शतरंज की बिसात पर चमका गाजियाबाद का सितारा अक्षित शर्मा

– प्रथम सेंट एंड्रयूज अंडर-15 शतरंज टूर्नामेंट में हासिल किया द्वितीय उपविजेता का खिताब

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शतरंज की बिसात पर गोटियों के बीच दांव-पेंच जितना कठिन होता है, उतना ही जीवन में भी सही चाल चलना जरूरी है। गाजियाबाद के डीपीएस पब्लिक स्कूल मेरठ रोड के कक्षा 9 के छात्र अक्षित शर्मा ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, धैर्य और लगन से कम उम्र में भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं। शनिवार को सेंट एंड्रयूज वर्ल्ड स्कूल, शक्ति खंड-4, इंदिरापुरम में आयोजित प्रथम सेंट एंड्रयूज अंडर-15 शतरंज टूर्नामेंट में अक्षित ने अपने अद्भुत प्रदर्शन से सबको चौंकाते हुए द्वितीय उपविजेता का खिताब अपने नाम कर लिया।
इस टूर्नामेंट में दिल्ली-एनसीआर के नामी स्कूलों से करीब 170 प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया था। अंडर-8, अंडर-11, अंडर-13 और अंडर-15 वर्गों में प्रतियोगिता आयोजित हुई। अंडर-15 वर्ग में 36 धुरंधर खिलाड़ी अपनी काबिलियत साबित करने उतरे थे, लेकिन अक्षित ने अपने शानदार कौशल और सूझबूझ भरे दांवों से सबका दिल जीत लिया। उनकी रणनीतियाँ इतनी सटीक थीं कि कई बार निर्णायक भी हैरान रह गए। महज 14 साल की उम्र में अक्षित ने अपने से बड़े खिलाडिय़ों को मात देकर यह साबित कर दिया कि असली विजेता वही है, जो धैर्य और संयम से खेलकर हर परिस्थिति को अवसर में बदलना जानता है।

अक्षित की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान है। उनकी मां प्रीति शर्मा स्वयं एक गृहणी हैं, जिन्होंने अक्षित को पढ़ाई और खेल दोनों में अनुशासन और मेहनत का महत्व सिखाया। वहीं पिता मनोज शर्मा हमेशा जीवन में संघर्षों के बावजूद उत्साह और आत्मबल बनाए रखने की प्रेरणा देते रहे हैं। माता-पिता के मार्गदर्शन और आशीर्वाद ने ही अक्षित को शतरंज की बिसात पर आत्मविश्वास और धैर्य के साथ खेलने की शक्ति दी है। अक्षित की इस उपलब्धि पर उनके स्कूल के शिक्षकों और सहपाठियों में भी खुशी की लहर है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि अक्षित ने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे गाजियाबाद का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि आने वाले समय में उनके बड़े सपनों की ओर पहला कदम है।

उनकी लगन और जिज्ञासा को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वे निकट भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहराएँगे। अक्षित खुद कहते हैं कि शतरंज उनके लिए सिर्फ खेल नहीं बल्कि जीवन की सीख है। यह खेल उन्हें धैर्य, आत्मविश्वास और सही समय पर सही निर्णय लेने की कला सिखाता है। उनका मानना है कि जीत-हार से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हर खेल हमें कुछ नया सिखाकर आगे बढऩे का रास्ता दिखाता है।
गाजियाबाद के इस नन्हें सितारे ने यह दिखा दिया है कि अगर सपनों को पूरा करने का जज्बा हो, मेहनत की लगन हो और परिवार का साथ हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं। अक्षित शर्मा की यह जीत सिर्फ एक टूर्नामेंट की उपलब्धि नहीं, बल्कि यह आने वाले उज्ज्वल भविष्य की झलक है।

परिवार से मिली सीख और प्रेरणा
अक्षित की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का अहम योगदान है। उनकी मां प्रीति शर्मा, जो स्वयं एक गृहणी हैं, ने उन्हें पढ़ाई और खेल दोनों में अनुशासन, धैर्य और निरंतर अभ्यास का महत्व सिखाया। वहीं उनके पिता मनोज शर्मा ने हमेशा यह समझाया कि जीवन की हर मुश्किल चुनौती का सामना उत्साह और आत्मबल के साथ करना चाहिए। यही प्रेरणा अक्षित को शतरंज की बिसात पर भी धैर्य और साहस के साथ खेलने की शक्ति देती है।

शहर का नाम रोशन करने वाला सितारा
अक्षित की इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके स्कूल और परिवार, बल्कि पूरे गाजियाबाद का नाम रोशन किया है। डीपीएस पब्लिक स्कूल के शिक्षकों और सहपाठियों ने उनकी इस जीत को बड़ी उपलब्धि बताया और विश्वास जताया कि अक्षित आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता का परचम लहराएँगे।

अक्षित की सोच-“हर चाल में छुपा है एक सबक”
अक्षित का मानना है कि शतरंज जीवन जैसा है-जहाँ हर चाल सोच-समझकर चलनी पड़ती है। वे कहते हैं कि शतरंज मुझे धैर्य, आत्मविश्वास और समय का सही उपयोग करना सिखाता है। हार या जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि हर खेल हमें कुछ नया सिखाता है।