-बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली राहत, छोटे प्लॉट्स पर चार मंजि़ल न बनने देने से आम आदमी को होगा नुकसान
-मध्यम वर्ग की आवासीय जरूरतें पूरी करने में असफल रहेंगे नए नियम: संदीप शुक्ला
-सरकार से नियमों पर पुनर्विचार और छोटे बिल्डरों को लचीलापन देने की मांग
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद/ट्रांस हिंडन। सरकार द्वारा हाल ही में घोषित नए भवन निर्माण नियमों को लेकर ट्रांस हिंडन बिल्डर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है। जबकि बड़े भूखंडों और मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट्स को लेकर नीति में उदारता दिखाई गई है, वहीं छोटे बिल्डरों और सीमित भू-स्वामियों के लिए नियमों में सख्ती ने चिंता बढ़ा दी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप शुक्ला ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि,
सरकार की नीति एक ओर बड़े बिल्डरों के लिए विकास के रास्ते खोलती है, वहीं दूसरी ओर छोटे प्लॉट मालिकों को उनकी विकास क्षमता से वंचित कर रही है। नए नियमों के तहत 1000 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों पर मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट्स की अनुमति दी गई है, जिसे एसोसिएशन ने धनकुबेरों को विशेष छूट बताते हुए विरोध किया। जबकि छोटे प्लॉट्स पर पार्किंग प्लस केवल तीन मंजिल की अनुमति दिए जाने से मध्यम वर्ग के लिए आवासीय संकट और गहरा होने की आशंका जताई गई है।
शुक्ला ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर जैसे तेजी से शहरीकृत होते क्षेत्रों में जहां आबादी हर वर्ष लाखों की संख्या में बढ़ रही है, वहां छोटे प्लॉट्स पर निर्माण सीमित करना सीधे तौर पर मकानों की आपूर्ति और किफायती आवास की संभावनाओं को खत्म करने जैसा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक आम आदमी अपनी जमा-पूंजी से 100 गज का प्लॉट लेकर मकान बनवाना चाहता है, तो उसे मंजूरी सिर्फ तीन मंजिल की क्यों? अगर एक अतिरिक्त मंजिल की अनुमति दी जाए, तो एक ही परिवार में तीन पीढिय़ां आराम से रह सकती हैं। ट्रांस हिंडन बिल्डर्स एसोसिएशन का कहना है कि यह नीति रियल एस्टेट सेक्टर में असंतुलन पैदा करेगी। जहां बड़े बिल्डर बहुमंजिला प्रोजेक्ट बनाकर ज्यादा मुनाफा कमाएंगे, वहीं छोटे बिल्डर विकास की दौड़ में पिछड़ जाएंगे। इससे न केवल रियल एस्टेट की व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी, बल्कि आम नागरिकों के लिए मकान खरीदना और भी मुश्किल हो जाएगा।
एसोसिएशन ने सरकार से यह मांग की है कि छोटे प्लॉटों पर पार्किंग प्लस चार मंजिल की अनुमति तत्काल दी जाए, ताकि आवासीय संकट को हल किया जा सके और आम आदमी को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांग पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो एसोसिएशन जन आंदोलन का रास्ता भी अपना सकती है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ बिल्डरों की नहीं, बल्कि हर उस परिवार की आवाज है जो दिल्ली-एनसीआर में अपना सिर छुपाने के लिए छत तलाश रहा है। अगर छोटे बिल्डर्स की बातों को अनसुना किया गया, तो ट्रांस हिंडन क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों पर प्रभाव पड़ सकता है। निवेश में कमी, छोटे प्लॉटों की बिक्री में गिरावट और मकानों की कीमतों में वृद्धि जैसे परिणाम सामने आ सकते हैं।















