- याकूबपुर में नालों में गाद और कचरा मिलने पर ठेकेदार पर एक लाख रुपये का अर्थदंड प्रस्तावित
- फेस-2 से सेक्टर-83 तक जलभराव की समस्या खत्म करने के लिए तीन प्रमुख स्थानों पर बनेंगे सम्पवैल
- एनएसईजेड, टीसीएस के सामने और होजरी कॉम्प्लेक्स के पास सम्पवैल निर्माण की डिजाइन तैयार करने के निर्देश
उदय भूमि संवाददाता
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्ण करुणेश की सक्रिय और जवाबदेह कार्यशैली का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। जनसुनवाई में मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उनके निर्देश पर वर्क सर्किल-7 के अंतर्गत ग्राम याकूबपुर और सेक्टर-83 औद्योगिक क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में नालों की सफाई व्यवस्था बदहाल मिलने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ एक लाख रुपये का अर्थदंड प्रस्तावित किया गया। वहीं, वर्षों से मानसून में जलभराव झेल रहे औद्योगिक क्षेत्रों को स्थायी राहत देने के लिए तीन स्थानों पर सम्पवैल निर्माण का निर्णय भी लिया गया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों की मौजूदगी में नालों की स्थिति का जायजा लिया। मुख्य नालों में भारी मात्रा में गाद और तैरता हुआ कचरा मिलने से जल निकासी बाधित पाई गई। इस पर संबंधित स्वास्थ्य निरीक्षक और ठेकेदार को तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए गए। लापरवाही पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ एक लाख रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सफाई व्यवस्था में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। सीईओ कृष्ण करुणेश के निर्देश पर औद्योगिक सेक्टरों का भी व्यापक निरीक्षण किया गया। समीक्षा में सामने आया कि बारिश के दौरान सिंचाई नाले का जलस्तर बढ़ने से बैक-फ्लो के कारण फेस-2, सेक्टर-80, 81, 83, 88, सैमसंग, ड्रोन कंपनी, C&S इलेक्ट्रिकल और होजरी कॉम्प्लेक्स सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव हो जाता है, जिससे उद्योगों को हर साल कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
समस्या के स्थायी समाधान के लिए तीन महत्वपूर्ण स्थानों—एनएसईजेड सिंचाई नाले के पास, ड्रोन कंपनी/C&S इलेक्ट्रिकल के समीप टीसीएस के सामने स्थित रिक्त भूमि तथा होजरी कॉम्प्लेक्स (ब्लॉक-ए) के निकट एसपीएस सिंचाई नाले के पास ग्रीनबेल्ट—में सम्पवैल निर्माण का निर्णय लिया गया है। निरीक्षण के दौरान मौजूद कंसल्टेंट को इन स्थलों की डिजाइनिंग पूरी कर निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए गए। प्राधिकरण का मानना है कि नियमित निगरानी, जवाबदेही तय करने की नीति और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की पहल से न केवल सफाई व्यवस्था में सुधार आएगा, बल्कि मानसून के दौरान औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
















