प्लाट निरस्तीकरण में मिल सकती है राहत, कमेटी की जांच के बाद फैसला

-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ ने लिया फैसला, उद्यमियों को मिल सकती है राहत

उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक भूखंडों के आवंटन निरस्तीकरण के मामलों में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण राहत देने की तैयारी में है। निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए प्राधिकरण ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। मौके पर निरीक्षण के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट के आधार पर पात्र आवंटियों को भूखंड बहाली और अतिरिक्त समय देने पर फैसला लिया जाएगा।

प्राधिकरण ने हाल ही में ऐसे 16 औद्योगिक भूखंडों के आवंटियों को नोटिस जारी किए थे, जिन्होंने निर्धारित अवधि के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर अपनी औद्योगिक इकाइयों का संचालन शुरू नहीं किया था। नोटिस मिलने के बाद कई उद्यमियों ने प्राधिकरण अधिकारियों से मुलाकात कर निर्माण में देरी के कारणों से अवगत कराया और राहत की मांग की। इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रवि कुमार एनजी के निर्देश पर एक जांच टीम गठित की गई है। यह टीम संबंधित भूखंडों का स्थल निरीक्षण करेगी और यह पता लगाएगी कि निर्माण कार्य किस स्तर तक पहुंचा है तथा इकाई को चालू होने में कितना समय लग सकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वरिष्ठ प्रबंधक (उद्योग) अरविंद मोहन ने बताया कि अब तक 10 उद्यमियों ने भूखंड बहाली के लिए आवेदन किया है। सभी आवेदनों की जांच शुरू कर दी गई है और रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।

उधर, विभिन्न औद्योगिक संगठनों का कहना है कि इकोटेक-11 सहित कई औद्योगिक सेक्टरों में बड़ी संख्या में उद्यमियों को आवंटन निरस्त करने संबंधी नोटिस भेजे गए हैं। उनका कहना है कि कई क्षेत्रों में अभी तक सीवर लाइन और पेयजल आपूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी हैं। इसके कारण निर्माण कार्य तय समय में पूरा करना संभव नहीं हो पाया। उद्यमियों का यह भी तर्क है कि पर्यावरण संबंधी प्रतिबंध, एनजीटी के निर्देश और मानसून के दौरान कई महीनों तक निर्माण कार्य प्रभावित रहता है। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने के लिए मौजूदा समय सीमा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने प्राधिकरण से निर्माण पूरा कर इकाई को संचालित करने के लिए कम से कम पांच वर्ष का समय देने की मांग की है।