दिग्गजों के लिए अध्यक्ष पद पर चुनाव लडऩे का रास्ता साफ
गाजियाबाद। जनपद में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनारक्षित (सामान्य) हो गई है। ऐसे में किसी भी जाति के व्यक्ति के लिए चुनाव मैदान में उतरने का रास्ता साफ हो गया हैं। जिला पंचायत के अंतर्गत 14 वार्ड हैं। वार्ड सदस्य जीतने के बाद किसी भी समाज का व्यक्ति अध्यक्ष पद के लिए अपनी किस्मत आजमा सकेगा। इस बार अध्यक्ष पद पर दावेदारों की संख्या अधिक होने की उम्मीद हैं। भाजपा के लिए यह चुनाव विधान सभा चुनाव का रिहर्सल होगा। वहीं, कांग्रेस, सपा, बसपा और रालोद के लिए भी चुनौतीपूर्ण होगा। इस बीच भावी उम्मीदवारों ने राजनीतिक रूप से अपने समीकरण बैठाने भी शुरू कर दिए हैं। इस बार सबसे ज्यादा दावेदार सत्ताधारी भाजपा में हैं। वर्ष-2010 में सूबे में बसपा की सरकार थी। उस समय बसपा के पूर्व नेता मलूक नागर की पत्नी सुधा नागर जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं, मगर 2012 में हापुड़ अलग जिला बनने के बाद प्रदेश में सपा सरकार आ गई। इसके बाद अध्यक्ष पद के लिए उप-चुनाव कराए गए। वर्तमान में भाजपा के मुरादनगर विधायक अजीत पाल त्यागी अध्यक्ष बने। उस समय अजीत पाल त्यागी और उनके पिता पूर्व कैबिनेट मंत्री राजपाल त्यागी की सपा से खासी नजदीकी थी। अजीत पाल ने सदस्य पद पर निर्दलीय चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2015 में जिला पंचायत के चुनाव हुए, जिसमें अजीत पाल ने चुनाव लडऩे से इंकार कर दिया। ऐसे में एमएलसी आशु मलिक के भाई नूर हसन मलिक जिला पंचायत अध्यक्ष बने, मगर वर्ष-2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद नूर हसन को पद गंवाना पड़ा। जिला पंचायत के वार्ड सदस्यों की संख्या 14 है। इसमें वार्ड-1 से लेकर वार्ड-5 तक भोजपुर, वार्ड-6 और वार्ड-7 मुरादनगर ब्लॉक, वार्ड-8 मुरादनगर, रजापुर ब्लॉक, वार्ड-9,10 व 11 रजापुर ब्लॉक और वार्ड-12, 13 और वार्ड-14 लोनी ब्लॉक क्षेत्र के वार्ड शामिल हैं। बता दें कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए वर्ष-1995 में सामान्य सीट, वर्ष-2000 में ओबीसी महिला, वर्ष-2005 में एससी महिला, वर्ष-2010 में सामान्य सीट, वर्ष-2015 में ओबीसी, वर्ष-2021 में सामान्य सीट होने से इस बार कई दिग्गजों के लिए अध्यक्ष पद पर चुनाव लडऩे का रास्ता साफ हो गया है।
















