ब्लैक फंगस का चल रहा है पीक, जल्द काबू में आएगा संक्रमण: डॉ. विमल

– केंद्रीय स्वास्थ मंत्रालय में डिप्टी कमिश्नर डॉ. सुशील कुमार विमल का दावा जून तक काबू में आ जाएगा ब्लैक फंगस का संक्रमण

उदय भूमि ब्यूरो
नई दिल्ली। कोरोना संकट काल में डरे सहमे लोगों को अब ब्लैक फंगस (म्युकरमाइकोसिस) डरा रहा है। एक दर्जन से अधिक राज्यों ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन डराने वाली खबरों के बीच ब्लैक फंगस को लेकर राहत देने वाली खबरें भी आ रही है। केंद्रीय स्वास्थ मंत्रालय में डिप्टी कमिश्नर डॉ. सुशील कुमार विमल का दावा है कि म्युकरमाइकोसिस संक्रमण का पीक चल रहा है। जल्द ही इससे संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी आनी शुरू हो जाएगी और जून के अंत तक इस पर काबू पा लिया जाएगा। हालांकि कम इम्यूनिटी वाले डायबिटीज और संवेदनशील कैटेगरी के मरीजों में सक्रमण का खतरा बना रहेगा। लेकिन तब तक पर्याप्त मात्रा में दवा की उपलब्धता और संक्रमण को लेकर सर्तकता के बूते स्थिति को संभाल लिया जाएगा।
उदय भूमि से विशेष बातचीत में डॉ. सुशील कुमार विमल ने कहा कि ब्लैक फंगस कोई नई बीमारी नहीं है। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो यह फफूंदी समुदाय के फंगस का संक्रमण है। यह फंगस नॉर्मल एनवायरमेंट (वातावरण) में एयर में होता है। नमी वाले वातावरण में संक्रमण के फैलने का खतरा रहता है। वर्तमान में ब्लैक फंगस के अधिक फैलने की वजह कमजोर इम्यूनिटी और अनकंट्रोल्ड डायबिटीज है। कोरोना पेशेंट की इम्यूनिटी कमजोर होती है। इस कारण कोरोना संक्रमण से ऊबर रहे लोगों पर इसका अटैक अधिक हो रहा है। दरअसल कमजोर इम्यूनिटी वालों लोगों को खतरा अधिक है। कोरोना के कारण अधिक संख्या में लोगों ने स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया। स्टेरॉयड के अधिक उपयोग के कारण शुगर लेवल में इजाफा हुआ। जिन लोगों का पहले शुगर लेवल नॉर्मल या बार्डर लाइन पर था स्टेरॉयड के कारण वह बढ़ गया और जो पहले से डाइबिटीक थे उनका शुगर लेवल पूरी तरह अनकंट्रोल्ड हो गया। इस कारण फंगल इंफेक्शन को अटैक करने का मौका मिल गया। कोरोना के कारण लोगों ने होम आइसोलेशन में कामर्शियल और इंडस्ट्रीयल ऑक्सीजन का उपयोग किया।ऑक्सीजन के उपयोग के दौरान डिस्टिल्ड वाटर की जगह टैप वाटर का भी लोगों ने उपयोग किया। ब्लैक फंगस की एक वजह इसे भी माना जा रहा है। जिस तरह बैक्टीरिया के कई ग्रुप होते हैं इसी तरह फंगस के भी कई ग्रुप होते हैं। ब्लैक फंगस और वाइट फंगस इसी का रूप है। यह सबसे पहले टिश्यू पर अटैक करता है। इस कारण टिश्यू काला पर जाता है। यह नाक और खून के जरिये ब्रेन तक फैल जाता है। इस कारण यह अधिक खतरनाक हो जाता है। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में आंत में ब्लैक फंगस का दुर्लभ मामला सामने आया है इसमें संक्रमण नाक से आंत तक पहुंचा है। इसकी अभी विस्तृत जांच की जा रही है। ब्लैक फंगस नाक में जिस साइड में अटैक करेगा उसी साइड की नाक बंद होंगी। सिर में दर्द, एक तरफ से नाक बंद होना, आंख में सूजन, नाक बंद होना, चेहरे या गाल पर एक तरफ दर्द होना या सुन्न होना ब्लैक फंगस इंफेक्शन के सिम्टम्स हैं। ब्लैक फंगस के वर्तमान में जितने भी केस हैं उसमें से लगभग 95% ऐसे हैं जिन्हें कोरोना हुआ था और ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी या फिर बहुत अधिक मात्रा में स्टेरॉयड का उपयोग किया था।
डॉ. विमल कहते हैं कि लोगों को ब्लैक फंगस को लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। वर्तमान में पैनिक हालात इसलिए हो गये क्योंकि अचानक से इसके मरीज अधिक हो गये और इसके दवा की कमी पड़ गई। सरकार ने दवा की कमी को पूरा करने का प्रयास तेज कर दिया है। भारत में 5 से 6 कंपनियों को जल्द से जल्द अधिक दवा बनाने को कहा गया है और विदेशों से भी दवा का आयात किया जा रहा है। जून तक दवा की लगभग 5 लाख डोज मिल जाएगी। ऐसे में दवा की कमी भी दूर हो जाएगी। कुछ खबरें आई है कि मॉस्क की वजह से ब्लैक फंगस फैलता है क्या ऐसा है? इसके जवाब में डॉ. विमल ने बताया कि मॉस्क लगाना जरूरी है। मॉस्क कोरोना के साथ-साथ कई तरह के अन्य संक्रमण से भी बचाता है। जहां तक मॉस्क से संक्रमण फैलने का सवाल है तो यह तभी हो सकता है जब हम एक मॉस्क को ही बिना धोए और साफ किये लगातार उपयोग करते रहें। बिना साफ किये मॉस्क के लगातार उपयोग से मॉस्क में नमी हो सकता है। इससे संक्रमण फैल सकता है। लेकिन एक बार फिर कह रहा हूं कि मॉस्क लगाना जरूरी है और इससे ब्लैक फंगस नहीं फैलता है। कोरोना से रिकवरी के तत्काल बाद या रिकवरी के दौरान ही इस तरह के इंफेक्शन का खतरा रहता है। जब फंगस का इंफेक्शन होता है उसको सिम्टम्स के साथ विजुअल होने में एक-दो सप्ताह का समय लग जाता है। यही वजह है कि ब्लैक फंगस संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी आने में अभी एक से दो सप्ताह का समय लगेगा। कोरोना की ही तरह ब्लैक फंगस का भी एक लहर चला है जो धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा। जिन्हें अप्रैल में इंफेक्शन हुआ था उनका पता मई में चला है और मई में जिन्हें इंफेक्शन हुआ है वह सब मामले अब आ रहे हैं। जिस तरह कोरोना का पीक था उसी तरह ब्लैक फंगस का पीक गुजर चुका है। अब इन्फेक्शन में कमी आएगी।