करहेड़ा में 68 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का डीएम ने किया औचक निरीक्षण, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निर्माण पर जोर

-जिलाधिकारी ने अधिकारियों को समयसीमा में कार्य पूरा कराने के दिए कड़े निर्देश
-अमृत योजना-2.0 के तहत एसटीपी का निर्माण 8 जून 2026 तक पूरा होगा
-68 एमएलडी एसटीपी से मोहन नगर जोन के 10 वार्डों में 67,669 लाभार्थियों को मिलेगा सीवरेज लाभ
-एसटीपी का शोधित पानी सिटी फॉरेस्ट व उद्यान कार्यों में उपयोग किया जाएगा
-निर्माण कार्य में 10 प्रतिशत भौतिक प्रगति, जनवरी 2026 तक कमीशनिंग का लक्ष्य

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। करहेड़ा जोन के अंतर्गत अमृत योजना-2.0 के तहत निर्माणाधीन 68 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का मंगलवार को जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को एसटीपी का निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कराने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि करहेड़ा में निर्माणाधीन इस एसटीपी का समय पर पूरा होना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके क्रियान्वयन से अर्थला और करहेड़ा ड्रेन में उत्प्रवाहित हो रहे घरेलू अशोधित सीवेज की रोकथाम संभव होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए। एसटीपी का निर्माण जल निगम द्वारा कराया जा रहा है। अधिशासी अभियंता अरुण प्रताप सिंह ने जिलाधिकारी को बताया कि इस योजना की स्वीकृत लागत 54,694.55 लाख रुपये है, जबकि अनुबंधित लागत 39,061.52 लाख रुपये (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) है। निर्माण कार्य 11 दिसंबर 2023 को प्रारंभ हुआ था और इसे 8 जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

निर्माण का जिम्मा मैसर्स खिलारी इन्फ्रास्ट्रेक्चर प्राइवेट लिमिटेड फर्म ने लिया है। इस योजना के पूरा होने के बाद मोहन नगर जोन के 10 वार्डों-अर्थला, भौपुरा, गगन विहार, करहेड़ा, राजेंद्र नगर, गरिमा गार्डन, राजीव कॉलोनी, कुटी, पसौंडा और मौसम विहार-में लगभग 67,669 नागरिकों को सीवरेज की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके अंतर्गत 155 किलोमीटर सीवर नेटवर्क और तीन आईपीएस एवं एक एमपीएस के साथ 68 एमएलडी एसटीपी के 10 संयोजन और 67,669 नग सीवर गृह संयोजन किए जाएंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति लगभग 10 प्रतिशत है और जनवरी 2026 के अंत तक इसे कमीशन किया जाना लक्ष्य है। उन्होंने निर्देश दिए कि एसटीपी से शोधित पानी को सिटी फॉरेस्ट और उद्यानों में पेड़-पौधों और हरित क्षेत्रों के विकास हेतु उपयोग किया जाए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को एसटीपी के निर्माण के हर चरण पर निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाएं शहरवासियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। निरीक्षण के दौरान जल निगम के अधिशासी अभियंता अरुण प्रताप सिंह, अनिल कुमार, शिव कुमार तथा परियोजना प्रबंधक रविंद्र सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या कार्य में देरी अस्वीकार्य होगी और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए नियमित समीक्षा की जाएगी। इस औचक निरीक्षण से स्पष्ट संदेश मिला कि गाजियाबाद प्रशासन शहर में सतत और प्रभावी सीवरेज व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रति गंभीर है। इससे करहेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या का समाधान होने के साथ ही पर्यावरणीय सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। यह परियोजना न केवल शहरवासियों को बेहतर स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करेगी, बल्कि गाजियाबाद की सस्टेनेबल और स्मार्ट शहर बनने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।