-नेहरू वर्ल्ड स्कूल के वार्षिकोत्सव में ‘द सन रिजाइन’ ने बांधा समां, बच्चों के अभिनय ने छोड़ी अमिट छाप
-डॉ. अरुणाभ सिंह ने विद्यार्थियों की मेहनत को सराहा, अभिभावकों और शिक्षकों के सहयोग को बताया अहम
-‘धन्यवाद’ की ताकत ने दिया जिंदगी का बड़ा संदेश, संवाद, नृत्य और अभिनय से जीवंत हुई सूरज की कहानी
-शैक्षणिक उपलब्धियों से लेकर रचनात्मक प्रतिभा तक का दिखा संगम, आत्मविश्वास और सर्वांगीण विकास का संदेश
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मंच पर सूरज नाराज था… करोड़ों वर्षों से पूरी दुनिया को रोशनी और ऊर्जा देने के बावजूद उसे अपने योगदान का एहसास कराने वाला कोई नहीं था। आखिरकार उसने काम छोडऩे का फैसला कर लिया और देखते ही देखते पूरी दुनिया अंधेरे में डूब गई। फिर एक नन्हीं बच्ची की मासूम आवाज में निकला सिर्फ एक शब्द-‘धन्यवाद’। इस छोटे से शब्द ने सूरज को उसके महत्व का एहसास कराया और दुनिया में फिर से उजाला लौट आया। शास्त्री नगर स्थित नेहरू वर्ल्ड स्कूल के वार्षिकोत्सव में प्रस्तुत नाटक ‘द सन रिजाइन’ ने कुछ इसी भावपूर्ण कहानी के जरिए दर्शकों को जीवन का बेहद खूबसूरत संदेश दिया। शनिवार को नेहरू वर्ल्ड स्कूल में कैम्ब्रिज कक्षाओं का वार्षिकोत्सव हर्षोल्लास और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। दो पारी में संपन्न हुए इस समारोह में विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास, ऊर्जा और रचनात्मकता के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण ‘द सन रिजाइन’ रहा, जिसने अपनी कहानी, प्रभावशाली संवाद, आकर्षक नृत्य और सजीव अभिनय से दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। समारोह में विद्यालय की एक्जीक्यूटिव हेड सुश्री सुजैन होम्स ने सभी अभिभावकों और गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास और रचनात्मकता विकसित करने के साथ उन्हें अपनी प्रतिभा को मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करते हैं। विद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए हमेशा अग्रणी रहा है और भविष्य में भी इसी दिशा में निरंतर कार्य करता रहेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयास एवं कर्मठता का सशक्त उदाहरण हैं।
सूरज के रूठने से दुनिया में छाया अंधेरा
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट की प्रस्तुति से हुई। इसमें वर्ष 2025-26 के दौरान विद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया। इसके बाद मंच पर नाटक की कहानी ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ‘द सन रिजाइन’ की कहानी सूरज के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। नाटक में दिखाया गया कि सूरज करोड़ों वर्षों से पृथ्वी को लगातार प्रकाश और ऊर्जा देता आ रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसे लगता है कि उसके योगदान को कोई महत्व नहीं मिल रहा। उपेक्षा महसूस करने के बाद सूरज काम छोडऩे का निर्णय ले लेता है। जैसे ही सूरज अपना काम बंद करता है, पूरी दुनिया अंधकार में डूब जाती है। अंधेरे से परेशान संसार सूरज को वापस लाने के लिए तमाम प्रयास करता है, लेकिन सूरज अपने निर्णय पर कायम रहता है।
कहानी उस समय भावनात्मक मोड़ लेती है, जब एक छोटी-सी बच्ची पूरे मन से सूरज को सिर्फ ‘धन्यवाद’ कहती है। बच्ची के इस सच्चे भाव से सूरज को अहसास होता है कि उसके योगदान का महत्व कितना बड़ा है। वह वापस लौटने का निर्णय करता है और दुनिया फिर रोशनी से जगमगा उठती है। नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली ढंग से यह संदेश दिया कि हमारे आसपास मौजूद छोटी-छोटी चीजों और लोगों के योगदान को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। किसी के प्रयास के लिए कहा गया एक छोटा-सा ‘धन्यवाद’ भी उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। नाटक ने दर्शकों को जीवन में सम्मान, कृतज्ञता और छोटी-छोटी खुशियों की कद्र करने का संदेश दिया।
संवाद, नृत्य और अभिनय ने जीता दिल
नाटक में विद्यार्थियों के प्रभावशाली संवाद, आकर्षक नृत्य और सजीव अभिनय ने कहानी में जान डाल दी। मंच सज्जा और प्रस्तुतिकरण के साथ बच्चों की ऊर्जा ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया। विद्यार्थियों ने जिस आत्मविश्वास के साथ अपनी भूमिकाएं निभाईं, उसने अभिभावकों और अतिथियों को खासा प्रभावित किया। प्रस्तुति के दौरान सभागार तालियों से गूंजता रहा। समारोह के विशेष अतिथि डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. शिखा और डॉ. आकांक्षा कंसल रहे। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनके आत्मविश्वास और प्रतिभा की प्रशंसा की। विद्यालय के डायरेक्टर डॉ. अरुणाभ सिंह ने विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की मेहनत की प्रशंसा करते हुए विद्यालय के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
‘आज के नन्हे विद्यार्थी ही कल के जिम्मेदार नागरिक’
समारोह के समापन पर जूनियर स्कूल की प्रधानाचार्या पूनम गैरोला ने आयोजन को सफल बनाने में अभिभावकों और अध्यापिकाओं के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों के विकास में विद्यालय और परिवार की समान भागीदारी बेहद जरूरी है। बच्चों को केवल शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें सही दिशा, अच्छे संस्कार और जिम्मेदारी का भाव देना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज के यही नन्हे विद्यार्थी भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनेंगे। इसलिए उनके व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सफल आयोजन के लिए विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और सभी सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। नेहरू वर्ल्ड स्कूल का यह वार्षिकोत्सव विद्यार्थियों की प्रतिभा, मेहनत और रचनात्मक सोच का शानदार मंच बनकर सामने आया। ‘द सन रिजाइन’ ने जहां दर्शकों को मनोरंजन और भावनाओं से जोड़ा, वहीं अपने संदेश के माध्यम से यह भी बताया कि जीवन में किसी के योगदान को पहचानना और उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना कितना जरूरी है। बच्चों की शानदार प्रस्तुति ने समारोह को यादगार बना दिया।

















