गोवंश के गोबर से लकडिय़ों का दांह संस्कार में होगा प्रयोग

-श्मशान घाट पर पहुंचाई गई 9 क्विंटल लकडिय़ा

गाजियाबाद। नंदी पार्क गौशाला को स्वाबलंबी बनाने की दिशा में नगर निगम ने कदम बढा दिया है। गौशाला में गौवंशों के गोबर से हर्बल एवं घरेलू उपयोग में काम आने वाली वस्तुओं का निर्माण शुरू हो गया है। गोबर से तेयार लकडिय़ों का प्रयोग मोक्ष स्थल श्मशान घाट पर भी किए जाने की योजना में किया गया प्रयास सार्थक हो गया। दरअसल नगर निगम ने इस दिशा में पहले ही कदम बढा दिया था। जो कि आज सार्थक भी हो गया है। अब गाय के गोबर से बनी लकड़ी मोक्ष भी दिलाएगी। अंतिम संस्कार के लिए ये गोबर से बनी लकड़ी का प्र्रयोग नगर निगम हिंडन श्मशान घाट के दांह संस्कार में करेगा। नगर निगम के इस प्रयास से काफी हद तक पर्यावरण में भी सुधार होगा। क्योंकि दांह संस्कार में लकडिय़ों के प्रयोग से काफी हद तक इसका असर पर्यावरण पर पड़ रहा था। क्योंकि जब पेड़-पौधे ही सुुरक्षित नही होंगे तो मनुष्य का जीवन कहां से सुरक्षित रहेगा। निगम द्वारा किए गये इस प्रयास को देखकर लोग तारीफ भी कर रहें हैै। क्योंकि नंदी पार्क गौशाला में गोवंश के गोबर से बने उत्पाद को जैसे वर्मीकंपोस्ट, कल्चर कंपोस्ट, घनजीवामृत इसके अलावा जीवामृत, गौमय लकड़ी, गौमय दीपक, गौमय गमले, गणेश लक्ष्मी एवं कंपोस्ट विन्स लकड़ी खाद इत्यादि तैयार किया जा रहा है। कोरोना संकट काल में श्मशान पर इन दिनों लकडिय़ों की ज्यादा खपत बढ गई है। जिसमें गोवंश के गोबर से लकड़ी काफी हद तक मददगार साबित होगा। नगर निगम द्वारा संचालित की जाने वाली नंदिनी गौशाला में गोवंश के गोबर से लकडिय़ों को निर्मित किया गया है, लगभग 29 क्विंटल गौमय लकडिय़ां गो वंश के गोबर से बनाने का कार्य प्रक्रिया में है। दाह संस्कार के लिए इस्तेमाल होने वाले इंधन में गौ मय लकडिय़ां भी इस्तेमाल में लाई जाएंगी और यह लकडिय़ां गाजियाबाद नगर निगम द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। नगर आयुक्त महेंन्द्र सिंह तंवर एवं मेयर आशा शर्मा के निर्देश में गाय के गोबर से बनने वाले उपलों तथा लकडिय़ों को भी हिंडन मोक्ष स्थल पर दाह संस्कार के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। 9 क्विंटल लकडिय़ा गोवंश के गोबर से बनी हुई श्मशान घाट तक पहुंचाई गई हैं। ताकि पेड़ों की लकडिय़ों के साथ-साथ गोबर से बनी हुई लकडिय़ां भी इस्तेमाल में ली जा सकें, जिससे पेड़ों की लकडिय़ों का इस्तेमाल कम हो और पर्यावरण को भी इसका लाभ मिल सकें। गाजियाबाद नगर निगम द्वारा की जा रही इस पहल में कामधेनु अबतरण अभियान का भी सहयोग प्राप्त हुआ है तथा लगातार गोवंश के गोबर से लकड़ी व अन्य प्रोडक्ट बनाने का कार्य लगातार चल रहा है।