महायोजना-2031: गाजियाबाद के विकास की नई इबारत, जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के प्रयासों से 7 साल बाद मिली स्वीकृति

• अब शहर को मिलेगी नई दिशा और नई पहचान: अतुल वत्स
• जीआईएस और सैटेलाइट इमेजिंग से तैयार हुआ मास्टर प्लान
• 66 लाख आबादी को ध्यान में रखकर बनी विकास की रूपरेखा
• डीएमई और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर नए इंडस्ट्रियल एरिया
• टीओडी जोन में एफएआर बढ़कर 5, मिलेगा विकास को नया आयाम
• राजनगर एक्सटेंशन में 450 करोड़ का आधुनिक क्रिकेट स्टेडियम

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। सात साल की लंबी मेहनत और लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार गाजियाबाद, लोनी और मोदीनगर-मुरादनगर की बहुप्रतीक्षित महायोजना-2031 को शासन की अंतिम स्वीकृति मिल गई है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2018 से इसकी रूपरेखा तैयार करना शुरू किया था। इसके बाद प्रदेश स्तर पर गहन मंथन, सुधारात्मक सुझाव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स द्वारा प्रस्तुतिकरण के बाद इसे हरी झंडी मिली है। इस स्वीकृति ने न केवल गाजियाबाद बल्कि पूरे जिले के विकास का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
महायोजना-2031 पूरी तरह से आधुनिक तकनीक पर आधारित है। पहली बार गाजियाबाद के विकास की इस योजना को ज्योग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) तकनीक से तैयार किया गया है, जो इसे और अधिक व्यवहारिक तथा भविष्य उन्मुख बनाती है। इस योजना में अनुमानित 66 लाख की आबादी को ध्यान में रखते हुए भूमि उपयोग का स्पष्ट खाका तैयार किया गया है। इसमें जहां औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार पर बल दिया गया है, वहीं आवासीय, व्यावसायिक और हरित क्षेत्र के संतुलित विकास का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

गाजियाबाद के लिए यह योजना रोजगार और निवेश का नया द्वार भी खोलने जा रही है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के किनारे नए औद्योगिक क्षेत्रों का प्रस्ताव रखा गया है। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स का कहना है कि इन क्षेत्रों के विकसित होने से प्रदेश की ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी में गाजियाबाद एक बड़ी भूमिका निभाएगा। इससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा और जिले में निवेशक भी आकर्षित होंगे। महायोजना में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति को विशेष महत्व दिया गया है। मेट्रो और नमो भारत ट्रेन कॉरिडोर के आसपास ऊंची इमारतें, व्यवसायिक केंद्र और आधुनिक आवासीय परियोजनाओं के विकास का रास्ता खोला गया है। मेट्रो ट्रेन रूट के 500-500 मीटर दायरे और नमो भारत ट्रेन के 1.5 किलोमीटर दायरे में फ्लोर एरिया रेश्यो को 1.5 से बढ़ाकर 5 तक कर दिया गया है, जिससे यहां तेज़ी से बहुआयामी विकास संभव होगा। योजना के अंतर्गत राजनगर एक्सटेंशन में 450 करोड़ की लागत से क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण पीपीपी मॉडल पर किया जाएगा।

मनोरंजन और खेल को बढ़ावा देने के लिए यह कदम गाजियाबाद को नई पहचान देगा। इसके अलावा जिले में 20 फीसदी भूमि हरित क्षेत्र के रूप में सुरक्षित की गई है ताकि प्रदूषण पर अंकुश लगे और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखा जा सके। इस योजना से गाजियाबाद, लोनी और मोदीनगर-मुरादनगर के हर वर्ग को लाभ मिलेगा। उद्योगों को नई जमीन और अवसर, युवाओं को रोजगार, नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं और बच्चों को खेल व मनोरंजन का नया आधार मिलेगा। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने कहा कि महायोजना-2031 सिर्फ एक दस्तावेज नहीं बल्कि गाजियाबाद की आने वाली पीढिय़ों के लिए विकास का रोडमैप है। इसके लागू होने से गाजियाबाद पूरे उत्तर प्रदेश में विकास और निवेश का केंद्र बनेगा।

महायोजना-2031 के लागू होने के साथ ही गाजियाबाद की तस्वीर बदलने जा रही है। यहां के नागरिकों को जहां बेहतर जीवनस्तर मिलेगा, वहीं औद्योगिक और निवेश गतिविधियों के चलते यह शहर प्रदेश की आर्थिक प्रगति का अहम हिस्सा बनेगा। यह योजना गाजियाबाद को भविष्य में एक आधुनिक, औद्योगिक और पर्यावरण संतुलित स्मार्ट सिटी के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर के आसपास ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट नीति लागू की जाएगी, जिससे आधुनिक आवासीय व व्यावसायिक परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही 20 फीसदी भूमि को हरित क्षेत्र के लिए सुरक्षित रखा गया है, ताकि प्रदूषण पर रोक लगाई जा सके और आने वाली पीढिय़ों को स्वच्छ वातावरण मिल सके

भू-उपयोग में 27.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी

महायोजना-2021 की तुलना में महायोजना-2031 में विभिन्न भू-उपयोग श्रेणियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
• आवासीय क्षेत्र – 11119.24 हेक्टेयर से बढ़कर 12869.32 हेक्टेयर (15.74% वृद्धि)
• औद्योगिक क्षेत्र – 3074.89 हेक्टेयर से बढ़कर 3531.15 हेक्टेयर (14.84% वृद्धि)
• मनोरंजन क्षेत्र – 3972.39 हेक्टेयर से बढ़कर 6032.44 हेक्टेयर (51.86% वृद्धि)
• परिवहन क्षेत्र – 2481.71 हेक्टेयर से बढ़कर 4120.95 हेक्टेयर (27.69% वृद्धि)
कुल मिलाकर महायोजना-2021 के 25099.46 हेक्टेयर क्षेत्रफल की तुलना में महायोजना-2031 में 32017.81 हेक्टेयर क्षेत्रफल को शामिल किया गया है।

निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
योजना में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के किनारे नए औद्योगिक क्षेत्रों का प्रस्ताव रखा गया है। इससे जनपद में निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष औद्योगिक जोन विकसित किए जाएंगे।

टीओडी नीति से मिलेगा विकास को नया आयाम
महायोजना में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति को प्रमुखता दी गई है। इसके तहत फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) 1.5 से बढ़ाकर 5.0 कर दिया गया है। मेट्रो ट्रेन कॉरिडोर के 500-500 मीटर और नमो भारत ट्रेन के 1.50 किलोमीटर दायरे में उच्च एफएआर मिलेगा। इससे बड़े पैमाने पर आवासीय, व्यावसायिक और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों को गति मिलेगी।

आवासीय व व्यावसायिक ढांचे में इजाफा
महायोजना-2031 के लागू होने से गाजियाबाद जिले में निवेश के साथ आवासीय मकानों का भी विस्तार होगा। जीडीए को नक्शा पास कराने और राजस्व बढ़ाने का लाभ मिलेगा। वहीं, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के अंतर्गत जिले को औद्योगिक मजबूती प्रदान करने का भी लक्ष्य रखा गया है।

हरी झंडी के साथ हरित क्रांति
महायोजना-2031 में 15-15 फीसदी आवासीय और व्यवसायिक जमीन के साथ 20 फीसदी भूमि हरित क्षेत्र (ग्रीनरी) के लिए सुरक्षित की गई है। इससे प्रदूषण पर अंकुश लगाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

खेल और मनोरंजन को भी मिलेगी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार राजनगर एक्सटेंशन में 450 करोड़ की लागत से क्रिकेट स्टेडियम पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही मनोरंजन के लिए भी नए पार्क, सार्वजनिक स्थल और सुविधाएं विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

अतुल वत्स, उपाध्यक्ष, जीडीए

महायोजना-2031 गाजियाबाद की आने वाली पीढिय़ों को बेहतर जीवनस्तर, रोजगार और सुरक्षित भविष्य देने वाली योजना है। यह केवल नक्शा नहीं बल्कि गाजियाबाद की नई पहचान गढऩे का संकल्प है। प्राधिकरण पूरी प्रतिबद्धता के साथ इसे लागू करेगा।
अतुल वत्स, उपाध्यक्ष, जीडीए