जीडीए बोर्ड बैठक में धुलेगा मास्टर प्लान की बदनामी का दाग, शासकीय समिति की आपत्तियों और सुझावों को लेकर रखा जाएगा प्रस्ताव

मास्टर प्लान की अनियमितताओं को लेकर जीडीए अधिकारियों की खूब हुई थी लानत मलानत। अनियमितताओं से घिरे मास्टर प्लान को शासन ने पूरी तरह से खारिज करते हुए तत्कालीन अधिकारियों को चेतावनी देते हुए संशोधित मास्टर प्लान तैयार करने को कहा था। इसे विडंबना ही कहा जाये कि गाजियाबाद शहर के विकास से संबंधित जिस मास्टर प्लान को एक वर्ष पहले स्वीकृति हो जाना चाहिए था वह तत्कालीन अधिकारियों की लापरवाही और गड़बड़ियों की वजह से अभी भी जीडीए और शासन के बीच झूला झूल रहा है। मास्टर प्लान में भू-उपयोग को लेकर ही अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे थे। शासन की उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता कर रहे अपर मुख्य सचिव नितिन रमेश गोकर्ण ने मास्टर प्लान को लेकर जीडीए अधिकारियों को जमकर फटकार भी लगाई थी। लैंडयूज चेंज करने पर भी समिति के सदस्यों ने सवाल खड़े किए। दरअसल नियमों को ठेंगा दिखाकर मास्टर प्लान में पूरी मनमर्जी से लैंडयूज चेंज का खेल खेला गया। लैंडयूज चेंज का खेल बड़े ही निर्भिकता और मनमर्जी से खेला गया। लेकिन शासन के समक्ष पोल खुल गई और जीडीए की खूब किरकिरी हुई। वेब सिटी, इंदिरापुरम सहित कई जगहों पर खुले रूप से अनियमितता हुई। जहां मन हुआ वहा भू-उपयोग व्यावसायिक कर दिया गया और जहां मन हुआ वहां ग्रीन बेल्ट दर्शा दी गई। आरआरटीएस कॉरिडोर के दोनों ओर मिक्स लैंडयूज किया जाना है। लेकिन जीडीए अधिकारियों के खेल के कारण कॉरिडोर के दोनों तरफ बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियां काटी गई। इससे अब इस प्लान को अमलीजामा पहनाने में दिक्कतें आनी तय है। नवनियुक्त जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के समक्ष प्राधिकरण की बेपटरी और चरमराई हुई व्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने के साथ ही मास्टर प्लान की गड़बड़ियों को भी दूर कर जीडीए के बदनामी के दाग को मिटाने की चुनौती है। 

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की आम जनमानस में हुई बदनामी और शासन के समक्ष हुई लानत मलानत के बाद अब मास्टर प्लान की गड़बड़ियों को दूर करने की कवायद शुरू हो गई है। मास्टर प्लान को लेकर जिस तरह बबाल मचा था और जीडीए की कार्य प्रणाली पर सवाल उठे थे, उसे अब दुरुस्त किया जा रहा है। मास्टर प्लान 2031 की अनियमितताओं को लेकर शासन ने जीडीए के तत्कालीन अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी। अनियमितताओं से घिरे मास्टर प्लान को शासन ने पूरी तरह से खारिज करते हुए तत्कालीन अधिकारियों को चेतावनी देते हुए संशोधित मास्टर प्लान तैयार करने को कहा था। संशोधित मास्टर प्लान में भी उन अनियमितताओं को दूर नहीं किया गया, जिसके बाद शासन की शासकीय समिति ने मास्टर प्लान को लेकर आपत्तियां लगाई और गड़बड़ियों को दूर करने को लेकर सुझाव दिया। जीडीए उपाध्यक्ष का चार्ज संभालने के बाद से अतुल वत्स प्राधिकरण की बेपटरी और चरमराई हुई व्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने की कवायद कर रहे हैं। इसमें मास्टर प्लान की गड़बड़ियों को भी दूर करने की चुनौती है। जीडीए की आगामी बोर्ड बैठक में उपाध्यक्ष अतुल वत्स द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार की शासकीय समिति की मास्टर प्लान को लेकर उठाई गई आपत्तियों और सुझावों से संबंधित प्रस्ताव रखा जाएगा। बोर्ड की स्वीकृति के बाद संशोधित मास्टर प्लान शासन को भेजा जाएगा।

ज्ञात हो कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का मास्टर प्लान 2031 विवादों में रहा है। समय से मास्टर प्लान तैयार नहीं कर पाने और मास्टर प्लान में बरती गई अनियमितता को शासन ने गंभीरता से लिया था। मास्टर प्लान को लेकर बीते दिनों लखनऊ में शासकीय समिति की बैठक हुई थी जिसका मिनिट्स जीडीए को भेज दिए गए हैं। समिति द्वारा लगाई गई आपत्ति एवं दिए गए सुझाव के तहत ही मास्टर प्लान में इन आपत्ति को दूर कर और दिए गए सुझाव के अनुसार इसे अगले माह जुलाई में प्रस्तावित जीडीए बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। शासकीय समिति की बैठक में गड़बड़ी मिलने की वजह से आपत्ति और सुझाव के साथ इसे लौटा दिया था। मास्टर प्लान की गड़बड़ी का मामला संज्ञान में आने के बाद नवनियुक्त उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने चीफ आर्किटेक्ट टाउन प्लान अजय कुमार सिंह और अरविंद कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था। इसे विडंबना ही कहा जाये कि गाजियाबाद शहर के विकास से संबंधित जिस मास्टर प्लान को एक वर्ष पहले स्वीकृति हो जाना चाहिए था वह तत्कालीन अधिकारियों की लापरवाही और गड़बड़ियों की वजह से अभी भी जीडीए और शासन के बीच झूला झूल रहा है।

समिति के समक्ष नियोजन अनुभाग की ओर से जो पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया गया और प्रिंट में जो कागजात थे, इन दोनों में भिन्नता पाई गई। उच्च स्तरीय समिति ने मास्टर प्लान में भू-उपयोग तय करने व अन्य मानकों पर जब सवाल पूछे तो जीडीए अधिकारी कोई जवाब नहीं दे पाए थे। विदित हो कि भू उपयोग को लेकर ही अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे थे। शासन की उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता कर रहे अपर मुख्य सचिव नितिन रमेश गोकर्ण ने मास्टर प्लान को लेकर जीडीए अधिकारियों को जमकर फटकार भी लगाई थी। लैंडयूज चेंज करने पर भी समिति के सदस्यों ने सवाल खड़े किए। दरअसल नियमों को ठेंगा दिखाकर मास्टर प्लान में पूरी मनमर्जी से लैंडयूज चेंज का खेल खेला गया। जीडीए बोर्ड सदस्य पवन गोयल ने गोल्फ लिंक सोसायटी की 45 मीटर चौड़ी सड़क को खत्म करने का मामला उठाया था। लेकिन, जीडीए के अधिकारियों ने उनकी आपत्ति को ही दरकिनार कर सड़क को खत्म कर दिया था।  आरआरटीएस कॉरिडोर के दोनों ओर मिक्स लैंडयूज किया जाना है।

लेकिन जीडीए अधिकारियों के खेल के कारण आरआरटीएस कॉरिडोर के दोनों तरफ बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियां काटी गई। इससे अब इस प्लान को अमलीजामा पहनाने में दिक्कतें आनी तय है। लैंडयूज चेंज का खेल बड़े ही निर्भिकता और मनमर्जी से खेला गया। लेकिन शासन के समक्ष पोल खुल गई और जीडीए की खूब किरकिरी हुई। वेब सिटी, इंदिरापुरम सहित कई जगहों पर खुले रूप से अनियमितता हुई। जहां मन हुआ वहा भू-उपयोग व्यावसायिक कर दिया गया और जहां मन हुआ वहां ग्रीन बेल्ट दर्शा दी गई। सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने मनमाने तरीके से भू-उपयोग परिवर्तित करने, आवासीय व अन्य भू-उपयोग को व्यावसायिक में परिवर्तित करने व पूर्व में दशार्यी गई महागुनपुरम व लैंडक्रॉफ्ट के बीच की 45 मीटर चौड़ी रोड को खत्म करने व अन्य रोड को खत्म करने और मानक के अनुरूप मास्टर प्लान-2031 का ड्राफ्ट तैयार न होने पर कड़ी आपत्ति लगाई थी। इसमें संशोधन के सुझाव दिए गए थे। बता दें कि मास्टर प्लान-2031 की पहले डेडलाइन 23 जनवरी 2023 थी। इसमें पहले ही लगभग डेढ़ साल की देरी हो चुकी है। बोर्ड बैठक से तीन बार ड्रॉफ्ट को वापस कर दिया गया। शासकीय समिति के लौटाने के बाद अब फिर से इसे जीडीए बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।