नशे का बढ़ता जाल युवा पीढ़ी का दुश्मन, बड़े कदम की जरूरत

लेखक-तनुजा
शिक्षाविद्
(समाजसेवी एवं राजनीतिक चिंतक हैं। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। जनसेविका के रुप में प्रख्यात है।)

देश में नशे का बढ़ता कारोबार चिंता की बात है। नशे की आदत सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे परिवार को बर्बाद कर देती है। जब तक होश आता है तब तक बहुत कुछ बर्बाद हो जाता है। इसके बाद पछतावे के अलावा कुछ हाथ नहीं मिलता। देश के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर नशीले पदार्थों की बरामदगी भयावह संकट की तस्वीर उकेरती है। संगठित विदेशी अपराधियों की साजिश और देश में फैले नशा तस्करों का गठजोड़, इस नशीले जहर के कारोबार को चला रहा है। तमाम खुफिया एजेंसियां व राज्य के विशेष पुलिस बल को योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। विभिन्न राज्यों द्वारा द्वारा संचालित नशा विरोधी अभियान बिगड़ते हालात सुधारने में किसी हद तक सहायक साबित हो सकते हैं। कुछ दिन पहले पंजाब में भी ऐसा अभियान चलाया गया। नशे की तस्करी के मामले में यह राज्य काफी बदनाम है। अब सीमावर्ती जम्मू-कश्मीर में नशे के संकट के खिलाफ अभियान शुरू किया जा रहा है। सवाल यह है कि राज्य में नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई आरंभ करने में इतना समय क्यों लगा? नशे के विरोध में यह पहल समय की जरूरत है। नशे के नश्तर से युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है और कई घरों के चिराग असमय बुझ रहे हैं। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल विभिन्न जिलों का दौरा कर नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं।

इस मुहिम का सुखद पहलू यह है कि दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में इस प्रयास को प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी के एक गुट का भी समर्थन मिला है। कहना कठिन है कि इस समर्थन का हकीकत में असर कितना होगा, मगर इस घोषणा ने सकारात्मक संदेश जरूर दिया है कि समाज के विभिन्न वर्गों के सामूहिक प्रयासों से ही इस भयावह होते संकट का मुकाबला किया जा सकता है। सही मायने में समाज में व्याप्त तमाम वैचारिक मतभेद को दरकिनार कर सामूहिक व निरंतर प्रयासों से ही नशा मुक्ति की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है। वास्तव में नशा विरोधी अभियान की राह में बाधा पैदा करने वाली जटिलताओं के मुकाबले के लिए कुछ दिन या कुछ माह के अभियान के बजाय साल भर चलने वाली रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। कभी-कभार संचालित अभियान इसके लक्ष्य को पाने में ज्यादा सहायक साबित नहीं हो सकते। इस संकट के समाधान हेतु नशे की लत के सामाजिक पहलुओं की भी व्यापक पड़ताल जरूरी है। कारगर समाधान के लिए सामाजिक स्तर पर रणनीति बनाने की आवश्यकता होती है। नशे की लत के तमाम कारण समाज में विद्यमान हैं। जिनके निराकरण की दिशा में भी कदम उठाने की जरूरत है। मसलन इस व्यसन के मूल में समाज में व्याप्त बेरोजगारी, निराशा, सामाजिक व आर्थिक असमानता, बुरी संगत का असर तथा मादक पदार्थों की समाज में आसान उपलब्धता आदि कारक निहित हैं।

चिंताजनक है कि नशा अब स्कूल-कॉलेजों तक को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। कई राज्यों में नशे की आपूर्ति में बच्चों को इस्तेमाल करने के चिंताजनक उदाहरण सामने आए हैं। यदि नशा मुक्ति के लिए चलाए जा रहे पुनर्वास कार्यक्रमों में शिथिलता अपनाई जाती है तो सख्ती से हासिल होने वाली उपलब्धियां व्यर्थ हो जाती हैं। यह सच है कि नशा एक ऐसा रोग है, जिसका कोई आसान इलाज उपलब्ध नहीं है। जहां एक ओर नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर अंकुश लगाना आवश्यक है, तो दूसरी तरफ इसकी तलब को काबू करने हेतु भी प्रयास जरूरी हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि नशे की डोज जुटाने के लिए कुछ छात्र व युवा अपराध की राह में फिसल जाते हैं। इसलिए जरूरी हो जाता है कि नियमित रूप से नशा तस्करों और ड्रग पेडलर्स की गिरफ्तारी कर तुरंत सजा दी जाए। वहीं, नशे की खरीद-फरोख्त में संलिप्तता पर ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने, पासपोर्ट निरस्त करने से भी जहरीले कारोबार पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा सीमावर्ती संवेदनशील राज्यों में जहां सीमा पार से नशे की तस्करी आतंकवाद को जिंदा रखने के लिए की जा रही है, वहां अतिरिक्त सावधानी की भी जरूरत है।

नशा तस्करों की गिरफ्तारी के तुरंत बाद सजा देना, इस अभियान में मददगार साबित होगा। नशे का काला कारोबार प्रतिबंधित दवाओं और नशीली सामग्रियों के निर्माण, तस्करी और बिक्री का एक वैश्विक अवैध तंत्र है। यह कारोबार न सिर्फ किसी देश की कानून-व्यवस्था को चुनौती देता है, बल्कि देश की युवा पीढ़ी को भी मानसिक और शारीरिक रूप से खोखला कर रहा है। पारंपरिक नशों के अलावा प्रयोगशालाओं में बनने वाले सिंथेटिक ड्रग्स का अवैध निर्माण और तस्करी तेजी से बढ़ी है। नशीली दवाओं की लत के कारण चोरी, छिनैती और हत्या जैसे गंभीर अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ता है। नशे की कमाई का एक बड़ा हिस्सा आतंकी और देश-विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कई राज्यों में नशे के अवैध कारोबार की गुप्त सूचना देने वाले नागरिकों के लिए लाखों रुपए तक के नकद इनाम की घोषणाएं भी की गई हैं। मोदी सरकार ने नशा माफिया के खिलाफ अभियान को नई रफ्तार दी है। गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट पर सीधा प्रहार करने की रणनीति तैयार की जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की पहल पर कई राज्यों में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी लागू की गई है।