चिक्तिसा क्षेत्र में डॉक्टर एपी सिंह ने कायम की मिसाल

-जान को जोखिम में डालकर कर रहें कोरोना मरीजों का इलाज

गाजियाबाद। यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एपी सिंह कोविड-19 के समय में चिकित्सा क्षेत्र में मिसाल बन गए हैं। वह कोविड-19 के मरीजों के उपचार में स्वयं के जीवन को जोखिम में डालकर और बहुत कठिन दिनचर्या का पालन कर जी जान से मरीजों के इलाज में जुटे हैं। प्रतिदिन प्रात: 6: 30 बजे उठकर वह घर से यशोदा हॉस्पिटल कौशांबी के लिए 70 से भी ज्यादा भर्ती मरीजों के इलाज के लिए निकल पड़ते हैं और ब्रेकफास्ट भी गाड़ी में करते हैं। प्रात: मरीजों का हाल-चाल एवं उनकी जांच और अपडेट लेने के लिए स्वयं एक-एक मरीज के पास पीपीई किट पहन कर जाते हैं और उनकी समस्याओं को सुनकर तदनुसार उनकी दवाइयां एवं अन्य जरूरी जांचें लिखते हैं। सामान्यतया दिन में वह 6 घंटे पीपी ई किट में रहते हैं। इसी में अपने व्यस्त समय में वह 2 घंटे अपने रिश्तेदारों एवं दोस्तों के मरीजों के लिए ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन देते हैं। डॉ. एपी सिंह बताते हैं कि यह उनकी सामाजिक एवं पारिवारिक जिम्मेदारी है, जिसे बखूबी निभाते हैं। हॉस्पिटल से जाने के बाद ऐसे मरीज जो कोविड-19 के डर से हॉस्पिटल नहीं आना चाहते उन्हें वैशाली सेक्टर-2 स्थित दीप क्लिनिक में अपना परामर्श देते हैं। क्लीनिक के मरीजों को देखने के बाद दोपहर 3 बजे से दोबारा वह अस्पताल का राउंड लेते हैं और अपने कोविड-19 वार्ड एवं आईसीयू में भर्ती मरीजों को स्वयं मिलकर अपडेट लेते हैं। डॉ. एपी सिंह को कोविड-19 की पहली लहर में 2 बार कोरोना संक्रमण हुआ था और वह काफी लंबे समय तक आईसीयू में भी भर्ती थे। ऐसे में उनके परिवार ने उन्हें कोविड-19 की दूसरी लहर में कोविड-19 के मरीजों को देखने से मना किया और पुरजोर कोशिश की कि वह कोविड-19 के मरीजों से दूर रहें, लेकिन अपनी डॉक्टरी पेशे की जिम्मेदारी को महसूस करते हुए और उसे निभाते हुए उन्होंने परिवार की एक न सुनी और वह कोविड-19 के मरीजों का निरंतर इलाज करते रहे। डॉ. एपी सिंह बताते हैं कि वह हर 15 दिन में अपना कोविड-19 का टेस्ट भी कराते रहते हैं और ईश्वर की कृपा से अभी तक उन्हें इस दूसरी लहर में इसका संक्रमण नहीं हुआ। डॉ. एपी सिंह मरीजों एवं सामान्य जनता को संदेश देना चाहते हैं कि दूसरी लहर जैसे-तैसे निकल रही है, लेकिन तीसरी लहर के लिए हमें तैयार रहना चाहिए और यह नहीं सोचना चाहिए कि दूसरी लहर अब कम हो गई है।