजित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी-5.0) में यीडा को 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य मिला था।
इसके सापेक्ष 30,885.69 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे 136 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है। वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान विभिन्न योजनाओं के तहत 137 औद्योगिक भूखंड आवंटित किए गए हैं। इनमें सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइस, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। सेक्टर-28 में 48 एकड़ भूमि पर स्थापित होने वाली इंडिया चिप परियोजना का शिलान्यास 21 फरवरी 2026 को किया जा चुका है। इसके अलावा प्राधिकरण ने वर्ष 2014-15 से मई 2026 तक किसानों को 3,050 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रतिकर राशि वितरित की है। इसमें जेपी इंफ्राटेक प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को दी गई राशि भी शामिल है। बोर्ड ने किसानों को सात प्रतिशत आबादी भूखंड आवंटन योजना की समीक्षा करते हुए बताया कि अब तक 11,211 किसानों के मामलों में प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इनमें से 7,035 किसानों को आरक्षण पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि 4,176 भूखंड विभिन्न सेक्टरों में नियोजित किए जा चुके हैं।
हेरिटेज सिटी और फिल्म सिटी परियोजनाओं की समीक्षा
बैठक में मथुरा स्थित हेरिटेज सिटी परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। संशोधित निविदा दस्तावेज को आगे की स्वीकृति के लिए भेजने का निर्णय लिया गया। वहीं फिल्म सिटी परियोजना के प्रतिनिधियों ने बोर्ड के समक्ष परियोजना की कार्ययोजना प्रस्तुत की और विकास की रूपरेखा साझा की। बोर्ड ने जेवर क्षेत्र में होंडा इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से ट्रैफिक पार्क सह प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसका निर्माण कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) निधि से कराया जाएगा, जबकि भूमि यीडा नि:शुल्क उपलब्ध कराएगा। इसके अतिरिक्त सेक्टर-8, 8ए, 8बी, 8सी, 8डी, 8ई और 8एफ के आंतरिक विकास कार्य इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मॉडल पर कराने का भी निर्णय लिया गया।
















