-कोर्ट के पेशकार के बड़े भाई की रिपोर्ट बताई निगेटिव
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। इस समय जितना कोरोना महामारी के संक्रमण के रोकथाम के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, उससे भी अधिक संभावित कोरोना सक्रमण के रोकथाम के लिए लोग परेशान हो रहे हैं। ऐसे में अफसर न सिर्फ अपनी मनमर्जी चला रहे हैं, बल्कि सीबीआई कोर्ट के जज को भी झूठा जवाब दे रहे हैं। एक मरीज की रिपोर्ट के बार में जिला अस्पताल के सीएमएस ने बताया कि मरीज की रिपोर्ट निगेटिव है, लेकिन लैब में जानकारी लेने पर पता चला कि संबंधित मरीज का सैंपल ही गायब कर दिया गया। यह घटना कोई पहली बार नहीं हैं, बल्कि आए दिन इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है। सीबीआई कोर्ट में कार्यरत एक पेशकार के 75 वर्षीय भाई की एक सप्ताह पहले तबीयत खराब होनेे पर जिला एमएमजी अस्पताल में जांच कराई। एंंटीजन रिपोर्ट निगेटिव आई तो डाक्टरों ने आरटीपीसीआर जांच कराने के लिए कहा। जिला एमएमजी अस्पताल के 34 नंबर में एक सप्ताह पहले सैंपल जांच के लिए दिया। इस दौरान भाई की तबीयत अधिक खराब हुई तो परिजन उन्हें कई अस्पतालों में ले गए, लेकिन किसी भी अस्पताल ने भर्ती नहीं किया। सभी आरटीपीसीआर की रिपोर्ट मांगते रह। किसी तरह से मरीज को नोएडा के नवीन अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पर इलाज तो चल रहा है, लेकिन डाक्टर रोज आरटीपीसीआर की जांच रिपोर्ट मांगते हैं। परिजन रोज लैब के चक्कर काटते हैं। बृहस्पतिवार को पेशकार ने सीबीआई जज से फरियाद करते हुए रिपोर्ट के बारे में जानकारी लेने का अनुरोध किया। जज ने अस्पताल के सीएमएस से फोन पर रिपोर्ट के बारे में बात की तो बताया गया कि रिपोर्ट निगेटिव है। परिजन रिपोर्ट की कॉपी लेने कोरोना लैब पहुंचे तो वहां बताया गया कि इस नाम की कोई सैंपल ही नहीं आई है। सलाह अलग से दी गई कि आप दोबारा सैंपलिंग करा लो, कल तक रिपोर्ट मिल जाएगी। परिजन ने बताया कि मरीज नोएडा के अस्पताल में भर्ती है तो कर्मचारी का कहना था कि बिना दोबारा सैंपल आए कुछ नहीं किया जा सकता। वहीं इस मामले में अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. अनुराग भार्गव का कहना है कि फोन पर जो मैसेज परिजनों द्वारा दिया गया था, उस नाम से 22 वर्षीय एक युवक की रिपोर्ट निगेटिव है, जबकि जिस मरीज की रिपोर्ट मांगी गई थी उनकी उम्र 72 वर्ष है। जांच की जा रही है कि सैंपल की जानकारी क्यों नहीं हो पा रही है
















