-2013 की भीषण आपदा में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, दो मिनट का मौन रखकर किया स्मरण
-तीर्थ पुरोहित समाज, हक-हकूकधारियों, व्यापारियों और पुलिस-एसडीआरएफ ने एकजुट होकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए की प्रार्थना
-आपदा ने हजारों परिवारों को कभी न भरने वाला दर्द दिया, उनकी स्मृति सदैव हमारे हृदय में जीवित रहेगी: राजकुमार तिवारी
उदय भूमि संवाददाता
रुद्रप्रयाग। वर्ष 2013 में आई केदारनाथ की भीषण दैवीय आपदा में असमय काल-कवलित हुए हजारों श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की पुण्य स्मृति में बुधवार को श्री केदारनाथ मंदिर परिसर में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। हिमालय की शांत वादियों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धा, संवेदना और मौन का ऐसा वातावरण बना, जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को 13 वर्ष पुरानी उस भयावह त्रासदी की याद दिला दी, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह ठीक नौ बजे तीर्थ पुरोहित सभा के अध्यक्ष पंडित राजकुमार तिवारी के नेतृत्व में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि आपदा में जान गंवाने वाले सभी श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों और सुरक्षा बलों के जवानों की आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा उनके परिजनों को यह असहनीय पीड़ा सहने की शक्ति दें। गौरतलब है कि 16 और 17 जून 2013 को केदारनाथ घाटी में आई अभूतपूर्व जलप्रलय और बादल फटने की घटना ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी।
अचानक आई बाढ़, मलबे और चट्टानों की चपेट में आकर हजारों लोगों की जान चली गई थी। इस त्रासदी ने न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश को गहरे शोक में डुबो दिया था। आज भी उस विभीषिका की याद लोगों की आंखें नम कर देती है। श्रद्धांजलि सभा में तीर्थ पुरोहित समाज, हक-हकूकधारियों, स्थानीय व्यापारियों, पुलिस एवं एसडीआरएफ के जवानों सहित लगभग 100 से 110 लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आपदा के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लोगों के साहस और संघर्ष को याद किया। इस अवसर पर तीर्थ पुरोहित सभा के अध्यक्ष पंडित राजकुमार तिवारी ने कहा कि वर्ष 2013 की आपदा केवल एक प्राकृतिक त्रासदी नहीं थी, बल्कि वह मानव इतिहास की ऐसी पीड़ा है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा, ‘केदारनाथ की वह विभीषिका आज भी हमारी आंखों के सामने ताजा है। हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन के लिए आए थे, लेकिन वे कभी अपने घर नहीं लौट सके। अनेक स्थानीय परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और कई सुरक्षाकर्मियों ने दूसरों की जान बचाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। हम उन सभी दिवंगत आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। राजकुमार तिवारी ने आगे कहा, ‘हर वर्ष इस दिन श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने का उद्देश्य केवल दिवंगतों को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों को यह संदेश देना भी है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मानवता, सेवा और साहस सबसे बड़ी शक्ति होती है। केदारनाथ धाम आज पहले से अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और भव्य रूप में श्रद्धालुओं का स्वागत कर रहा है, लेकिन वर्ष 2013 की पीड़ा हमें हमेशा सतर्क रहने की सीख देती रहेगी।
उन्होंने कहा कि तीर्थ पुरोहित समाज सदैव उन परिवारों के प्रति संवेदनशील रहेगा, जिन्होंने इस आपदा में अपने परिजनों को खोया। उन्होंने प्रशासन, सेना, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और उन सभी लोगों के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में अपनी जान की परवाह किए बिना सेवा की। श्रद्धांजलि सभा में तीर्थ पुरोहित सभा के भूतपूर्व अध्यक्ष किशन बगवाड़ी, ब्लॉक प्रमुख पंकज शुक्ला, महामंत्री राजेंद्र प्रसाद तिवारी, मंत्री अंकित सेमवाल, कोषाध्यक्ष प्रवीण चन्द्र तिवारी, केदार सभा मीडिया प्रभारी पंडित पंकज शुक्ला, व्यापार संघ अध्यक्ष बिष्णु दत्त रूवाड़ी सहित तीर्थ पुरोहित समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में केदारनाथ धाम में तैनात पुलिस प्रशासन एवं एसडीआरएफ के जवान भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। उन्होंने आपदा में शहीद हुए अपने साथियों और दिवंगत श्रद्धालुओं को नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने प्रार्थना की कि भगवान केदारनाथ की कृपा से भविष्य में ऐसी किसी भी त्रासदी की पुनरावृत्ति न हो तथा देश-विदेश से आने वाले सभी श्रद्धालुओं की यात्रा सदैव सुरक्षित और मंगलमय रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धा, संवेदना और मौन की गरिमा से ओतप्रोत दिखाई दिया।















