गरीब बेटी की शादी में एक नई राह पगडंडियां फाउंडेशन ने किया सहयोग

समाज को अपना नजरिया बदलने की जरूरत: शालू पाण्डेय

गाजियाबाद। भले ही हमारे देश ने कितनी तरक्की कर ली हो, पर आज भी समाज में बेटियों को बोझ समझा जाता है। गरीब माता-पिता बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाने में संकोच करते हैं और यदि गरीब परिवार की होनहार बिटिया अपने बूते उच्च शिक्षा ग्रहण करने में कामयाब हो भी जाती है तो परिजनों को बिटिया की शादी करने की ङ्क्षचता हमेशा सताती रहती है। कुछ बच्चियां गरीबी की वजह से शिक्षा भी नहीं ले पातीं। ऐसे ही गरीब और जरूरतमंद परिवार की बेटियों की शादी में सहयोग करने का बीड़ा एक नई राह पगडंडियां फाउंडेशन की अध्यक्ष शालू पाण्डेय ने उठाया है। शालू पाण्डेय अब तक 300 से अधिक गरीब बेटियों की शादी सहयोग कर चुकीं हैं। शालू पाण्डेय कहती हैं कि महिला होने पर सबसे पहला दायित्व घर-परिवार की जिम्मेदारी संभालने की होती है।

उसके बाद ही समाज सेवा के बारे में उनके जैसी अधिकतर महिलाएं सोचती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए शालू पाण्डेय ने पहले पारिवारिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया और अब 3 साल से इलाके में रहने वाले जरूरतमंद गरीब परिवार के बेटियों की शादी सहयोग कर रही हैं।
शालू पाण्डेय परिवार के सहयोग से समाज सेवा में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। गरीब माता-पिता को हमेशा लगता है कि यदि बेटी ने पढ़ाई कर ली तो शादी करना और भी चुनौतीपूर्ण होगा। कोई भी पढ़ा-लिखा लड़का बिना मोटी रकम लिए शादी नहीं करेगा। इसी मिथ्या को तोडऩे के लिए शालू पाण्डेय ने कमर कसी और उन गरीब बच्चियों की शादी का बीड़ा उठाया, जिनकी गरीबी के कारण शादी होने में दिक्कतें हो रही थी। हालांकि, वे मानती हैं कि समाज को अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। शालू पाण्डेय ने बताया कि कुछ दिन पूर्व क्षेत्र के ही एक माता पिता बेटी का शादी का निमत्रंण देने आए, लेकिन निमत्रंण के दौरान उन्होने अपनी आपबीती सुनाई। उनकी आप बीती सुनने के बाद एक नई राह पगडंडियां फाउंडेशन की अध्यक्ष शालू पाण्डेय ने बेटी की शादी में डबल बेड, सिलाई मशीन,रजाई कंबल, गद्दे, 11 साड़ी, दो सूट, दो बेडशीट,
चुनरी सिंगार का सामान भेंट किया और बेटी को आर्शीवाद दिया। उन्होने बताया कि वह इन कार्यो के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी वर्षो से गरीब बच्चों की पढाई में सहयोग कर रही है। इसके अलावा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण दे रही है। शालू पाण्डेय ने बताया हमारे आसपास हमेशा एक बात कही जाती है कि पुरुष प्रधान समाज है, लेकिन आज समाज में महिलाएं हर वर्ग में आगे बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। शायद ही कोई क्षेत्र बचा हो, जहां तक महिलाओं की पहुंच न हो। आज कई ऐसे संस्थान हैं, जिसको माध्यम वर्ग की महिलाएं भलीभांति तरीके से संचालित कर रही हैं। वक्त बदल रहा है। समाज के लोगों को महिलाओं को अबला, कमजोर और निम्नतर आंकने की भूल नहीं करनी चाहिए।
इस कार्य में डॉ अरुण कुमार पांडेय, हेमा शर्मा, प्रतिमा, शशि शर्मा, अरुणा चतुर्वेदी, रिचा, स्वाति श्रीवास्तव, प्रीति, पूजा, पारुल शर्मा, अलका,आदित्य गुप्ता,मोना जैन, नीसीमा ने भी अपना पूर्ण सहयोग दिया।