-शारदा केयर हेल्थ सिटी एवं शारदा हॉस्पिटल की जागरूकता गोष्ठी में 50 से अधिक चिकित्सक और डायलिसिस विशेषज्ञ हुए शामिल
– समय पर किडनी ट्रांसप्लांट से मिल सकती है बेहतर और सामान्य जिंदगी, डायलिसिस पर निर्भरता होती है कम
-आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का लिया संकल्प, मरीजों को समय पर इलाज दिलाने पर दिया जोर
उदय भूमि संवाददाता
मथुरा। किडनी (गुर्दा) संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को समय पर सही उपचार और किडनी प्रत्यारोपण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से रविवार को स्टेशन रोड स्थित होटल बृजवासी रॉयल में शारदा केयर हेल्थ सिटी एवं शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में किडनी प्रत्यारोपण जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 50 से अधिक चिकित्सकों, नेफ्रोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, डायलिसिस स्वास्थ्य कर्मियों एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया और किडनी प्रत्यारोपण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किडनी रोगों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना तथा गंभीर मरीजों को समय रहते उचित उपचार उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम में विशेष रूप से आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत शारदा हॉस्पिटल द्वारा किए जा रहे नि:शुल्क किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी साझा की गई। उपस्थित चिकित्सकों से अपील की गई कि वे इस योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र मरीजों तक पहुंचाएं, ताकि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी जरूरतमंद मरीज जीवनरक्षक उपचार से वंचित न रहे।
गोष्ठी में शारदा केयर हेल्थ सिटी के किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के डायरेक्टर एवं वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. कुणाल गांधी ने ‘किडनी ट्रांसप्लांट बनाम डायलिसिस- आपके मरीज के लिए क्या बेहतर है? विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कई मरीज लंबे समय तक डायलिसिस पर निर्भर रहते हैं, जबकि सही समय पर किडनी प्रत्यारोपण होने से वे अधिक स्वस्थ, सक्रिय और सामान्य जीवन जी सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मरीज की चिकित्सकीय स्थिति अलग होती है, इसलिए विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के आधार पर ही उपचार का सही विकल्प चुना जाना चाहिए। वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट एवं किडनी प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. अहमद कमाल ने क्रॉनिक किडनी डिजीज एवं किडनी ट्रांसप्लांट विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि किडनी रोग के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना कई बार गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
समय पर जांच, नियमित उपचार और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है तथा आवश्यकता पडऩे पर सफल किडनी प्रत्यारोपण के माध्यम से मरीज को नया जीवन दिया जा सकता है। वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अनिल शर्मा ने किडनी ट्रांसप्लांट डोनर सेलेक्शन विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रत्यारोपण की सफलता के लिए उपयुक्त डोनर का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जांच, मेडिकल मानकों और कानूनी प्रक्रिया का पूरी पारदर्शिता के साथ पालन कर ही प्रत्यारोपण किया जाता है, जिससे मरीज और डोनर दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने चिकित्सकों और डायलिसिस स्वास्थ्य कर्मियों से कहा कि वे अपने संपर्क में आने वाले गंभीर किडनी रोगियों को समय पर विशेषज्ञ संस्थानों तक पहुंचाएं तथा आयुष्मान भारत योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दें।
इससे जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक सहायता के साथ गुणवत्तापूर्ण उपचार प्राप्त हो सकेगा। कार्यक्रम का संचालन शारदा केयर हेल्थ सिटी एवं शारदा हॉस्पिटल के महाप्रबंधक गौरव पांडेय, वरिष्ठ प्रबंधक अशोक कुमार तथा मथुरा रीजन के प्रबंधक मोंटी चड्ढा ने किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य केवल उपचार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समाज में गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर लोगों को समय रहते सही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना भी है। गोष्ठी में बताया गया कि शारदा केयर हेल्थ सिटी, ग्रेटर नोएडा दिल्ली-एनसीआर का 600 बिस्तरों वाला आधुनिक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है, जो अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से मरीजों को समग्र एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।
चिकित्सा, शोध और शिक्षा के क्षेत्र में लगभग 18 वर्षों के अनुभव के साथ अस्पताल लगातार नवाचार और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से उत्कृष्ट चिकित्सा का नया मानक स्थापित कर रहा है। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि किडनी रोगों के प्रति समाज में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा तथा आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र मरीजों को नि:शुल्क किडनी प्रत्यारोपण का लाभ दिलाने के लिए चिकित्सा समुदाय मिलकर कार्य करेगा।
















