हिंडन श्मशाम घाट पर नया बनेगा विद्युत शवदाह गृह

-अंतिम संस्कार के लिए 15 प्लेटफार्म की मरम्मत का निर्माण कार्य शुुरू

गाजियाबाद। हिंडन मोक्ष स्थल पर नगर निगम द्वारा एक ओर नए विद्युत शव दाह गृह का निर्माण किया जाएगा। वहीं, हिंडन मोक्ष स्थल पर शव का अंतिम संस्कार के लिए 15 प्लेटफार्म की मरम्मत का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया हैं।कोरोना संक्रमण काल के चलते हिंडन मोक्ष स्थली पर शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए मारामारी हो रही हैं। विद्युत शवदाह गृह के बार-बार खराब होने और मेंटीनेंस समय पर न होने की वजह से कोरोना प्रोटोकॉल के तहत शवों का अंतिम संस्कार करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम अब विद्युत शवदाह गृह की दूसरी यूनिट बनाने की प्लानिंग कर रहा है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर का कहना है कि हिंडन मोक्ष स्थल पर शवों का अंतिम संस्कार समय पर हो सके। इसलिए नए विद्युत शवदाह गृह का निर्माण करने के लिए इसका जल्द प्रस्ताव तैयार कराएंगे। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद डेढ़ से दो माह में यह नई यूनिट बनकर तैयार हो सकती है।पूर्व नगर आयुक्त डॉ.दिनेश चंद्र सिंह के कार्यकाल में भी एक और विद्युत शवदाह गृह बनाने की प्लानिंग की गई थी। उन्होंने जीडीए को प्रस्ताव भेजकर नई यूनिट बनवाने का आग्रह किया था। जीडीए ने हाथ खड़े किए तो निगम ने अपने स्तर पर दूसरी यूनिट लगाने का प्रस्ताव तैयार कराया था,लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। नगर निगम अब एक बार फिर से विद्युत शवदाह गृह की दूसरी यूनिट लगाने की प्लानिंग कर रहा है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह का कहना है कि इस संबंध में जल्द ही जिलाधिकारी से वार्ता कर इस पर निर्णय लेंगे। उसके बाद इसका प्रस्ताव बनाकर योजना पर काम शुरू किया जाएगा। बता दें कि विद्युत शवदाह गृह बन जाने पर हिंडन मोक्ष स्थली पर लकडिय़ों की खपत कम होगी। एक शव के अंतिम संस्कार में करीब 4 से 5 क्विंटल लकड़ी इस्तेमाल होती है,जबकि विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार करने पर इसकी जरूरत नहीं होती है। बिजली से संचालित एक शवदाह गृह में रोजाना पांच से छह अंतिम संस्कार हो सकते हैं। ऐसे में रोजाना करीब 25 से 30 क्विंटल लकड़ी की बचत होगी। महीने में 900 क्विंटल लकड़ी की खपत कम हो सकती है। इतनी लकड़ी कम जलेंगी तो प्रदूषण भी कम होगा और पर्यावरण को भी नुकसान कम होगा। लकड़ी की खपत ज्यादा होने की वजह से पेड़ों की कटाई भी निरंतर हो रही है। नगर आयुक्त का कहना है कि हिंडन मोक्ष स्थल पर नए विद्युत शवदाह गृह बनाने पर विचार किया जा रहा है। जिलाधिकारी से जल्द इस पर वार्ता की जाएगी। वहीं,इसके लिए फंड की व्यवस्था कराई जाएगी। श्मशान घाट पर जगह पर्याप्त है,ऐसे में दूसरा विद्युत शवदाह गृह आसानी से बनाया जा सकता हैं। वहीं,हिंडन नदी मोक्ष स्थल पर अंतिम संस्कार के लिए 15 प्लेटफार्म का निर्माण शुरू कर दिया गया हैं। नगर निगम द्वारा पुराने प्लेटफार्म जर्जर होने के बाद इनकी मरम्मत के साथ नए प्लेटफार्म बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक शव के अंतिम संस्कार के बाद प्लेटफार्म व उसके आसपास के हिस्से को सैनिटाइज कराने में समय लग रहा है। मोक्ष स्थली पर 53 प्लेटफार्म हैं। प्लेटफार्म पर अंतिम संस्कार के बाद तीसरे दिन परिजन अस्थियां लेकर विसर्जन करने जाते हैं। लिहाजा अस्थियां उठने के बाद ही दूसरे शव का उस प्लेटफार्म पर अंतिम संस्कार किया जाता है। नगर निगम द्वारा नए और पुराने समेत कुल 15 प्लेटफार्म बनवाए जा रहे हैं। शवों के साथ आने वाले लोगों में सामाजिक दूरी का पालन कराया जा रहा है। अंतिम संस्कार करने वाले कर्मचारियों को पीपीई किट की व्यवस्था की गई है। शव के साथ आने वाले परिजन अगर पीपीई किट की मांग करते हैं, तो उन्हें भी किट उपलब्ध कराई जा रही है। बिना मास्क के मोक्ष स्थल पर आने वाले लोगों पर पाबंदी है। मोक्ष स्थल पर लोगों के लिए हैंड सैनिटाइजर व मास्क की व्यवस्था कराई गई है। इस्तेमाल के बाद पीपीई किट को निर्धारित स्थान पर रखे पीले रंग के कोविड डेडिकेटड डिस्पोजल बॉक्स में डाल दिया जाता है। हर बार अंतिम संस्कार के बाद चिता के आस-पास और पीपीई किट वाले स्थान को सैनिटाइज कराया जा रहा है। जिस वजह से दूसरा शव जलाने में देरी हो जाती है और शवों की लाइन लग जाती है। विद्युत शव गृह ठीक कराया जा चुका है। इसमें विद्युत विभाग के कर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई है। नगर निगम के चीफ इंजीनियर मोइनुद्दीन ने बताया कि हिंडन मोक्ष स्थली पर नगर निगम द्वारा जर्जर हो चुके प्लेटफार्म की मरम्मत कराने के अलावा 15 नए प्लेटफार्म का निर्माण किया जा रहा है। इनका जल्द निर्माण होने के बाद शव का अंतिम संस्कार करने में मृतकों के परिजनों को कोई दिक्कत नहीं होगी। जर्जर प्लेटफार्म की मरम्मत भी कराई जा रही हैं। एक सप्ताह में इनका निर्माण पूरा हो जाएगा।