-रीजनल कोर्डिनेटर सुरजीत सिंह एवं जिले के सलाहाकार डॉ. आशुतोष ने निगम में की बैठक
गाजियाबाद। शहरों में बीड़ी, सिगरेट या तंबाकू जैसे उत्पादों को बेचने के लिए दुकानदारों को लाइसेंस लेना होगा। तंबाकू के बढ़ते प्रचलन की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा अब लाइसेंस जारी करने के लिए नगर निगम में कवायद तेज हो गई है। बुधवार को लखनऊ से नगर निगम में पहुंचे रीजनल कोर्डिनेटर सुरजीत सिंह एवं जिले के सलाहाकार डॉ. आशुतोष ने नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एवं लाइसेंस के नोडल अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा के साथ बैठक कर लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर बैठक की। बैठक में तंबाकू के नियंत्रण को लेकर शासन द्वारा कोपटा अधिनियम-2003 के तहत इसकी गतिविधियों एवं लाइसेंस जारी करने को लेकर बैठक की गई। निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा के साथ बैठक कर तंबाकू विक्रेता वेंडरों को लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने अवगत कराया कि शासन के निर्देश के तहत जिले में सभी तंबाकू विक्रेताओं को नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। बिना लाइसेंस के तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट बेचने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। निगम द्वारा सभी 5 जोन से इसके लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने बताया कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। नगर निगम की आगामी कार्यकारिणी बैठक में इसका अनुमोदन कराया जाएगा। जिले में तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ एवं प्रदेश वॉलिन्टरी हेल्थ एसोसिएशन (यूपीवीएचए) लखनऊ द्वारा इस पर संयुक्त रूप से कार्रवाई की जाएगी। रीजनल कोर्डिनेटर सुरजीत सिंह एवं जिले के सलाह कार डॉ. आशुतोष ने बताया कि जिले के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश गुप्ता के साथ चर्चा में जिले के सभी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में तंबाकू के उत्पाद को कोटपा अधिनियम-2003 का उल्लंघन रोकने के लिए इस पर प्रभावी तरीके से कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया हैं। बता दें कि बिना लाइसेंस के बिक्री करते हुए पाए जाने पर पहली बार 2000 रुपये जुर्माना व सामान जब्त कर लिया जाएगा। दूसरी बार 5000 रुपये जुर्माना लिया जाएगा। लाइसेंस लेने वाला केवल भारतीय उत्पाद या केंद्र सरकार के आयत नियमों में आए सामान ही बेच पाएगा। नई व्यवस्था के तहत तंबाकू उत्पाद बेचने वाले दुकानदार टॉफी, कैंडी, चिप्स, बिस्कुट, शीतल पेय जैसे गैर-तंबाकू उत्पाद नहीं बेच सकेंगे। ऐसा बच्चों को तंबाकू उत्पादों की ओर आकर्षित होने से रोकने के लिए किया गया है।
















