गाजियाबाद। तहसील सदर में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में बुधवार को अधिवक्ता और बैनामा लेखक धरने पर बैठ गये।
आरोप है कि तहसीलदार और तहसील प्रशासन आकंठ तक भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है, भ्रष्टाचार अपने चरम सीमा पर पहुंच गया है। कोई भी काम बिना रिश्वत लिए नही होता है। तहसील न्यायालय की बहुत सारी पत्रावलियां गायब हैं जिनके बारे में कुछ पता नहीं चल पा रहा है। अधिवक्ता और बैनामा लेखकों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन देकर रोक लगाने की मांग की। बैनामा लेखक रामानंद गोयल का कहना है कि बिना सुविधा शुल्क के कोई भी काम नहीं हो रहा है। दाखिल खारिज के लिए अच्छी खासी सुविधा शुल्क की मांग की जा रही है। इस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। तहसील में भ्रष्टाचार का खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तहसील बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार शर्मा ने कहा कि इस कारण से तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं में रोष व्याप्त है। यदि जल्द ही तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगाई गई तो वे बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस मौके पर सावन कुमार तेवतिया, उपाध्यक्ष बलराज सिंह कसाना, कोषाध्यक्ष दीपक वाष्र्णेय, पूर्व अध्यक्ष लोमेश कुमार भाटी, योगेश कुमार त्यागी, रमेश यादव एडवोकेट, विकास त्यागी, कुणाल त्यागी समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता एवं बैनामा लेखक प्रदर्शन में मौजूद रहे।















