गैंगरेप- गाजियाबाद के भाजपा नेता एवं पूर्व चेयरमैन जाएंगे जेल?

गैंगरेप में कोर्ट ने जारी किया गैर जमानती वारंट, लोनी नगर पालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन मनोज धामा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) प्रथम की कोर्ट ने यह कार्रवाई की है। इस मामले में पुलिस द्वारा सुनवाई न करने पर पीडि़त पक्ष को कोर्ट की शरण में जाना पड़ा था।

गाजियाबाद। गैंगरेप में फंसे लोनी नगर पालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन मनोज धामा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस प्रकरण में फरार पूर्व चेयरमैन सहित 6 आरोपियों के खिलाफ अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। इसके अलावा कुर्की की कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) प्रथम की कोर्ट ने यह कार्रवाई की है। इस मामले में पुलिस द्वारा सुनवाई न करने पर पीडि़त पक्ष को कोर्ट की शरण में जाना पड़ा था। बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव परविदर नागर एडवोकेट के मुताबिक कुछ दिन पहले इस सिलसिले में हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया था।

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प्रार्थना पत्र में आरोपियों की गिरफ्तारी गुहार लगाई गई थी। गत 13 जुलाई को हाईकोर्ट ने निचली अदालत को एक साल में मामले का निस्तारण करने के आदेश दिए थे। एसीजेएम (प्रथम) की कोर्ट में लोनी बार्डर थाना पुलिस ने इस संदर्भ में रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में पुलिस ने अवगत कराया कि मनोज धामा समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई, मगर सभी आरोपी फरार चल रहे हैं। इस पर कोर्ट ने फरार आरोपियों के विरूद्ध कुर्की की उद्घोषणा के साथ पुन: गैर जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 23 अगस्त को होनी है।

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यह था मामला…
लोनी बार्डर थानाक्षेत्र निवासी एक महिला ने वर्ष-2019 में इंद्रजीत के खिलाफ दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीडि़ता का आरोप था कि इंद्रजीत को पूर्व चेयरमैन मनोज धामा का संरक्षण मिला है। फरवरी-2019 में पीडि़ता आरोपी की गिरफ्तारी के संदर्भ में जानकारी लेने के लिए पुलिस अधिकारियों के पास पहुंची थी। इसकी जानकारी होने पर पूर्व चेयरमैन मनोज धामा, शोभित मलिक, दीपक धामा, सत्येंद्र चौहान, विकास पंवार और राहुल धामा पीडि़ता के घर पहुंच गए थे। आरोपियों ने पीडि़ता पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाला था। बात न मानने पर मनोज धामा ने सभी साथियों के साथ मिलकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। बाद में कोर्ट के आदेश पर 6 आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। बाद में कोर्ट ने इस रिपोर्ट को निरस्त कर आरोपियों के खिलाफ परिवाद दर्ज किया था।

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