उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मुरादनगर जनपद में एक युवा की थाने के ठीक सामने गोली मारकर हत्या ने पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता और खाकी की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। युवा पर रात करीब 12 बजे अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब वह थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराने आया था। इस भयानक घटना के बाद थाने की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। रवि शर्मा, 35 वर्षीय, निवासी गाँव मिल्क रावली, भाकियू-भानू गुट का सक्रिय कार्यकर्ता था। वह गुरुवार रात लगभग 7:45 बजे अपने घर लौट रहा था, तब गांव के ही मोंटी और अजय उर्फ मिनी से इसकी कार हटाने को लेकर विवाद हुआ। रात करीब 8:45 बजे आरोपियों ने रवि के घर के बाहर फायरिंग भी की थी, जिसमें गेट पर गोली लगी। इसके बाद रवि थाने पहुंचकर रात्रि अधिकारी से शिकायत दर्ज कराने के प्रयास में था। रात्रि करीब 12 बजे आरोपियों ने थाने के सामने उसकी पीठ में ताबड़तोड़ 4 गोलियां मारीं।
इसके बाद वह राहीन बुरी तरह घायल होकर गेट पर गिर गया। उसे तत्काल निकटतम अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हत्या की खबर फैलते ही रवि के परिजन और ग्रामीण थाने के बाहर शव रखकर रोड जाम करने पर उतर आए। आरोपियों के खिलाफ हत्यारों की तलाश, मजिस्ट्रियल कार्रवाई और उनके मकानों पर बुलडोजर चलाने की मांग उठने लगी। भारी पुलिसबल के साथ विधायक अजीतपाल त्यागी और पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचे तो जमकर हंगामा हुआ। डीसीपी (ग्रामीण) सुरेंद्र नाथ तिवारी ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शन लगातार दो घंटे तक चलता रहा। पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ ने मुरादनगर थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह तोमर, रात्रि अधिकारी सूबे सिंह और बीपीओ मोहित सिंह को निलंबित कर दिया। उनकी कार्यप्रणाली और सुरक्षा की कमी से घटना को बढ़ावा मिलने का संदेह जाहिर किया गया है।
साथ ही एडिशनल पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था आलोक प्रियदर्शी के नेतृत्व में 3 विशेष दबिश टीमें गठित की गई हैं, जो लगातार आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए इलाके में सक्रिय हैं। मामले में दर्ज ऐसे आरोप हैं कि मोंटी हाल ही में दुष्कर्म के मामले में जेल से जमानत पर लौटकर आया था। पुलिस अब इन दोनों और संभावित अन्य सहयोगियों की तलाश में दबिश दे रही है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के आदेश पर थानाध्यक्ष और दो पुलिसकर्मियों के निलंबन से यह स्पष्ट हो गया है कि पुलिस की जवाबदेही अब अनिवार्य हो चुकी है। स्थानीय नेता-पुलिस अधिकारियों की यह कार्रवाई एक बड़े संदेश की ओर इशारा करती है कि थाने और सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी माफ नहीं होगी। शहर में लगातार बदमाशों के हौंसले बुलंद होने की आंशंका जताई जा रही है। मुरादनगर की यह घटना केवल एक अपराध ही नहीं, बल्कि थाने के सामने अराजकता और पुलिस के डर का परिणाम है। अब यह स्पष्ट दिखता है कि प्रशासन को जल्द नीचे तक भरोसे का माहौल बनाए रखना होगा, अन्यथा बदमाशों की मनमानी शहर के लिए एक सामाजिक चुनौती बन जाएगी।















