सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर किसानों का जमावड़ा
नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन शुक्रवार को 16वें दिन भी जारी रहा। दिल्ली के सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर किसानों ने सरकार के खिलाफ फिर हुंकार भरी है। उन्होंने दोहराया कि तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने चाहिए। उधर, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि किसानों से बातचीत के रास्ते खुले हैं। सभी समस्याओं पर सरकार विचार कर रही है। दिल्ली में सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर पिछले 16 दिनों से किसानों का जमावड़ा है। कृषि कानूनों के खिलाफ वह आंदोलनरत हैं। सरकार के साथ कई दौर की वार्ता होने के बावजूद समस्या जस की तस है। इस बीच कृषि मंत्री ने कहा है कि बातचीत के सभी रास्ते खुले हैं। समस्याओं पर विचार हो रहा है। सरकार पर दबाव बनाने को किसानों ने 8 दिसम्बर को भारत बंद का आह्वान किया था। भारत बंद का कार्यक्रम 4 घंटे का था। भारत बंद आंदोलन समाप्त होने के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने 13 किसान प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया था। इस वार्ता में पंजाब से 8 किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। जबकि 5 प्रतिनिधि देश के अलग-अलग राज्यों से थे। गृहमंत्री के साथ किसानों की वार्ता असफल रही थी। इसके पहले किसानों ने सरकार से प्रस्ताव की मांग की थी। इसके मदद्ेनजर सरकार ने प्रस्ताव भेज दिया था। प्रस्ताव में नए कृषि कानूनों में संभावित संशोधन का जिक्र किया गया था, मगर किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने साफ कहा कि तीनों कृषि कानून निरस्त होने तक आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, मंडी सिस्टम में किसानों को सहूलियत देने और प्राइवेट प्लेयर्स पर टैक्स लगाने की बात की है। उधर, सिंघु बॉर्डर पर बड़ी संख्या में किसानों के डटे रहने से सरकार की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। किसानों ने चेतावनी दे रखी है कि यदि कोई समुचित निष्कर्ष नहीं निकल पाता है तो वह बैरिकेड को तोड़कर दिल्ली में प्रवेश करने को मजबूर होंगे।
















