नवजात शिशु स्तनपान को बढ़ावा देने के यशोदा ने मनाया स्तनपान सप्ताह

-सर्वांगीण विकास के लिए मां का दूध जरूरी: डॉ अजीत कुमार
-कोरोनाकाल में बच्चे को स्तनपान से पूर्व बरतें सावधानी: डॉ दीपिका
-स्तनपान सुरक्षा की जिम्मेदारी, साझा जिम्मेदारी

गाजियाबाद। स्तनपान नवजात के स्वास्थ्य के लिए जीवन अमृत है। जन्म के तुरंत बाद से कराया जाने वाला स्तनपान ना सिर्फ उन्हें कई गंभीर रोगों से बचाता है बल्कि उनके संपूर्ण विकास की सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है।
स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए शुक्रवार को यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया गया। इस सप्ताह की थीम-‘स्तनपान सुरक्षा की जिम्मेदारी, साझा जिम्मेदारीÓ तय की गयी है। 1 अगस्त से शुरू हुए विश्व स्तनपान सप्ताह को 7 अगस्त तक मनाया जाएगा। प्रसवोपरांत कम से कम 6 माह के लिए माताओं को स्तनपान के लिए प्रेरित एवं जागरूक किया जा रहा है। नवजात स्वास्थ्य में स्तनपान की भूमिका पर एक कार्यशाला का भी आयोजन फेसबुक लाइव के माध्यम से किया गया।

वरिष्ठ नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अजीत कुमार एवं नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ दीपिका रस्तोगी ने भाग लिया। वही दूसरी तरफ गर्भाधारण की हुई महिलाओं में भी प्रसव से पूर्व ही स्तनपान के महत्व की जागरूकता की गयी। हॉस्पिटल के नर्सिंग विभाग द्वारा लेफ्ट कर्नल (रिश) श्रीमती राधा राणा के नेतृत्व में एक चित्र प्रदर्शनी एवं पोस्टर कम्पटीशन का भी आयोजन किया गया। डॉ अजीत कुमार का कहना है कि शिशु के लिए स्तनपान अमृत के समान होता है। यह शिशु का मौलिक अधिकार भी है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए मां के दूध का कोई विकल्प नहीं है। स्तनपान से न सिर्फ बच्चे स्वस्थ रहते हैं, बल्कि मां से उनका भावनात्मक लगाव भी बढ़ता है। स्तनपान जच्चा और बच्चा दोनों के लिए आवश्यक है। हर मां को बच्चों के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व को समझना होगा। यह दूध बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है, इसीलिए इसे बच्चे का पहला टीका भी कहा जाता है। कोरोना काल में और कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर में माताओ का स्वयं एवं शिशु को कोरोना से बचाने विषय पर भी चर्चा हुई। डॉ अजीत कुमार ने बताया कि कोरोना का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पडऩे की चर्चा के बीच यह भी जानना जरूरी है कि जो माताएं बच्चे को सही समय पर और सही तरीके से भरपूर स्तनपान कराती हैं, उन्हें बच्चे को लेकर बहुत चिंता करने की जरूरत नहीं होती है।

घरेलू महिलाओं को कृत्रिम आहार एवं बोतल से दूध पिलाने के खतरे के बारे में अवगत कराते हुए डॉ दीपिका रस्तौगी ने बताया कि कृत्रिम आहार एवं बोतल के दूध में पोषक तत्वों का अभाव होता है और यह सुपाच्य नहीं होता। इससे कुपोषण एवं संक्रमण के खतरे, दस्त, सांस के और अन्य संक्रमण के खतरे, बौद्धिक विकास में कमी की सम्भावना और बचपन में मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है। महामारी के दौरान स्तनपान कराते समय आपको कुछ सावधानियों क पालन करना चाहिए। अपने बच्चे को स्तनपान कराने से पहले, अपने हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से धोना न भूलें। उन्होंने बताया कि कामकाजी महिलाएं ब्रेस्ट पंप का प्रयोग कर अपना दूध निकल कर बच्चे को पिलाने के लिए घर में रख सकती हैं जो कही ज्यादा कारगर और उपयोगी है। मां के दूध में शिशु के लिए पौष्टिक तत्वों के साथ पर्याप्त पानी भी होता है । इसलिए छह माह तक शिशु को माँ के दूध के अलावा कुछ भी न दें। उन्होंने बताया मां के दूध की अहमियत सर्वविदित है, यह बच्चे को रोगों से लडऩे की ताकत प्रदान करने के साथ ही उसे आयुष्मान भी बनाता है। कोरोना ही नहीं बल्कि कई अन्य संक्रामक बीमारियों से मां का दूध बच्चे को पूरी तरह से महफूज बनाता है। इसलिए स्तनपान के फायदे को जानना हर महिला के लिए बहुत ही जरूरी है।