नई दिल्ली। देश में स्वामित्व योजना लागू की गई है। मोदी सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने, भूमि के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और भूमि विवादों को रोकने में मील का पत्थर साबित होगी। गांव-गांव में भूमि का अलग रिकॉर्ड दुरूस्त हो सकेगा। प्रॉपर्टी कार्ड के जरिए ग्रामीण भूमि को बेहिचक बेच और खरीद सकते हैं। उन्हें बैंकों से लोन लेने में भी सुविधा होगी। यानी एक तरह से स्वामित्व योजना गांवों में नए बदलाव लाने में सक्षम रहेगी। इससे भू-माफिया पर भी नकेल लगना तय है। मोदी सरकार द्वारा देशभर लागू स्वामित्व योजना के एक नहीं अनेक लाभ हैं। इसके तहत डेढ़ लाख से ज्यादा लाभार्थियों को प्रॉपर्टी कार्ड भी मिल चुके हैं।
ड्रोन से सर्वे, प्रत्येक घर की जियो टैगिंग
सर्वे ऑफ विलेज एंड मैपिंग विथ इप्रोवाइज्ड टेक्नोलॉजी इन विलेज एरिया यानी स्वामित्व योजना। इस योजना को लागू करने के पीछे मोदी सरकार की सकारात्मक मंशा का लाभ ग्रामीणों को मिलने लगा है। इस योजना के तहत ड्रोन के जरिए सर्वे किया जाता है। सर्वे करने के लिए कई चरण है। पहले जीपीएस ड्रोन की सहायता से एरिया सर्वे किया जाता है। इस सर्वे के जरिए गांव में बने हर घर की जियो टैगिंग होती है। प्रत्येक घर का क्षेत्रफल दर्ज किया जाता है। यह क्षेत्रफल दर्ज करने के बाद प्रत्येक घर को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाती है, जो उस घर का पता भी होता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से लाभार्थी का पूरा पता डिजीटल भी हो जाता है।
जायदाद के झगड़े में आएगी कमी
अब इस योजना के जरिए भूमि जायदाद के झगड़े में कमी आएगी। पहले ग्रामीणों के पास लिखित दस्तावेज नहीं होते थे। पर अब सरकार द्वारा ग्रामीणों को लिखित दस्तावेज मुहैया कराए जाएंगे। सर्वे प्रक्रिया के दरम्यान ग्राम पंचायत के सदस्य, राजस्व विभाग के अधिकारी, गांव के भूमि मालिक तथा पुलिस की टीम मौजूद रहती है, जिससे ग्रामीणों की आपसी सहमति से उन्हें अपने दावे की भूमि दी जा सके। इसके पश्चात दावे वाली भूमि पर निशानदेही की जाती है। भूमि मालिक चूना लगाकर अपने क्षेत्र पर घेरा बना लेता है। इसकी तस्वीर ड्रोन से खींची जाती है। ड्रोन द्वारा यह प्रक्रिया गांव के चक्कर लगाकर पूरी की जाती है। तदुपरांत कंप्यूटर की मदद से भूमि का नक्शा तैयार किया जाता है।
6.62 लाख गांव होंगे कवर
स्वामित्व योजना का मकसद देश के ग्रामीण क्षेत्रों को रिकॉर्ड ऑफ राइट्स देने के लिए संपत्ति कार्ड जारी करना है। इसके अलावा ग्रामीण किसानों की भूमि की ऑनलाइन देख-रेख मुहैया कराना, भूमि की मैपिंग और उनके सही मालिकों को उनका हक दिलाना, भूमि प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना आदि शामिल है। इसके साथ रूरल प्लानिंग के लिए सही लैंड रिकॉर्ड का निर्माण करना भी है। इससे प्रॉपर्टी टैक्स का भी निर्धारण हो सकेगा। देश के 6.62 लाख गांवों को योजना के तहत कवर किया जाएगा।
स्व:रोजगार के लिए सुनहरे अवसर
स्वामित्व योजना भविष्य में ग्रामीणों के लिए स्व:रोजगार के सुनहरे अवसर प्रदान करेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में आमतौर पर ग्रामीणों को अपना रोजगार आरंभ करने या किसी काम के लिए दूसरों से आर्थिक मदद की गुहार लगानी पड़ती है, मगर प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद ऋण या अन्य वित्तीय लाभ लेने के लिए किसान अपनी संपत्ति का उपयोग वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त अब संपत्ति कार्ड के जरिए अपनी प्रॉपर्टी बिना विवाद के बेच और खरीद भी सकते हैं। इससे ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने में काफी मदद मिलेगी।
गांवों को मिलेगी नई उड़ान
मध्य प्रदेश में कुछ दिन पहले स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्ड सौंपने पहुंचे थे। उस समय उन्होंने कहा था कि स्वामित्व योजना केवल कानूनी दस्तावेज देने की योजनाभर नहीं है, जो गांव और मौहल्लों में सर्वेक्षण के लिए उड़ रहा है, वह भारत के गांवों को नई उड़ान देने वाला है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि वह जमाना पीछे छूट गया है जब गरीब को हर काम के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब गरीब के पास सरकार खुद चलकर आ रही है और गरीब को मजबूत कर रही है।
















