-वैशाली सेक्टर-2 से भव्य श्री जगन्नाथ यात्रा का शुभारंभ, सेक्टर-3 मंदिर पहुंचकर हुआ विश्राम
-पूर्व पार्षद डॉ. मनोज गोयल ने संभाली व्यवस्थाओं की कमान, प्रशासन और समाजसेवियों ने निभाई अहम भूमिका
-श्रद्धालुओं के उमड़े जनसैलाब ने अपने हाथों से खींचा रथ, पूरे मार्ग पर गूंजते रहे ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। वैशाली सेक्टर-2 स्थित जगन्नाथ कल्चरल सोसायटी के तत्वावधान में गुरुवार को आयोजित भव्य श्री जगन्नाथ रथ यात्रा रविवार को श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ निकाली गई। भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के दिव्य रथ के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरे यात्रा मार्ग पर ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष, भजन-कीर्तन और धार्मिक उल्लास से वातावरण भक्तिमय हो गया। यात्रा का शुभारंभ वैशाली सेक्टर-2 से हुआ और विभिन्न मार्गों से होते हुए सेक्टर-3 स्थित मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई, जहां भगवान के रथ का विश्राम कराया गया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में भगवान के रथ को अपने हाथों से खींचने की होड़ दिखाई दी। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित हर आयु वर्ग के लोगों ने पूरे उत्साह के साथ रथ यात्रा में भाग लिया। पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान जगन्नाथ का स्वागत किया।
रथ यात्रा के सफल आयोजन एवं व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी पूर्व पार्षद डॉ. मनोज गोयल ने संभाली। उन्होंने स्वयं पूरे यात्रा मार्ग का निरीक्षण करते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया। आयोजन को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए स्वयंसेवकों की टीम भी पूरे समय सक्रिय रही। यात्रा के दौरान समाजसेवी एवं सेक्टर-3 रामलीला समिति के प्रमुख विनोद शर्मा, भाजपा नेता धर्म ठाकुर, सुभाष सिंह, समाजसेवी अमित गोयल, डी.पी. सिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क दिखाई दिया।
वैशाली चौकी प्रभारी मनोज नेहरा अपनी टीम के साथ पूरे यात्रा मार्ग पर मौजूद रहे और यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर बनाए रखी। पुलिस और स्वयंसेवकों के बेहतर समन्वय के चलते रथ यात्रा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। आयोजकों ने बताया कि श्री जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। यात्रा में सभी वर्गों और आयु के लोगों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि आस्था लोगों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, अनुशासन और सेवा भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने वैशाली क्षेत्र को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।















