प्रयागराज में मौत के बाद आबकारी विभाग ने शराब माफिया पर कसा शिंकजा
छापेमारी में 190 लीटर शराब बरामद कर 4 हजार किलोग्राम लहन किया नष्ट
गाजियाबाद। अवैध मदिरा जहरीली और घातक हो सकती है। पीने से गंभीर बीमारियों के अलावा मौत तक हो सकती है। लखनऊ, फिरोजाबाद, हापुड़, मथुरा,आगरा, बागपत और मेरठ में जहरीली शराब के तांडव के बाद अब प्रयागराज जिले के फूलपुर थाना क्षेत्र के चार गांवों के छह लोग जहरीली शराब के सेवन से असमय काल कवलित हो गए। प्रयागराज की घटना के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में शराब कारोबारियों पर शिंकजा कसा जाने लगा है। आबकारी विभाग जिले में समय-समय पर पुलिस के साथ संयुक्त रूप से छापेमारी करता रहता है। इस बीच पांच दिन पूर्व प्रयागराज जिले के फूलपुर में जहरीली शराब से छह लोगों की मौत होने पर जिले में भी आबकारी महकमा सतर्क हो गया। जिले में आबकारी विभाग की टीम ने लोनी क्षेत्र में छापेमारी की कार्रवाई करते हुए अवैध शराब बरामद किया और मौके पर हजारों लीटर लहन नष्ट किया। अवैध शराब बनाने वालों के खिलाफ आबकारी विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। 
जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय के आदेश पर जिला आबकारी अधिकारी मुबारक अली के निर्देशन में गुरूवार को आबकारी निरीक्षक सेक्टर-3, सीलम मिश्रा, प्रवर्तन टीम मेरठ आबकारी निरीक्षक विवेक दुबे, आबकारी निरीक्षक सेक्टर-2 टी.एस. हयांकी,आबकारी निरीक्षक सेक्टर-6 अरूण कुमार की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर शराब माफिया पर छापेमारी की बडी कार्रवाई करते हुए 190 लीटर शराब बरामद और 4 हजार किलोग्राम लहन को मौके पर नष्ट किया। आबकारी निरीक्षक सेक्टर-3 सीलम मिश्रा ने बताया कि लोनी स्थित रिस्तल, महमूदपुर, भनेडा जंगल एवं हिण्डन के खादर पर दबिश की कार्र्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान तस्कर मौके से फरार हो गये, लेकिन 190 लीटर शराब बरामद और 4 हजार किलोग्राम लहन को मौके पर नष्ट किया गया। उन्होने बताया समय-समय पर देशी व अंग्रेजी शराब की दुकानों को भी चेक किया जा रहा है। अवैध शराब बनाने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह से अभियान चलता रहेगा।
प्रवर्तन टीम मेरठ आबकारी निरीक्षक विवेक दुबे ने बताया कि अवैध मदिरा जहरीली और घातक हो सकती है। अवैध शराब के पीने से गंभीर बीमारियों के अलावा मौत तक हो सकती है। इसलिए नकली और अवैध शराब पीने से बचे। नए आदेशों में लोगों से भी सहयोग की अपील की गई है, जिसमें किसी भी तरह के अवैध शराब के कारोबार चलने पर त्वरित सूचना विभाग को दी जाए। जिला आबकारी अधिकारी के नेतृत्व में विभाग की टीमें अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई की जाएगी। 
बता दें कि नदी किनारे जंगल में कच्ची शराब बनाने के लिए भट्टी दहक रही थी, अगर समय रहते आबकारी विभाग की टीम ने छापेमारी की कार्रवाई न की होती तो शायद फिर एक बार प्रयागराज में हुए शराबकांड में हुई 6 लोग की मौत की घटना जिले में भी हो सकती थी। शराब माफियाओं पर नकेल कसने के लिए समय-समय पर आबकारी विभाग कार्रवाई करता रहता है। लेकिन इन सब के बीच लोगों में भी जागरूकता बेहद जरूरी है। पूर्व में भी आबकारी विभाग की टीम ने छापेमारी की कार्रवाई करते हुए लाखों लीटर लहन नष्ट किया है।
लागत की तुलना में होता है ज्यादा मुनाफा
कच्ची शराब की तीव्रता के लिए ना तो कोई पैमाना होता है और नही एल्कोहल जानने का कोई यंत्र। सूत्रों की मानें तो शराब में तीव्रता लाने और इसे कड़वा बनाने के लिए यूरिया और नौसादर की मात्रा उतनी ही बढ़ा दी जाती है। सौ लीटर क्षमता वाले ड्रम में करीब चालीस किलो गुड़ खर्च होता है। सबसे पहले गुड़ को पांच दिन तक धुप में रखते है इसके बाद गुड़ को ड्रम में डालकर पानी से भरने के बाद पांच दिन तक रख दिया जाता हे। इस अवधि में लहन तैयार हो जाता है। लहन में नौसादर, युरिया व खाने का सोड़ा मिलाकर इसे भ_ी पर चढ़ाकर इससे कच्ची शराब निकाली जाती है इस पूरे प्रकरण में तकरीबन 12 सौ रूपये का खर्च आता और मुनाफा लगभग चार गुना होता है। गुड़ को पानी भरे ड्रम डालकर भट्टी पर रख दिया जाता है। इसके बाद इसमें चूना मिलाते है। चूना मिलते ही पानी में उबाल आ जाता है, और दो से तीन घंटे के भीतर कच्ची शराब ड्रम में उपर तैर जाती है और इसे निकाल कर किसी बर्तन में भर लिया जाता है। एक ड्रम लहन में साठ से सत्तर बोतल कच्ची शराब तैयार हो जाती है। जिसमें पानी मिलाकर शराब माफिया अपनी जेब भरने में जुट जाते है।















