औलाद की चाह में तंत्र-मंत्र में फंसी युवा-पीढी
गाजियाबाद। औलाद चाहने वालों पहले लूटो मानसिक रूप से पिटो और यदि पहला जन्म पुत्री का हुआ पुत्र प्राप्ति के लिए फिर लूटों। उसके लिए समाज में पैसा कमाने के लिए विकृत मानसिकता इंसान ऐसे नहीं हो सकते, शैतान हर गली मोहल्ले में मौजूद हैं। जिनमें स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मी चिकित्सा व्यवसाय को बदनाम करने वाले जो लोगों का धन भी लूट रहे हैं और स्वास्थ्य को भी नरक बना रहे हैं। उनके साथ झाड़-फूंक करने वालों का गठजोड़ लोगों को इस तरह जकड़ लेता है कि जब तक उसके पास इन्हें देने के लिए पैसा होता है। तब तक वह इनके चंगुल से नहीं निकल पाता और वह कुछ समझ पाता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। सबके अपने-अपने व्यापार व्यवसाय नौकरी जीवन यापन के लिए हैं। लेकिन कुछ लोग जल्द ही अमीर बहुत अमीर बनने के लिए समाज का कितना बड़ा अहित कर जाते हैं। वह खुद भी समय रहते नहीं समझ पाते। क्षेत्र में ऐसा गठजोड़ चल रहा है जिसमें स्वास्थ्य कर्मी कुछ डॉक्टर तंत्र मंत्र के नाम पर मुरादें पूरी करने वाले शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि ऐसे लोग सर्वप्रथम नवविवाहित जोड़े के बीच किसी तरह से अपनी निकटता बढ़ाते हैं। नवविवाहिता को होने वाले प्रसव से पूर्व सेहत अच्छी करने की दवा बता कर ऐसी दवाइयां दी जाती हैं। जो गर्भनिरोधक होती हैं, जिनके कारण शादी के लंबे समय तक महिला गर्भधारण नहीं कर पाती। प्रथम कड़ी अब उसके बच्चे ने होने पर घडिय़ाली आंसू बहा कर अपने पहचान वाले एक बाबा जी और एक डॉक्टर का नाम बताते हुए दावा करता है कि उनके इलाज दुआओं से शर्तिया बच्चा हो जाएगा। औलाद की आस लिए दंपत्ति को एक तथाकथित सिद्ध से आशीर्वाद दिलवाया जाता है। जहां कुछ उपायों के नाम पर उनसे धन लिया जाता है। उसके बाद डॉक्टर की सलाह भी ली जाती है। दोनों से मनचाही मुराद पूरी होने के आश्वासन के बाद तथाकथित सेहत की दवा बंद कर दी जाती है। अधिकांश मामलों में दंपत्ति को पता चलता है कि डॉक्टर के इलाज बाबा के आशीर्वाद से वह माता पिता बनने जा रहे हैं। उसके बाद ठगों का मीटर और तेजी से घूमता है। तंत्र मंत्र वालों को भारी चढ़ावा चढ़ाया जाता है। क्योंकि मन की मुराद पूरी होने की आशा दिखाई देने लगती है। फिर प्राथमिक सलाह देने वाले चिकित्सक के यहां जच्चा बच्चा की बेहतरी के लिए इलाज शुरू होता है। जिसके लिए प्रति सप्ताह कई हजार रुपए खर्च हो जाते हैं। क्योंकि लंबे समय के बाद बच्चे की उम्मीद होती है, ऐसे में दंपत्ति सब कुछ बेच कर भी तिगड़ी की भेंट चढ़ाता रहता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि बच्चे के पैदा होने से पहले सोनोग्राफी आदि जांच कराई जाती हैं और यदि दंपत्ति के पास पैसे का इंतजाम ठीक दिखलाई देता है तो उसे बताया जाता है कि गर्भ में स्थित बच्चे में कमी है। जो आगे जाकर भयंकर परिणाम दे सकती है। इसलिए उसका इलाज भी प्रसव से पूर्व करने के नाम पर वसूली की जाती है। ऐसे मामलों की एक जानकार का कहना है कि अधिकांश मामलों में रुपयों के लिए ऑपरेशन से बच्चों की डिलीवरी कराई जाती है। उसका कारण है कि प्रसव वेदना प्रारंभ होते ही महिला को दर्द निरोधक इंजेक्शन दे दिए जाते हैं। जिसके कारण सामान्य प्रक्रिया रुक जाती है और तभी कहा जाता है कि अब कराओ ऑपरेशन। इस बारे में हमारे संवाददाता ने पूरी जानकारियां जुटाई हैं। जिसके लिए ऐसे मामलों के जानकारों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बहुत सी चौंकाने वाली जानकारियां उपलब्ध कराई हैं। भविष्य में हम पाठकों को ऐसी अन्य समाजिक बुराइयों से अवगत कराने का प्रयास करेंगे।















