-पूर्व चेयरमैन मनोज धामा पर कोर्ट ने दिया था कुर्की का आदेश, भाजपा नेता ने आरोपों को बताया विरोधियों की साजिश
गाजियाबाद। गैंगरेप केस में पिछले करीब डेढ़ साल से फरार लोनी नगर पालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन एवं भाजपा नेता मनोज धामा ने शुक्रवार को एकाएक अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। चल संपत्ति की कुर्की के आदेश होने के बाद मनोज धामा की मुश्किलें और बढ़ गई थीं। कुर्की की कार्रवाई से बचने के लिए धामा सहित 3 आरोपियों के पास कोर्ट में सरेंडर करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था।
लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र की एक महिला ने 2019 में दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में इंद्रजीत को आरोपी बनाया गया था। पीड़िता ने मनोज धामा पर आरोपी को संरक्षण देने का आरोप लगाया था। बाद में महिला ने पुलिस के कुछ अधिकारियों से मुलाकात की थी। उस दौरान आरोपी की गिरफ्तारी की बावत जानकारी ली गई। आरोप है कि पूर्व चेयरमैन मनोज धामा अपने कुछ साथियों के साथ पीड़िता के घर पहुंच गए थे। उस पर शिकायत को वापस लेने का दबाव डाला गया था।
तदुपरांत पीड़िता ने आरोपियों के खिलाफ भी शिकायत की थी। इस प्रकरण में कार्रवाई न होने पर पीड़िता ने कुछ दिन पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खट-खटाया था। हाईकोर्ट ने गत 13 जुलाई को निचली अदालत को एक साल के भीतर इस प्रकरण को निस्तारित करने का आदेश दिया था। बाद में पुलिस ने कोर्ट को अवगत कराया था कि सभी आरोपी फरवरी 2020 से फरार चल रहे हैं। ऐसे में कोर्ट ने सभी आरोपियों के विरूद्ध पहले कुर्की की उदघोषणा और फिर कुर्की के आदेश दे दिए थे।
अधिवक्ता परविंदर नागर के मुताबिक आरोपियों की चल संपत्ति की कुर्की के आदेश कोर्ट ने दिए थे। इसके बाद फरार चल रहे लोनी पालिका लोनी के पूर्व चेयरमैन मनोज धामा, शोभित मलिक व दीपक धामा ने शुक्रवार को एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में सरेंडर कर दिया। तीनों ने अधिवक्ता के जरिए जमानत अर्जी दायर की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके पहले इस केस में आरोपी सत्येंद्र, राहुल और विकास भी कोर्ट में आत्मसमर्पण कर चुके हैं।















