निजीकरण की नीति के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने भरी हुंकार

विरोध प्रदर्शन कर केन्द्र और राज्य सरकारों की नितियों का किया विरोध

गाजियाबाद। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की जिला इकाई ने निजीकरण की नीति के विरोध में गुरूवार को धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट को निरस्त करने की पुरजोर मांग की। निजीकरण की प्रक्रिया वापस न लिए जाने पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी गई। केंद्र और राज्य सरकारों की निजीकरण की नीति के विरोध में यह कार्यक्रम किया गया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के जिला संयोजक अवधेश कुमार ने बताया कि कोविड-19 (कोरोना वायरस) के बीच केंद्र और कुछ राज्य सरकारें विद्युत वितरण का निजीकरण करने पर तुली हैं। यह कतई उचित नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने विद्युत उपभोक्ताओं खासकर किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं से निजीकरण विरोधी आंदोलन में सहयोग करने की अपील की। कहा गया कि निजीकरण के बाद सर्वाधिक नुकसान आम उपभोक्ता को होगा। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट के अनुसार लागत से कम मूल्य पर किसी को भी बिजली नहीं दी जाएगी। इसके अलावा सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी। वर्तमान में बिजली की लागत लगभग 7.90 रुपए प्रति यूनिट है। कंपनी एक्ट के अनुसार निजी कंपनियों को कम से कम 16 प्रतिशत मुनाफा लेने का अधिकार होगा। नतीजन 10 रुपए प्रति यूनिट से कम दाम पर किसी भी उपभोक्ता को बिजली नहीं मिलेगी। उन्होंने बताया कि स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉकुमेंट के अनुसार निजी कंपनियों को डिस्कॉम की परिसंपत्तियां कौडिय़ों के दाम सौंपी जानी है, इतना ही नहीं तो सरकार डिस्कॉम की सभी देनदारियों व घाटे को खुद अपने ऊपर ले लेगी और निजी कंपनियों को क्लीन स्लेट डिस्कॉम दी जाएगी। निजीकरण के सरकार के दस्तावेज के अनुसार सरकार बाजार से महंगी बिजली खरीद कर निजी कंपनियों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराएगी, जिससे उन्हें घाटा न हो। नई नीति के अनुसार डिस्कॉम के 100 प्रतिशत शेयर बेंचे जाने है और सरकार का निजीकरण के बाद कर्मचारियों के प्रति कोई दायित्व नहीं रहेगा। कर्मचारियों को निजी क्षेत्र के रहमोकरम पर छोड़ दिया जाएगा। केरल के केएसईबी लिमिटेड की तरह उत्तर प्रदेश मेंंं भी सभी ऊर्जा निगमों का एकीकरण कर यूपीएसईबी लिमिटेड का गठन किया जाए, निजीकरण और फ्रेंन्चाईजी की समस्त प्रक्रिया निरस्त की जाए और ग्रेटर नोएडा का निजीकरण व आगरा का फ्रेंन्चाइजी करार रद्द किया जाए, सभी बिजली कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली लागू की जाए, तेलंगाना की तरह ऊर्जा निगमों में कार्यरत सभी संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए और नियमित पदों पर नियमित भर्ती की जाए, सभी संवर्गों की वेतन विसंगतियों का निराकरण किया जाए और पूर्व की भांति सभी संवर्गों को तीन पदोन्नति पद के समयबद्ध वेतनमान दिए जाएं। इस अवसर पर अनिल चौरसिया, आलोक त्रिपाठी, अमन नौटियाल, अंशुल, उमेश, शेर सिंह, धीरज, राज सिंह, विजय शर्मा, योगेंद्र लाखा, राम नारायण व सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।