रेड मॉल पर जीडीए की पहल, दो कंपनियों ने खरीद को लेकर रखा प्रस्ताव

• एनसीएलटी से मिली कानूनी जीत के बाद तेज़ हुई कार्रवाई, जीडीए को 217 करोड़ की वसूली का अधिकार
• एनबीसीसी और साक्षी फिनकैप ने प्रेजेंटेशन में दी विस्तृत परियोजना रूपरेखा
• जीडीए की मूल्यांकन समिति करेगी प्रस्तावों का तुलनात्मक विश्लेषण
• उपाध्यक्ष अतुल वत्स के निर्देशन में पूरी प्रक्रिया को मिल रही कानूनी मजबूती

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। वर्षों से विवादों में घिरी रेड मॉल प्रॉपर्टी को लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने बड़ा कदम उठाते हुए खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार को जीडीए मुख्यालय में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड और साक्षी फिनकैप प्राइवेट लिमिटेड ने रेड मॉल संपत्ति खरीदने को लेकर अपना विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। दोनों कंपनियों ने परियोजना के पुनरुद्धार की रूपरेखा, अनुमानित लागत और आर्थिक संभावनाओं को विस्तार से जीडीए के समक्ष प्रस्तुत किया। बैठक में जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स की अध्यक्षता में दोनों फर्मों के प्रस्तावों पर तकनीकी और वित्तीय दृष्टिकोण से चर्चा की गई। उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि जीडीए की मूल्यांकन समिति दोनों प्रस्तावों का तुलनात्मक विश्लेषण करेगी और यह तय करेगी कि किस फर्म का प्रस्ताव प्राधिकरण और शहर के हित में अधिक लाभकारी है।

रेड मॉल की यह संपत्ति खसरा संख्या 352, 353, 354, 355, 358, 371, 372 पर स्थित है, जिसे लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। लेकिन अब इस पूरे मामले में जीडीए को कानूनी सफलता प्राप्त हो चुकी है। राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), नई दिल्ली की पीठ द्वारा 22 जनवरी को पारित आदेश में जीडीए को फाइनेंशियल क्रेडिटर का दर्जा दिया गया है। इस आदेश के तहत 217 करोड़ 18 लाख 66 हजार 407 रुपये की बकाया राशि, जो 28 फरवरी 2022 तक बिल्डर पर देय थी, अब वैधानिक रूप से जीडीए की वसूली योग्य है। उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने बताया कि इस मुकदमे में जीडीए अधिकारियों की निरंतर उपस्थिति और मजबूत पैरवी ने अहम भूमिका निभाई। एनसीएलटी में हर सुनवाई को गंभीरता से लेकर केस की प्रगति पर नियमित समीक्षा की गई।

अब, जब जीडीए को कानूनी आधार पर संपत्ति पर अधिकार मिल चुका है, तो अगला कदम उसे व्यावसायिक और विकासपरक दृष्टिकोण से उपयोग में लाने का है। जिस तरह से दो बड़ी कंपनियों ने आगे आकर निवेश की इच्छा जताई है, उससे संकेत मिलते हैं कि रेड मॉल परियोजना अब ठहराव से निकलकर नए सिरे से विकसित हो सकती है। जीडीए की रणनीति इस विवादित प्रॉपर्टी को आर्थिक पुनर्जीवन देने की है, जिससे शहर को बेहतर कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिले और प्राधिकरण को अपनी बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित हो सके। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार चलता है, तो गाजियाबाद को एक नया और आधुनिक व्यापारिक केंद्र मिल सकता है।