-एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तकनीकी जांच में रडार और नेविगेशन सिस्टम का परीक्षण किया गया
-नोएडा एयरपोर्ट से एयर कार्गो संचालन के नए अवसर, रेडीमेड गारमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात आसान होगा
-औद्योगिक और व्यवसायिक गतिविधियों को मिलेगा बल, नए हवाई संपर्क से उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर शुक्रवार को कैलिब्रेशन फ्लाइट सफलतापूर्वक उतरी और उड़ान भरी। इसके जरिये एयर नेविगेशन एवं कम्युनिकेशन सिस्टम्स की जांच की गई। विमान के डेटा कई एंगल और अलग-अलग ऊंचाई से रिकार्ड किए गए। अब अगले सप्ताह फिर ट्रायल होगा। नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट जेवर पर शुक्रवार को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की कैलिब्रेशन फ्लाइट उतरी। एयरपोर्ट पर विमान कई एंगल और अलग-अलग ऊंचाई पर गया और वहां से डाटा रिकार्ड किया गया। यह देखा गया कि सभी उपकरण काम कर रहे हैं या नहीं। शाम तक कई बार इस तरह के परीक्षण किए गए। कैलिब्रेशन फ्लाइट अनिवार्य जांच है जो एयरपोर्ट व विमानन उपकरणों की सटीकता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है।
अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि इस परीक्षण के बाद प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। कैलिब्रेशन फ़्लाइट का पहले दो दिन का शेड@यूल था। पहले दिन मौसम खराब होने की वजह से यह परीक्षण नहीं हुआ था। शुक्रवार को नोएडा एयरपोर्ट के रनवे एक छोर की ओर परीक्षण किया गया। अगले सप्ताह रनवे के दूसरे छोर पर परीक्षण किया जाएगा।
कैलिब्रेशन फ्लाइट एक अनिवार्य परीक्षण है जो हवाई अड्डों और विमानन उपकरणों की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य एयर नेविगेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम्स जैसे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और रडार की जांच करना होता है। इसके लिए विशेष रूप से सुसज्जित विमान निर्धारित पैटर्न में उड़ान भरते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ज़मीनी नेविगेशन उपकरण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप काम कर रहे हैं। किसी भी हवाई अड्डे को संचालन की अनुमति देने से पहले इन उड़ानों का पूरा होना बेहद आवश्यक होता है।
कैलिब्रेशन फ्लाइट के प्रमुख पहलू
ज़मीनी नेविगेशन और कम्युनिकेशन उपकरणों की सटीकता की जांच और प्रमाणन करना ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन जैसे संगठनों द्वारा निर्धारित अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन कर रहे हैं। इसमें प्री-कैलिब्रेशन ब्रीफिंग, फ्लाइट इंस्पेक्शन और डेटा एनालिसिस शामिल होते हैं। विमान विभिन्न ऊँचाइयों और कोणों पर उड़ान भरते हुए प्रत्येक सिस्टम से डेटा रिकॉर्ड करते हैं। इसमें विशेष रूप से सुसज्जित विमान शामिल होते हैं जिनमें अत्यधिक संवेदनशील उपकरण लगे होते हैं। इन्हें आमतौर पर दो पायलटों और एक फ्लाइट इंस्पेक्टर द्वारा उड़ाया जाता है। उड़ान के दौरान एकत्र किए गए डेटा का विश्लेषण किया जाता है ताकि सिग्नल की ताकत, निरंतरता और सटीकता को मापा जा सके और आवश्यक समायोजन किए जा सकें। कैलिब्रेशन फ्लाइट नए हवाई अड्डों के लिए एक अनिवार्य सुरक्षा आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि नेविगेशन सिस्टम सही तरीके से काम कर रहे हैं और विमान को सुरक्षित रूप से मार्गदर्शन दे सकते हैं।
एयर कार्गो का भी बड़ा बाजार रहेगा
एक रिपोर्ट बताती है कि आईजीआई एयरपोर्ट भारत में कुल कार्गो संचालन का लगभग 30 प्रतिशत संभालता है। पिछले 5 वर्षों में एयरपोर्ट पर कार्गो यातायात 14 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है। आईजीआई पर अंतर्राष्ट्रीय कार्गो का लगभग 35 प्रतिशत निर्यात कार्गो है। इलेक्ट्रॉनिक्स आईजीआई हवाई अड्डे से निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में से एक है। इसके बाद मशीनरी के पुर्जे आते हैं। आईजीआई पर लगभग 75 प्रतिशत कार्गो आवागमन एनसीआर दिल्ली से होता है। इसमें गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है।
रेडीमेड गारमेंट व इलेक्ट्रानिक्स का है हब
आईजीआई पर कार्गो का दबाव बढ़ रहा है। नोएडा एयरपोर्ट शुरू होने से वहां पर दबाव कम होगा। खासकर पश्चिमी यूपी के जिलों से होने वाला निर्यात अब नोएडा एयरपोर्ट से होने लगेगा। गौतम बुद्ध नगर व गाजियाबाद जिलों में रेडीमेड गारमेंट, मशीनरी, इलेक्ट्रानिक्स आइटम, दवाएं आदि का निर्यात होता है। यहां के व्यापारियों को इसका फायदा मिलेगा।
उद्योगों को मिलेगी उड़ान
नोएडा एयरपोर्ट से कार्गो सेवा शुरू होने से उद्योगों को उड़ान मिलेगी। उत्पादन के बाद उद्यमियों को दूसरे देशों में सामान भेजने में दिक्कत नहीं आएगी। साथ ही वह कोई भी सामान आसानी से मंगा सकेंगे। यमुना सिटी में उत्तर भारत का मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहा है। नोएडा एयरपोर्ट का इसको फायदा मिलेगा।

तय समय पर विमान नोएडा एयरपोर्ट पर उतरा और जरूरी परीक्षण किए गए। अगले सप्ताह फिर परीक्षण किया जाएगा। कैलिब्रेशन फ़्लाइट तकनीकी जांच के लिए आती है। इसके जरिये रडार व नेवीगेशन सिस्टम को परखा गया।
आरके सिंह, सीईओ नायल

















